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300 करोड़ डीएमएफ फंड वाले जिले में पंडो आदिवासियों को गंभीर संक्रमण

पंडो जनजाति के लोगों के हाथ, पैर और शरीर में तेजी से संक्रमण फैला है.

TRIBAL AREAS OF KORBA
बच्चों और बूढ़ों को हो रही बीमारी (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : March 31, 2025 at 5:14 PM IST

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Updated : March 31, 2025 at 7:51 PM IST

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कोरबा: सालाना औसतन 300 करोड़ रुपए के डिस्ट्रिक्ट मिनिरल फंड(DMF) वाले कोरबा जिला के संरक्षित पंडो जनजाति के आदिवासी गंभीर संक्रमण से जूझ रहे हैं. पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के केंदई के समीप अड़सेना गांव में पंडो आदिवासियों के 35 से 40 परिवार निवास करते हैं.

कोरबा के आदिवासी इलाकों में फैला संक्रमण: यहां लोगों के हाथ पैर और शरीर में गंभीर संक्रमण फैला हुआ है. खासतौर पर बच्चों के हाथ में फोड़े, फफोले हो गए हैं. कुछ बच्चों के हाथ टेढ़े मेढ़े हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग को इसकी खबर हुई तो, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गांव में भेजा गया. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ग्रामीणों को "स्केबीज" नाम की बीमारी हो गई है. जो हाइजीन मेंटेन नहीं करने और दूषित जल का उपयोग करने से पनपती है.

कोरबा के आदिवासी इलाकों में अजीब बीमारी (ETV BHARAT)

गांव में इस तरह के हालात: विकास खंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पंचायत अड़सरा में एक पंडो मोहल्ला है, जहां लगभग 38 पंडों परिवार निवासरत हैं. यहां बीते कुछ समय से बच्चों के हाथ, पैर व शरीर में संक्रमण फैला हुआ है.

Serious Skin Disease In Korba
कोरबा में स्किन की गंभीर बीमारी (ETV BHARAT)

स्थानीय लोगों का दावा है कि "यह संक्रमण गांव के समीप मौजूद कोयला खदान से निकलने वाले प्रदूषित जल के संपर्क में आने से हुआ है. इस गांव के आसपास सभी लोगों को संक्रमण से प्रभावित किया है. कई बार सूचना देने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के लोग नहीं पहुंचे. हालांकि बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां जरूर पहुंची है."

आदिवासियों का सिर्फ दोहन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं: एकता परिषद के मुरली महंत ने इस बात की सूचना स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाई. स्थानीय प्रशासन को भी इन्होंने ही अवगत कराया. वह लंबे समय से आदिवासियों के बीच रहकर काम करते हैं.

मुरली कहते हैं कि बच्चों के हाथ सिकुड़ रहे हैं और बुखार से प्रभावित हो रहें हैं. बड़े बुजुर्गों को पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर खुजली का प्रभाव है. य संक्रमण तेजी से यहां के निवासियों में फैलता जा रहा है. जल्दी से उपचार नहीं होने से स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है. इस गांव में अभी तक न स्कूल है, ना ही आंगनबाड़ी, जबकि यहां के निवासी राष्ट्रपति दत्तक पुत्र हैं.

मुरली महंत ने बताया कि सभी संरक्षित जनजाति के आदिवासी हैं. इन लोगों का सुध लेने वाला कोई नहीं है. इस गांव के जमीन, जंगल खदान से प्रभावित हैं. खनिज न्यास का भारी भरकम फंड होने के बाद भी प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित इन आदिवासियों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

मुरली महंत का यह भी कहना है कि आदिवासी बेहद निम्न स्तर का जीवन जी रहे हैं. कई बार सूचना देने के बाद अंततः कुछ अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची है? लेकिन अभी समुचित इंतजाम नहीं किया गया है. आदिवासियों को ठोस इलाज की जरूरत है.

सीएमएचओ ने क्या कहा ?: वहीं कोरबा जिले के सीएमएचओ डॉ एसएन केसरी का कहना है कि सूचना मिलते ही हमने स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां भेजी है. ग्रामीणों को स्केबीज नमक की संक्रमित बीमारी हुई है. यह बीमारी दूषित जल के उपयोग से और बॉडी टू बॉडी टच से फैलती है. विषाणु तेजी से फैलते हैं और चमड़ी में अंदर ही अंदर वह अपना घर बना लेते हैं. जिसके कारण हाथ में फोड़े, फुंसी, फफोले और सिकुड़न की समस्या भी आती है.

लंबे समय तक यदि बीमारी शरीर में रह जाए तो तकलीफ और बढ़ सकती है. हालांकि इसके इलाज के लिए हमारे पास पर्याप्त संख्या में दवा मौजूद है. तीन बार मलहम लगाने से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है-डॉ एसएन केसरी, सीएमएचओ

ग्रामीणों को सलाह: ग्रामीणों को एक दूसरे से छूने से बचना चाहिए. दूषित जल के उपयोग से भी बचना चाहिए. सामान्य तौर पर यह बीमारी दूषित जल का उपयोग और गंदगी के बीच रहने से उत्पन्न होती है. ग्रामीणों को इन सभी बातों का ध्यान रखना होगा, हमने इलाज शुरू कर दिया है.

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Last Updated : March 31, 2025 at 7:51 PM IST