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बिहार के श्मशान घाट में प्रकट हुए शिवलिंग का इतिहास, सिर पर गंगा और सामने से भगवान गणेश

बिहार के मोतिहारी में 2003 में दुधौरा नदी के बगल में स्थित श्मशान घाट में अचानक शिवलिंग प्रकट हुआ था. जानें इसका अनोखा इतिहास.

Shivling in crematorium in bihar
मोतिहारी में श्मशान घाट में शिवलिंग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 22, 2025 at 10:14 AM IST

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मोतिहारी: देशभर में शिव के अनेकों धाम स्थापित हैं. प्रत्येक शिव धामों की अलग-अलग कथाएं हैं. जिस प्रकार से सभी शिव धाम एक दूसरे से भिन्न है, ठीक उसी प्रकार से इन शिव धामों की चमत्कारी घटनाएं भी एक दूसरे से एकदम अलग हैं.

श्मशान घाट पर शिवलिंग प्रकट: उन्हीं शिवलिंगों में से एक मोतिहारी में स्थित है. बैकुंठ धाम श्मशान घाट में 25 साल पहले शिवलिंग निकलने की घटना हुई थी. यह घटना 25 साल पहले की है, जब श्मशान घाट को बैकुंठ धाम के रूप में स्थापित किया गया था.

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त्रिमूर्ति महादेव के नाम से विख्यात: शिवलिंग के सिर पर गंगा मैया नजर आती हैं. वहीं शिवलिंग को सामने से देखने पर भगवान गणेश के दर्शन होते हैं. यही कारण है कि इस शिवलिंग का नाम त्रिमूर्ति महादेव रख दिया गया है.

सालों भर आते हैं श्रद्धालु: बता दें कि मोतिहारी के रक्सौल अनुमंडल के छौड़ादानों दरपा थाना क्षेत्र के बैकुंठ गांव में बैकुंठ धाम के नाम से बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है, जहां सालों भर लोग पूजा करने श्रद्धालु आते हैं.

श्मशान में स्थापित महादेव मंदिर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव को श्मशान काफी प्रिय है. भारत की भूमि में कई ऐसे शिवधाम हैं, जो श्मशान में स्थापित हैं, फिर वह चाहे काशी विश्वनाथ धाम हो या फिर बरेली के मरघट का महादेव मंदिर हो, उज्जैन का चक्रतीर्थ श्मशान घाट में बना बैकुंठ धाम ही क्यों न हो. इन शिव धामों के चमत्कारिक किस्से इन्हें और भी अलौकिक बनाते हैं.

SHIVLING IN CREMATORIUM IN BIHAR
त्रिमूर्ति महादेव के नाम से विख्यात (ETV Bharat)

चमत्कारी धाम या रहस्यमयी कथा जीवंत: भारत देश को ऐतिहासिक विंध्य के धरती कहा जाता है. इस क्षेत्र को ऋषि मुनियों की तपोभूमि भी कहा जाता है. विंध्य की पर्वतमालाएं, नदियां और वनक्षेत्र आज भी उन दिव्य अनुभवों के साक्षी हैं. यहां हर दिशा में कोई न कोई चमत्कारी धाम या रहस्यमयी कथा जीवंत है. इन स्थलों से जुड़ी लोकगाथाएं और चमत्कार आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई हैं, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे.

खुदाई में मिला शिवलिंग: मंदिर के पुजारी कपिलदेव कुमार त्रिपाठी ने बताया,करीब पच्चीस साल पहले की बात है, चारों तरफ खेतों में पानी भरा हुआ था. दुधौरा नदी के किनारे श्मशान घाट हुआ करता था. उसी रास्ते मछली मारने गांव के लिए रामयज्ञा मुखिया जा रहे थे. धरती में एक बड़ी दरार देख स्थानीय स्तर पर जांच पड़ताल के बाद धरती की खुदाई हुई, जहां से एक शिवलिग प्राप्त हुआ.

SHIVLING IN CREMATORIUM IN BIHAR
श्मशान घाट में प्रकट हुआ था शिवलिंग (ETV Bharat)

"इसके बाद चारों तरफ हल्ला हो गया. इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना नहीं हुई है. करीब पच्चीस वर्ष पूर्व श्मशान घाट के समीप से धरती की खुदाई के बाद शिवलिग निकला था. जिसके बाद से यहां सालों भर पूजा अर्चना करने लोग पहुंचते हैं. वर्ष 2003 के 30 जून को बैकुंठ गांव निवासी मल्लाह जाति के रामयज्ञा मुखिया ने खुदाई की थ, जिसमें यह शिवलिंग प्राप्त हुआ था."- कपिलदेव कुमार त्रिपाठी, पुजारी, बैकुंठनाथ महादेव मंदिर

दिन में भी जाने से डरते थे लोग: लोगों का कहना है कि श्मशान के कारण लोग दिन में भी इस स्थान पर जाने से कतराते थे, लेकिन शिवलिंग के ऊपर होने के बाद यह जगह दर्शनीय स्थल बन गयी है. प्रत्येक साल सावन से पहले मंदिर के आसपास की व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त कर दी जाती है. मंदिर परिसर में बांस के बल्ले से बैरिकेटिंग कर दी जाती है.

सावन में होती है विशेष तैयारी: भक्तों के भीड़ को देखते हुए पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग लाइन बनाया जाता है. मंदिर के आसपास लोगों के रहने के लिए धर्मशाला चापाकल आदि की व्यवस्था रहती है. दुधौरा नदी के तटों को व्यवस्थित करने के साथ नदी में भी बांस के बल्ले से घेराव कर दिया जाता है. तरह-तरह के खेल-तमाशा दिखाने वाले पहुंचते है. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दरपा थाना के साथ-साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जाती है.

SHIVLING IN CREMATORIUM IN BIHAR
बैकुंठनाथ महादेव मंदिर (ETV Bharat)

मनोकामना पूरी करते हैं भोलेनाथ: इस शिवधाम का कोई उल्लेख न तो किसी ग्रंथ में है और न ही इसका लिखित कोई प्रमाण है, लेकिन पंडित कपिलदेव कुमार त्रिपाठी के अनुसार 07 कालांतर में यहां मंदिर था, जो किसी प्राकृतिक आपदा में धरती के नीचे दब गया था. जो धीरे-धीरे ऊपर हुआ. खुदाई से पहले यह जगह श्मशान घाट थी. आज बाबा बैकुंठनाथ का धाम बन गया है. भक्त सच्चे दिल और श्रद्धाभाव से बाबा को जलाभिषेक करते हैं. माना जाता है कि ये मांगी जाने वाली सारी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं. यही कारण है कि आज यहां दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.

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