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नौरादेही टाइगर रिजर्व विस्थापन में हेरफेर, विस्थापितों की परमिशन के बिना बैंक ने खोली पॉलिसियां

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व के विस्थापितों की मुआवजे राशि में हेराफेरी. बैंक पर NTCA की गाइडलाइन का उल्लंघन करने के आरोप.

VIOLATING PROJECT TIGER GUIDELINES
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है नौरादेही (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : October 8, 2025 at 7:30 AM IST

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Updated : October 8, 2025 at 9:45 AM IST

4 Min Read
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सागर: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चल रही विस्थापन प्रक्रिया विवादों में आ गयी है. यहां टाइगर रिजर्व के कोर एरिया के एक गांव के विस्थापितों के मुआवजे के लिए निजी बैंक में खोले गए खातों में पैसों में हेरा फेरी की गई है. आरोप है कि निजी बैंक द्वारा विस्थापितों की सहमति के बिना उनकी पॉलिसी खोल दी गयी और उनको इसके बारे में पता ही नहीं चला. इस मामले के खुलासे के बाद बैंक द्वारा की गई हेराफेरी तो सामने आ गयी है. लेकिन जानकार लोग विस्थापन के लिए एनटीसीए द्वारा तय की गई प्रोजेक्ट टाइगर की गाइडलाइन के उल्लंघन पर भी सवाल उठा रहे हैं.

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्य सचिव से शिकायत कर गाइडलाइन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पूरी विस्थापन प्रक्रिया की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि, ''अगर गाइडलाइन की तहत कलेक्टर और डीएफओ मामले पर नजर रखते और समय-समय पर समीक्षा करते, तो भोले भाले आदिवासियों और अनुसूचित जाति के विस्थापन के साथ बैंक हेरा फेरी कर ही नहीं सकता था.''

बैंक पर NTCA की गाइडलाइन का उल्लंघन करने के आरोप (ETV Bharat)

क्यों उठे विस्थापन प्रक्रिया पर सवाल
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्य सचिव से की शिकायत में आरोप लगाया कि, ''नौरादेही टाइगर रिजर्व में जिला प्रशासन सागर और टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विस्थापितों से अन्याय, छल और आर्थिक गड़बड़ी की जानकारी मिली है. पीड़ितों में ज्यादातर आदिवासी और अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लोग हैं. भारत में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में विस्थापन प्रक्रिया NTCA (National Tiger Conservation Authority) गाइडलाइन और FRA act (Forest Rights Act) के तहत कलेक्टर और वन विभाग के द्वारा संचालित होती है, जिसका यहां गंभीर उल्लंघन हुआ है.''

VIOLATING PROJECT TIGER GUIDELINES
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है नौरादेही (NAURADEHI TIGER RESERVE)

''नौरादेही टाइगर रिजर्व में विस्थापितों को प्रदान राशि के लिए बैंक अकाउंट कलेक्टर के साथ खोले जाने थे, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ है. जिसका नुकसान निर्दोष विस्थापितों को हुआ. ग्राम सभा के अधिकारों का हनन हुआ, जिसकी समय समय पर समीक्षा न सागर कलेक्टर ने की और ना ही वीरांगना दुर्गावती नौरादेही टाइगर प्रबंधन ने की. इस प्रशासनिक आपराधिक लापरवाही के कारण दलालों और निजी बैंक HDFC ने विस्थापितों की राशि का अनुचित उपयोग करते हुए बीमा में लगाया. इसलिए पिछले 10 वर्षों में टाइगर रिजर्व प्रबंधन और सागर कलेक्टर द्वारा विस्थापन संबंधित अधिनियमों और नियमों का उल्लंघन करने वालों की जांच कर जिम्मेदारी तय हो और स्पेशल वित्त ऑडिट होना चाहिए.''

nauradehi tiger reserve
नौरादेही टाइगर रिजर्व (NAURADEHI TIGER RESERVE)

मुख्यमंत्री के पास भी पहुंचा मामला
इस मामले में मुख्य सचिव से शिकायत के अलावा पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा के विधायक गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को भी शिकायत की है. क्योंकि जिस गांव के विस्थापितों के साथ बैंक द्वारा हेराफेरी की गई है, यह गोपाल भार्गव के विधानसभा क्षेत्र रहली के अंतर्गत आता है.

क्या कहना है टाइगर रिजर्व प्रबंधन का
ईटीवी भारत से खास बातचीत में नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ ए ए अंसारी कहते हैं कि, ''टाइगर रिजर्व के खाप खामगोरिया गांव में 2021 में विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इस में सब कुछ एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत हुआ है. विस्थापन प्रक्रिया में कलेक्टर अध्यक्ष और वन विभाग सदस्य सचिव होता है. विस्थापन को जो मुआवजा मिलता है, उसका पैसा बिना अनुमति के नहीं निकाला जा सकता है. विस्थापित के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना होती है. इस मामले में पहली नजर में बैंक स्तर पर लापरवाही की गई है. कलेक्टर द्वारा एसडीएम रहली की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जाएगी.''

Last Updated : October 8, 2025 at 9:45 AM IST