मंईयां सम्मान योजना की लाभुक के चेहरे पर लौटी मुस्कान, एकमुश्त 7,500 रु के लिए थी परेशान, ईटीवी भारत की पहल पर बैंक ने की मदद
मंईयां सम्मान योजना की लाभुक तृप्ति को आखिरकार उनके पैसे मिल गए. उन्होंने ईटीवी भारत का शुक्रिया अदा किया.


Published : July 19, 2025 at 5:49 PM IST
|Updated : July 19, 2025 at 5:59 PM IST
रांचीः मार्च माह में राज्य सरकार ने मंईयां सम्मान योजना के लाभुकों के खाते में एक साथ तीन माह की किस्त जारी की थी. सभी को एकमुश्त 7,500 रु मिले थे. लाभुकों की खुशी का ठिकाना नहीं था. बाजार में चहल पहल बढ़ गई थी. लेकिन रांची के हरमू में रहने वाली मंईयां सम्मान योजना की लाभुक तृप्ति देवी परेशान थीं.
उनके मोबाइल पर पैसे आने का मैसेज नहीं आया था. हरमू स्थित इंडियन बैंक गई खाता चेक करवाया. बैंक में बताया गया कि पैसे नहीं आए हैं. फिर पैसे गये कहां. उन्होंने सीएससी में जाकर चेक करवाया तो पता चला कि उनके पैसे आईसीआईसीआई बैंक में ट्रांसफर हो गया है. यहां से उनको ईटीवी भारत का साथ मिला.
ईटीवी भारत की टीम ने 2 जुलाई को आईसीआईसीआई बैंक के अशोक नगर ब्रांच में सपर्क किया. वहां उनके आधार नंबर, मोबाइल नंबर और पैन कार्ड से खाता को सर्च किया गया. लेकिन कोई खाता था ही नहीं. तृप्ति देवी भी बोलीं कि उन्होंने कभी भी आईसीआईसीआई बैंक में खाता नहीं खुलवाया है.
तृप्ति इसलिए ज्यादा परेशान थी कि उनके इंडिया बैंक वाले खाते में दिसंबर माह के 2,500 रु आए थे. फिर मार्च माह की राशि कहां चली गई. तब ईटीवी भारत की टीम ने सीएससी यानी कॉमन सर्विस सेंटर से संपर्क किया. वहां से बताया गया कि अब सीएससी में मंईयां सम्मान से जुड़ा कोई काम नहीं होता है. इसी दौरान ईटीवी भारत ने "मंईयां सम्मान योजना को किया जा रहा है बदनाम, कौन उड़ा रहा है लाभुकों के पैसे" हेडलाइन के साथ खबर पब्लिश किया.
तृप्ति देवी के खाते में ऐसे पहुंची राशि
खबर के पब्लिश होते ही आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन ने ईटीवी भारत से संपर्क किया. यहीं से तृप्ति के खाते की खोजबीन शुरु हुई. इस बीच आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन ने बताया कि तृप्ति देवी कभी गुमला में मनरेगा मजदूरी कर चुकी हैं. उस दौरान आईसीआईसीआई बैंक ने लाभुकों के लिए फिनो पेमेंट बैंक को वेंडर बनाया था. कई दिनों तक जांच के बाद बैंक प्रबंधन ने राशि का पता लगा लिया. फिर आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन ने ही तृप्ति देवी से संपर्क कर उनका केवाईसी कराया और 7,500 रु उनके इंडियन बैंक में ट्रांसफर करवा दिया.
मंईयां सम्मान की लाभुक तृप्ति देवी का परिचय
तृप्ति देवी मूल रुप से गुमला जिला की रहने वाली हैं. फिलहाल रांची के हरमू इलाके में एक किराए के मकान में रहती हैं. दूसरे के घरों में झाड़ू पोछा का काम करती हैं. पति टेंट हाउस में काम करते हैं. दोनों की मेहनत से घर चल रहा है. लेकिन मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की मार्च माह में जारी तीन माह की एकमुश्त किस्त के 7,500 रु खाते में नहीं पहुंचे. तृप्ति मायूस थी. सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुकी थीं.
खास बात है कि पैसे मिलते ही तृप्ति देवी ने ईटीवी भारत को फोन कर धन्यवाद प्रेषित किया. उन्होंने कहा कि आप लोग ना होते तो शायद पैसे कभी नहीं मिल पाते. अच्छी बात ये है कि आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन ने इस मामले को बेहद संजीदगी से लिया. बैंक की ओर से पहल नहीं की गई होती तो शायद तृप्ति देवी के हक के 7,500 रु मनरेगा वाले खाते में पड़े रह जाते.
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