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पैर में चप्पल पहनने की औकात नहीं थी, रुला देगी गरीबी को मात देकर किसान बेटे के डॉक्टर बनने की कहानी

तारकेश्वर कुमार के लिए संघर्ष कोई नई बात नहीं थी. जो कभी चप्पल भी नहीं पहन सकता था, आज डॉक्टर बनकर इलाज कर रहा है.

पूर्णिया के डॉक्टर तारकेश्वर कुमार की कहानी
पूर्णिया के डॉक्टर तारकेश्वर कुमार की कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 3, 2025 at 8:00 PM IST

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Updated : February 3, 2025 at 8:09 PM IST

4 Min Read
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पूर्णिया: दुनिया में किसी गरीब मां-बाप का सपना अपने बच्चों को 'ताकतवर' बनाना होता है. यह बात बिहार के पूर्णिया के किसान सुरेंद्र यादव पर सोलह आने सच साबित हुई है. एक छोटे से किसान का बेटा जो कभी चप्पल भी नहीं पहन सकता था, आज डॉक्टर बनकर गरीबों का इलाज कर रहा है. हम बात कर रहे हैं पूर्णिया के गिने चुने टॉप सर्जन की लिस्ट में शामिल डॉक्टर तारकेश्वर कुमार की.

तारकेश्वर की यात्रा की शुरुआत: डॉक्टर तारकेश्वर कुमार की कहानी दृढ़ता की शक्ति का प्रमाण है. किसान परिवार में जन्मे तारकेश्वर कुमार के लिए संघर्ष कोई नई बात नहीं थी. उनके माता-पिता जो कटिहार के मनिहारी के खेतों में अथक परिश्रम करते थे, शिक्षा के महत्व को समझते थे, भले ही उनकी औपचारिक स्कूली शिक्षा सीमित थी. वे जानते थे कि शिक्षा न केवल उनके लिए बल्कि उनके बच्चों के लिए भी बेहतर भविष्य की कुंजी है. उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाने के लिए दिन-रात एक कर दिया और तमाम कठिनाइयों को पार करते हुए उनका बेटा डॉक्टर बन गया.

पूर्णिया के डॉक्टर तारकेश्वर कुमार (ETV Bharat)

बिना चप्पल के जाते थे स्कूल: किसान सुरेंद्र यादव के बेटे डॉ तारकेश्वर कुमार ने बताया कि उनके पिता छोटे किसान हैं और माता कुशल गृहिणी हैं. डॉ तारकेश्वर कटिहार के मनिहारी थाना क्षेत्र के दिलारपुर के निवासी हैं. उन्हें अपने जीवन में कई मुसीबतें झेलनी पड़ीं. कभी बिना चप्पल के नंगे पैर स्कूल जाते थे तो कभी भूखे प्यासे रहकर अपनी पढ़ाई की. इन्होंने मैट्रिक 2011 में कटिहार के मनिहारी के बलदेव प्रसाद सुखदेव प्रसाद स्कूल से की थी. 2013 मध्य विद्यालय मनिहारी में इंटर पास कर नीट की तैयारी शुरू की.

लोगों को मिलते थे ताने: डॉ तारकेश्वर कुमार ने कहा कि बार-बार लोगों के ताने सुनकर उनका इरादा कभी-कभी कमजोर हो जाता था, लेकिन पिता के सपनों को पूरा करने की जिद ने उन्हें नीट की परीक्षा में अच्छे अंकों से सफलता दिलाई. फिर उन्होंने आगे की एमबीबीएस, एमडी और एमएस की पढ़ाई पटना के मेडिकल कॉलेज से पूरी की और आज पूर्णिया में बीते 2022 से अपनी सेवा मरीजों को दे रहे हैं. वहीं पूर्णिया के कप्तान पुल के पास आरसी यादव मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल के फाउंडर डॉ तारकेश्वर कुमार ने युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि आप अपने सफलता के बीच कभी भी गरीबी को बाधा ना बनने दें.

"यह गरीबी आपकी पहली सीढ़ी है, जिसे पार करके आप सफलता की सीढ़ी पर चढ़ेंगे. ऐसे में आप अपने सपनों को पूरा करने में जी जान लगा दें. दुनिया की बातों में ना आएं और लोगों के ताने सुनकर आप अपना रास्ता ना बदलें. जो लोग आज आपके खिलाफ हैं, वही लोग कल आपके साथ होंगे. इसलिए अपने सपनों को पूरा करने का निरंतर प्रयास करें, सफलता आपका इंतजार कर रही है." -तारकेश्वर कुमार, डॉक्टर

खुद लिखी सफलता की कहानी: डॉक्टर तारकेश्वर के गांव के रहने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव बताते हैं कि वह उनके पिता सुरेंद्र यादव के दोस्त हैं. तारकेश्वर के पिता की स्थिति काफी खराब थी. उसके बावजूद भी उनका सपना था कि उनका बेटा बड़ा होकर डॉक्टर बने. इसके लिए कई मेडिकल कॉलेज में उनकी एडमिशन के लिए कोशिश भी की. मगर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण एडमिशन नहीं हो सका. उसके बाद तारकेश्वर को लगा कि मेडिकल की पढ़ाई वह पैसे की बदौलत नहीं अपनी पढ़ाई के बदौलत एवं मेहनत से हासिल करेंगे और उसका परिणाम आज सामने है.

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Last Updated : February 3, 2025 at 8:09 PM IST