आदमखोर बाघ को मिली साज, सलाखों में कटेगी बाकी जिंदगी
सिवनी में दहशत मचाने वाले बाघ को वन विभाग ने किया रेस्क्यू, अब नहीं दिखा पाएगा अपना आतंक, मिली सजा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 22, 2025 at 7:02 AM IST
सिवनी: मध्य प्रदेश में कभी शहडोल जिले तो कभी सिवनी जिले में जानवरों के आतंक की खबरें सामने आती रहती है. इसी तरह पिछले दिनों सिवनी जिले में बाघ के आतंक से आसपास के ग्रामीण परेशान थे. इतना ही नहीं बाघ ने दो लोगों की जान भी ले लेती थी. आखिरकार वन विभाग ने उस आदमखोर बाघ को पकड़ लिया है. उसे ट्रेंकुलाइज कर एक पिंजरे में रखा गया है.
दो लोगों को बना चुका था शिकार
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि "20 जून को सिवनी जिले के बावनथडी गांव का युवक सुमित पंन्द्रे अपने साथियों के साथ दक्षिण सिवनी सामान्य वन मंडल के पिंडरई बुट्टे बीट के जंगल में मवेशी चराने गया था. उस पर बाघ ने हमला कर दिया था. उस घटनास्थल के कुछ दूरी पर ही वन विभाग का कैमरा ट्रैप लगा हुआ था. उसमें टाइगर का फोटोग्राफ आ गया था. इसी टाइगर ने लगभग सात माह पहले बावनथड़ी गांव के ही एक और युवक पर हमला किया था.
टेरिटरी में बाघ ने फैला रखा था दहशत
इस बाघ ने पिछले एक महीने से उस क्षेत्र में काम करने वाले वन कर्मियों एवं ग्रामीणों के ऊपर भी कई बार हमला किया था. वहीं आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा बाघ को भी क्षति पहुंचाने का खतरा था. इसलिए मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक मध्य प्रदेश से मिली अनुमति के आधार बाघ का सुरक्षित रस्क्यू कर लिया गया है.
वन विहार भोपाल में काटेगा सजा
बाघ का रेस्क्यू करने के बाद उसे भोपाल के वन विहार भेजा गया है. जहां पर अब वो सीमित इलाके में रहेगा. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि "आमतौर पर बाघ आक्रामक नहीं होते हैं, लेकिन अपनी टेरिटरी की सुरक्षा करते वक्त या फिर जब वे शिकार को खाते हैं और कोई उस वक्त उन्हें डिस्टर्ब करे, तो बाघ को गुस्सा आ जाता है. फिर बाघ इंसानों पर हमला कर देते हैं.

ऐसे मे उन्हें एक सीमित एरिया में रखकर उनकी आदत को बदलने का प्रयास किया जाता है. यह प्रकार की सजा होती है. खुद से वे शिकार नहीं कर सकते, बल्कि उन्हें भोजन अलग से दिया जाता है."

बाघ को पकड़ने करनी पड़ती है मशक्कत
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉक्टर अंकित मेश्राम ने बताया कि "खुले जंगल में बाघ का रेस्क्यू करना वन विभाग के लोगों के लिए बड़ी चुनौती होता है. किसी कुएं या फिर सीमित जगह पर बाघ दिखाई देता है, तो उसे बेहोशी का इंजेक्शन देकर ट्रेंकुलाइज कर दिया जाता है और पकड़ लिया जाता है, लेकिन खुले जंगल में बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के लिए हाथियों की मदद ली जाती है, क्योंकि हाथी जंगल के हर इलाके में पहुंच सकते हैं.

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वन प्राणी विशेषज्ञ हाथियों में सवार होकर बेहोशी की दवा दूर से ही बंदूक के जरिए बाघ को मारते हैं. जिसे ट्रेंकुलाइज करना कहते हैं. उसके कुछ देर बाद बाघ बेहोश हो जाता है. इस प्रक्रिया में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि बाघ की उम्र और उसका वजन लगभग कितना है. उस हिसाब से उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया जाता है. फिर एक निश्चित समय में बाघ को होश आ जाता है. बेहोशी के दौरान ही बाघ को पिंजरे में कैद कर लिया जाता है."

