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K-SOS ऐप अब सेफ्टी के साथ मेंटरशिप, काउंसलिंग व सफल लोगों से इंटरेक्शन भी कराएगी

कोटा के कोचिंग छात्रों के लिए बनाई गई K-SOS एप्लिकेशन में अब नए फीचर्स जोड़े जाएंगे.

K SOS एप्लिकेशन में नए फीचर्स
K SOS एप्लिकेशन में नए फीचर्स (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : October 4, 2025 at 12:04 PM IST

5 Min Read
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कोटा : देश भर से कोटा कोचिंग करने आने वाले स्टूडेंट्स को जरूरत पड़ने पर एक क्लिक में सुरक्षा मुहैया हो रही है. ये सुविधा K-SOS एप्लिकेशन के जरिए मिल रही है. पुलिस अब इसमें कई नए फीचर्स जोड़ने जा रही है, जिनमें काउंसलिंग से लेकर मेंटर बनाने के फीचर्स शामिल हैं.

कोटा शहर की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम का कहना है कि कई विद्यार्थी कोटा से पढ़कर सफल हुए और सफलता का डंका विश्व में बजा रहे हैं. उन लोगों से भी वर्तमान स्टूडेंट्स का इंटरेक्शन कराया जाएगा. यह भी ऐप के जरिए किया जाएगा. साथ ही कई सारी इनफॉर्मेशन भी इसमें दी जाएगी, ताकि इस ऐप का स्टूडेंट ज्यादा उपयोग कर सकें. फिलहाल इस ऐप पर केवल पैनिक बटन की ही सुविधा है, लेकिन इसमें कई सारी सुविधाएं अब बढ़ाई जा रही हैं. समय से साथ इसकी जरूरत है. साथ ही ज्यादा बच्चे इसका उपयोग करेंगे तो अन्य छात्रों को भी इसे उपयोग करने में हिचकिचाहट नहीं होगी.

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अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिलीप सैनी का कहना है कि पुलिस ने साल 2024 में पैनिक बटन वाली K-SOS एप पुलिस ने लॉन्च की थी, जिसको हजारों की संख्या में बच्चों ने डाउनलोड किया हुआ है. बड़ी संख्या में बच्चों तक पुलिस इस ऐप के जरिए पहुंचती भी है. इसमें बच्चों की लोकेशन से लेकर सब इनफॉरमेशन पुलिस के पास एक क्लिक में पहुंच रही है. कोटा कोचिंग में एडमिशन लेने के साथ ही यह ऐप बच्चों को डाउनलोड करवाई जाती है. वर्तमान में करीब 70 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स ने इसे डाउनलोड किया हुआ है. इसको लगातार अपडेट करने की जरूरत है. बच्चों की मदद तब होगी, जब वे लगातार इससे कनेक्ट रहेंगे, इसलिए कनेक्शन बढ़ाने व ऐप के सिस्टम को सुदृढ़ बनाने के लिए सुधार का काफी प्रयास कर रहे हैं.

चंद मिनट में पहुंच जाती है पुलिस : एडिशनल एसपी दिलीप सैनी ने बताया कि K-SOS ऐप के सर्वर पर कोचिंग स्टूडेंट का पूरा ब्योरा भी दर्ज है. कोटा में पढ़ रहे स्टूडेंट का नाम, पिता का नाम, स्थानीय अभिभावक का नाम और नंबर, कोचिंग संस्थान, हॉस्टल और इमरजेंसी नंबर शामिल है. जब स्टूडेंट ऐप में सुरक्षा मांगने के लिए क्लिक करता है तो उसकी सारी इनफॉर्मेशन और लोकेशन कंट्रोल रूम में आ जाती है. इसके बाद तत्काल मदद के लिए स्थानीय पुलिस और कंट्रोल रूम की स्टूडेंट सेल दी गई लोकेशन पर भी पहुंच जाती है. इसमें पुलिस को बच्चों की लोकेशन की दोबारा जरूरत भी नहीं पड़ती व कॉल भी नहीं करना होता है.

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स्टडी प्लानिंग में भी कर सकते हैं बदलाव : कोटा से हजारों की संख्या में स्टूडेंट आईआईटियन व डॉक्टर बने हैं. यहां तक कि प्रशासनिक सेवाओं में आईएएस और आईपीएस भी बने हैं. वे कई जिलों और राज्यों में ब्यूरोक्रेसी से लेकर कई विभागों में नेतृत्व कर रहे हैं. खुद के बड़े-बड़े स्टार्टअप खड़े कर दिए हैं. रिसर्च से लेकर बड़ी फैक्ट्री के मालिक हो गए हैं. उनका नाम देश ही नहीं विश्व भर में हो रहा है. ऐसे में ऐप के जरिए यह कोशिश कर रहे हैं कि इन लोगों तक कोटा के बच्चे जुड़ सकें, उनसे बात कर सकें. बच्चों को पढ़ाई से लेकर अपने फ्यूचर प्लानिंग या और भी किसी तरह का कोई शंका है तो सफल लोगों से वह उसपर राय ले सकते हैं. उसके अनुसार आगे अपनी पढ़ाई योजना में बदलाव भी कर सकते हैं.

मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस में सफलता के गुर भी : एडिशनल एसपी दिलीप सैनी का कहना है कि कोटा से पढ़कर सफल हुए और आज बड़े मुकाम पर पहुंचे हुए व्यक्ति ही बच्चों के मेंटर के रूप में अपनी सफलता की कहानी बताएंगे व टिप्स देंगे तो बच्चे मोटिवेट भी होंगे. हमारा लक्ष्य है कि ऐप के जरिए इन दोनों को जोड़ दिया जाए, जिसमें वर्तमान में पढ़ रहे बच्चे और पढ़कर सफल हुए व्यक्ति शामिल होंगे. वे अपनी सफलता की बात बता सकते हैं. बच्चों को किसी भी तरह का कोई डाउट हो तो उसे क्लियर भी कर सकते हैं, क्योंकि कोटा के संस्थाओं से निकले सफल लोग अपनी बात कहेंगे तो बच्चों का उनसे अटैचमेंट भी रहेगा और उनसे मोटिवेट भी होंगे. बच्चों से इंटरेक्ट कर उन्हें मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस की सफलता के गुर सीखा सकें. सफल व्यक्ति जब अपनी कहानी बताएंगे तो बच्चे मोटिवेट होंगे.

वन टू वन मेंटर भी जुड़ेंगे : दिलीप सैनी का कहना है कि K-SOS एप्लिकेशन वर्तमान में केवल सुरक्षा की दृष्टि से काम कर रही है, लेकिन अब इनफॉर्मेटिव और ऐप के साथ कनेक्ट रहने के लिए उसे और उपयोगी बनाया जाएगा. इसमें इनफॉरमेशन हम उपलब्ध कराएंगे, ताकि यह ज्यादा उपयोगी होगी. क्राइसिस के समय इसका एक्सेस ज्यादा कर सकें ताकि उसकी मदद पुलिस कर सके. ऐप के जरिए वन टू वन मेंटर को भी जोड़ा जाएगा ताकि स्टूडेंट्स मेंटर से कॉन्टेक्ट कर सकें, यह प्लेटफॉर्म उसकी अच्छी मदद भी करेगा. यहां से पढ़कर सफल हुए लोगों का कोटा से भी जुड़ाव है और उसकी मदद यहां पढ़ रहे बच्चों को भी मिलेगी.