शिमला में ये महिला पेंशन से दोगुना स्ट्रे डॉग्स पर करती हैं खर्च, 15 सालों से कर रहीं बेजुबानों की सेवा
शिमला की रेणु लुथरा स्ट्रे डॉग्स के लिए मसीहा से कम नहीं हैं. अपनी पेंशन का दोगुना वह बेजुबानों पर खर्च कर रही हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : March 8, 2025 at 1:38 PM IST
|Updated : March 8, 2025 at 1:45 PM IST
शिमला: (विनोद पाठक) हमारे समाज में स्ट्रे डॉग्स को एक समस्या माना जाता है. कुछ लोग इन बेजुबानों को खाना तो दूर की बात अपने आंगन में फटकने तक नहीं देते. वहीं, राजधानी शिमला में एक महिला नि:स्वार्थ भाव से बीते 15 सालों से स्ट्रे डॉग्स की सेवा में लगी हुई हैं. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हम आपको संजौली की रेणु लुथरा से रूबरू करवाएंगे. रेणु लुथरा इन बेजुबानों के लिए मसीहा से कम नहीं हैं. उन्होंने शिमला शहर में स्ट्रे डॉग्स को समय पर खाना और जरूरी मेडिसिन देने का अकेले ही बीड़ा उठाया है. शिमला में संजौली से लेकर रिज मैदान तक वह अक्सर स्ट्रे डॉग्स को खाना खिलाते हुए देखी जा सकती हैं. वह अपने पर्स में हमेशा बेजुबानों के लिए खाना लेकर चलती हैं और जहां भी उन्हें स्ट्रे डॉग्स दिखें उन्हें फीड करवाना शुरू कर देती हैं.
पेट डॉग से शुरू हुआ सफर
ETV भारत से खास बातचीत में रेणु लुथरा ने बताया "डॉग्स बेजुबान होते हैं. लोग उनका दर्द जाने बिना उनसे नफरत करने लगते हैं. हमने भी एक पेट डॉग पाला था. जब उसकी मौत हुई तो मेरा डॉग्स के प्रति लगाव बढ़ा और उनका दर्द जानकर अपने आस-पड़ोस के स्ट्रे डॉग्स को मैं खाना खिलाने का काम करने लगी. धीरे-धीरे डॉग्स की संख्या बढ़ने लगी. वर्तमान में मैं अकेली 35 से अधिक स्ट्रे डॉग्स को रोजाना खाना खिलाने के साथ उनकी दवाइयों का खुद से प्रबंध कर रही हूं"
सरकारी अध्यापक थीं रेणु लुथरा
रेणु लुथरा हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में (PTI) शारीरिक शिक्षक थीं. करीब 12 सालों तक नौकरी करने के बाद उन्हें निजी कारणों से अपनी सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी. रेणु लुथरा शिमला में किराये के मकान में रहती हैं और उनका सहारा केवल उनके दिवंगत माता-पिता की पेंशन हैं जिस पेंशन को रेणु लुथरा इन बेजुबानों की देखभाल में खर्च कर देती हैं.
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पेंशन से दोगुना डॉग्स पर करती हैं खर्च
ईटीवी भारत से बातचीत में रेणु लुथरा ने बताया "उनके माता-पिता हिमाचल पुलिस से रिटायर आए थे जो दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनकी इकलौती बेटी होने के कारण मुझे उनकी 17 हजार रुपये के करीब पेंशन मिलती है. कुछ लोगों से मिलने वाले फंड और अपने बेटे और बेटी की सहायता से में स्ट्रे डॉग्स पर हर महीने 30 से 35 हजार रुपये खर्च कर देती हूं."

घर के बाहर बनाया है चपाती बॉक्स
रेणु लुथरा ने बताया "अपने घर के बाहर मैंने एक चपाती बॉक्स बनाया है जिसमें लोग अपनी इच्छानुसार स्ट्रे डॉग्स के लिए खाने का सामान डाल जाते हैं. लोग इस बॉक्स में चपाती, चावल, दूध, अंडे और अन्य खाने का सामान डालते हैं जिससे कुत्तों को फीड करवाने में काफी मदद मिलती है. कुछ लोगों की मुझे इस मुहिम में सहायता मिल रही है जिससे मेरा काम थोड़ा आसान हुआ है." इसके अलावा रेणु लुथरा ने शिमला में अलग-अलग जगहों पर स्ट्रे डॉग्स के लिए शेल्टर भी बनाए हैं.

हर साल चलाती हैं स्टरलाइजेशन अभियान
रेणु लुथरा ने बताया "मैं हर साल मई और जून के माह में डॉग्स स्टरलाइजेशन का अभियान चलाती हूं. इसके लिए मैं हर साल 1 लाख रुपये खर्च करती हूं और इसे पूरी तरह से लोगों के द्वारा दिए जा रहे चंदे पर चलाया जाता है. नगर निगम शिमला के तीन हेल्पर इस काम में मेरी मदद करते हैं. स्टरलाइजेशन प्रोग्राम स्ट्रे डॉग्स की संख्या नियंत्रित करने के लिए है. स्ट्रे डॉग्स की संख्या बढ़ने से उनके लिए खाना कम होता है जिससे डॉग्स कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं."

रेणु लुथरा की लोगों से अपील
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रेणु लुथरा ने अपील करते हुए कहा लोगों को डॉग्स के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है. कुत्तों से डरने की जरूरत नहीं है. वह भी प्यार के भूखे हैं. अगर लोग स्ट्रे डॉग्स को समय-समय पर खाना देंगे तो डॉग बाइट के मामले भी कम होंगे. वहीं, लोगों का इन बेजुबानों से स्नेह भी बढ़ेगा.

