कभी पहचान छुपाकर मॉल में करती थी काम! अब बिहार की ट्रांसजेंडर 'परी पूजा' पहनेगी खाकी
बिहार की सीतामढ़ी की परी पूजा ने बड़ी सफलता हासिल कर समाज में अपनी अलग पहचान बनायी है. ट्रांसजेंडर पूजा अब खाकी में दिखेगी.

Published : May 21, 2025 at 1:18 PM IST
सीतामढ़ी: कभी पूरे समाज से अपनी पहचान छुपाने वाली परी पूजा पर आज उसके परिवार को गर्व है. जिस परी पूजा का कभी लोग मजाक उड़ाते थे, आज उसपर उसके माता-पिता को गर्व हो रहा है. सीतामढ़ी के लोग मूलरूप से ट्रांसजेंडर पूजा के संघर्ष और सफलता को सलाम कर रहे हैं.
ट्रांसजेंडर पूजा पहनेगी वर्दी: दरअसल ट्रांसजेंडर पूजा बहुत जल्द वर्दी में नजर आएगी. परी पूजा मूल रूप से थर्ड जेंडर है. ऐसे बच्चे 99 फीसदी माता-पिता को पसंद नहीं आते हैं, लेकिन पूजा के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ. वह अपने भाइयों की तरह माता-पिता की दुलारी रही.
"गरीब परिवार के परिवेश में मेरी बेटी ने पढ़कर एक बहुत अच्छा मुकाम हासिल किया है. अपनी मेहनत से उसने मॉल में नौकरी कर कर पढ़ाई की है. यह हमारे परिवार के लिए फर्क की बात है."- रामनाथ भगत, पूजा के पिता
बिहार पुलिस की भर्ती परीक्षा में सफल: परिवार के लोगों ने कभी भी पूजा को एहसास नहीं होने दिया कि वह अलग है. उसे हमेशा भेदभाव होने से अभिभावक बचाते रहे और ढाल बनकर खड़े रहे. एक तरह से माता पिता भूल गए थे कि उनकी बिटिया कुछ अलग है. परिवार से मिले प्यार और सहयोग से थर्ड जेंडर पूजा ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छूआ है. अब वह दिन दूर नहीं जब पूजा पुलिस की खाकी वर्दी में नजर आएगी. दरअसल, वह बिहार पुलिस भर्ती की परीक्षा में सफल हुई है.
मन में कसक, जज्बा रहा ऊंचा: थर्ड जेंडर की कसक के साथ 22 बसंत पार कर चुकी पूजा ने सफलता की पहली सीढ़ी पार कर ली है. उसने अबतक की जिंदगी में थर्ड जेंडर को गंभीरता से नहीं लिया. इसे लेकर उसके मन में भले ही एक कसक हो, पर जज्बा ऊंचा रहा है.

सीतामढ़ी से कर रही है स्नातक: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान पूजा ने अपने अतीत के कुछ पन्नों को पलटते हुए बताया कि प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की थी. मैट्रिक और इंटर कमला बालिका उच्च विद्यालय, डुमरा से की. फिलहाल गोयनका कॉलेज, सीतामढ़ी से स्नातक कर रही हूं.
"मेरे पिता किसान हैं. उन्हीं पर परिवार का पूरा बोझ था. उनके बोझ को कुछ कम करने के लिए मैंने सीतामढ़ी शहर के एक मॉल में पहचान छुपाकर तीन सालों तक काम किया."- परी पूजा, ट्रांसजेंडर
'रात्रि 8 बजे तक ड्यूटी, फिर परीक्षा की तैयारी': सिपाही की परीक्षा में सफल होकर अचानक सुर्खियों में आई परी पूजा कहती हैं कि, मॉल में सुबह 10 बजे से रात के 08 बजे तक ड्यूटी करती थी. फिर रात्रि के 12 बजे तक सिपाही भर्ती की परीक्षा की तैयारी करती थी. वह डुमरा प्रखंड के मालडीह गांव की रहने वाली हैं.दो भाई और एक बहन में सबसे बड़ी पूजा रिजल्ट से खुश है.
'रहमान सर और सीएम के प्रति आभारी': पूजा ने कहा कि मेरी सफलता की खुशी दोगुनी हो गई है. कारण कि परिवार में हमेशा बराबरी का हक मिला. गांव वालों ने भी कभी अलग नजरों से नहीं देखा. किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की. पूजा ने अपनी सफलता के लिए पटना वाले रहमान सर का धन्यवाद दिया है. साथ ही सीएम नीतीश कुमार को भी शुक्रिया कहा.
थर्ड जेंडर के लिए 1 फीसदी सीट आरक्षित: पूजा ने बताया कि वह रहमान सर से ऑनलाइन पढ़ती थी. उसकी जैसी लड़की अगर खाकी पहने तो पूरे समाज के सामने एक बड़ा और अच्छा संकेत जाता है. इसके लिए नीतीश सरकार को क्रेडिट जाता है, जिन्होंने सिपाही बहाली में थर्ड जेंडर के लिए एक फीसदी सीट आरक्षित किया है.
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