भवानी शंकर की आंखें 2 लोगों के अंधेरे जीवन में देगी रोशनी, पत्नी ने पाकिस्तानी को दिया लीवर
शाजापुर में भवानी शंकर बाहेती के निधन के बाद परिजन ने की उनकी आंखें डोनेट, पढ़िए बाहेती परिवार की अंगदान जागरूकता की एक प्रेरक कहानी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 7, 2025 at 9:56 AM IST
|Updated : September 7, 2025 at 10:14 AM IST
शाजापुर: शुजालपुर के भवानी शंकर बाहेती की आंखें अब 2 लोगों के जीवन में नई रोशनी देगी. कॉर्निया रोगी अब उनकी आंखों से इस दुनिया को देख सकेंगे. दरअसल, 75 वर्षीय अनाज व्यवसायी भवानी शंकर बाहेती का शनिवार को निधन हो गया. जिसके बाद परिजन भवानी शंकर की इच्छा अनुसार उनकी आंखें डोनेट की. बता दें कि, पूरा बाहेती परिवार अंगदान को लेकर काफी जागरूक हैं. भवानी शंकर बाहेती की पत्नी राधा बाहेती भी अंगदान कर चुकी हैं उन्होंने पाकिस्तानी को अपना लीवर दान किया था. उन्होंने अपनी आंखें भी दान करने का संकल्प लिया है.
कॉर्निया रोगी को प्रत्यारोपित होंगी आंखें
भले ही भवानी शंकर अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी आंखों से 2 लोगों के जीवन में रोशनी जरूर होगी. उनके निधन के बाद परिजन ने आंखें डोनेट करने के लिए डॉक्टर को संपर्क किया. जिसके बाद डॉ. मनोज पंचोली ने पूरी प्रक्रिया कर उनकी आंखें इंदौर के आई बैंक भेजे हैं. जहां भवानी शंकर की आंखें 2 कॉर्निया रोगी को प्रत्यारोपित की जाएगी. इससे 2 लोगों के जीवन में रोशनी आ जाएगी और वे इस दुनिया को देख सकेंगे.
गर्व महसूस कर रहा बाहेती परिवार
अंगदान के लिए जागरूक बाहेती परिवार भवानी शंकर के निधन से दुखी है लेकिन उनके आई डोनेट करने पर गर्व भी महसूस कर रहा है. राकेश बताते हैं कि "पिताजी अनाज व्यवसाय करते थे. उन्होंने मृत्यु उपरांत आंखें डोनेट करने का संकल्प लिया था. पापा की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती. लेकिन आज हमारा पूरा परिवार इस बात पर गर्व कर रहा है कि पिताजी के आई डोनेट करने के संकल्प के कारण 2 लोगों के अंधेरे जीवन में रोशनी होगी."

लीवर डोनेट कर चुकी हैं भवानी शंकर की पत्नी
अपनी पोती महक बाहेती की जान बचाने के लिए भवानी शंकर की पत्नी राधा बाहेती ने लीवर डोनेट की प्रक्रिया पूरी कराई. लेकिन राधा बाई और महक का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होने के कारण महक को दादी का लीवर ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सका. लेकिन संयोग से मेदांता अस्पताल गुड़गांव में 2012 में पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट कमांडर इफ्तखार (अब जीवित नहीं) उनको भी लीवर की जरूरत थी. उन्हें अपना लीवर डोनेट करने के लिए उनकी पत्नी डॉ. इफरा अहमद भी पूरी प्रक्रिया कर चुकी थी. लेकिन इन दोनों का भी ब्लड ग्रुप मैच नहीं होने के कारण ट्रासंप्लांट नहीं हुआ. ऐसे में चिकित्सकीय परीक्षण में महक की दादी राधा बाहेती का लीवर मैच होने पर पाकिस्तानी मरीज को प्रत्यारोपित किया गया और इफ्तार की पत्नी डॉ. इफरा का लीवर महक बाहेती से मैच होने पर महक को प्रत्यारोपित कर दिया गया.
राधा बाहेती भी करेंगी नेत्रदान
राकेश बाहेती ने बताया कि "मताजी (भवानी शंकर की पत्नी राधा बाहेती) ने भी नेत्रदान का संकल्प पत्र भरा हुआ है. दरअसल, बाहेती परिवार की अंगदान को लेकर जागरूकता की एक प्रेरक कहानी है. जेनेटिक बीमारी की वजह से जब वह 6 साल की थी तो 2012 में महक बाहेती लिवर ट्रांसप्लांट हुआ. आज महक हैदराबाद में रहकर ला की पढ़ाई कर रही है. महक कहना है कि "अंगदान के कारण ही आज वह इस दुनिया में है. यदि उसका लिवर ट्रांसप्लांट नहीं होता तो वह इस दुनिया में नहीं होती. इसलिए लोगों को अंगदान करना चाहिए."
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कौन कर सकते हैं नेत्रदान
डॉ. मनोज पंचोली ने बताया कि "सामान्य मृत्यु होने पर ही नेत्रदान किया जा सकता है. यदि किसी को एचआईवी, हेपेटाइटिस और कैंसर आदि संक्रामक बीमारी है तो उनकी आंखें को किसी को प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता है. हालांकि उनकी आंख को शोध के लिए उपयोग किया जा सकता है."

