भारत-चीन सीमा पर बसे जादूंग गांव में बनाए जा रहे होम स्टे, डीएम आर्य ने निर्माण कार्यों का लिया जायजा
वाइब्रेंट विलेज जादूंग गांव पहुंचे उत्तरकाशी डीएम प्रशांत आर्य, निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति का लिया जायजा, जादूंग गांव में बनाए जाएंगे 14 होम स्टे

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : October 5, 2025 at 7:12 PM IST
उत्तरकाशी: भारत-चीन सीमा पर स्थित उत्तराखंड का सीमांत जादूंग गांव अब वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत पर्यटन की नई पहचान बनने जा रहा है. जहां स्थानीय लोगों को सामाजिक-आर्थिक विकास और रोजगार से जोड़ने के साथ ही विभिन्न विकास कार्य तेजी चल रहे हैं. ऐसे में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति का जायजा लेने के लिए डीएम प्रशांत आर्य जादूंग गांव पहुंचे. जहां उन्होंने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को समयबद्धता व गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए.
जादूंग गांव में बनाए जाएंगे 14 होम स्टे, पर्यटकों के ठहरने की मिलेगी सुविधा: बता दें कि रविवार यानी 5 अक्टूबर को भारत-चीन सीमा से सटे जादूंग गांव में पहुंचे डीएम प्रशांत आर्य ने कहा कि योजना के प्रथम चरण में पारंपरिक शैली में 6 होम स्टे का निर्माण कार्य प्रगति पर है. जबकि, दूसरे चरण में 8 होम स्टे बनाए जाएंगे. कुल 14 होम स्टे के पूरा होने पर जादूंग गांव में आने वाले पर्यटकों के ठहरने की आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. इससे एक ओर जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.

भारत-चीन युद्ध के दौरान खाली कराया गया था जादूंग गांव: उन्होंने कहा कि साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जादूंग गांव खाली कराया गया था. हालांकि, स्थानीय ग्रामीण आज भी अपने देवस्थानों की पूजा के लिए गांव में आते रहे हैं. अब वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत यहां बुनियादी ढांचे के विकास, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और गांव को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हो रहा है.
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि निकट भविष्य में जादूंग गांव सीमांत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ स्थानीय संस्कृति व अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. इससे पहले डीएम प्रशांत आर्य ने आईटीबीपी और सेना के अधिकारियों से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की.

भारत-चीन युद्ध का गवाह रहे चुके नेलांग और जादूंग गांव: बता दें कि सीमांत गांव को आबाद करने के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना शुरू की गई है, जिसके तहत गांव को बसाने के लिए बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकसित किया जा रहा है. जिसमें भारत-चीन सीमा पर बसा उत्तरकाशी का नेलांग और जादूंग गांव भी शामिल हैं, जो आने वाले समय में नए कलेवर में नजर आएंगे.
ये दोनों साल 1962 के भारत-चीन युद्ध का गवाह भी रह चुके हैं. युद्ध के दौरान ग्रामीणों को अपने आशियाने छोड़कर जाना पड़ा था. तब से नेलांग और जादूंग गांव समेत आसपास की सीमाएं वीरान पड़ी है, लेकिन अब इन्हें फिर से बसाने की कवायद की जा रही है.
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