खत्म होते लोकपर्व संजा को बचाने की पहल, छात्राओं ने बनाई गोबर की अनोखी आकृतियां
मालवा-निवाड़ के विलुप्त होते लोकपर्व संजा को बचाने की रतलाम में अनोखी पहल, धौंसवास गांव के स्कूल में संजा प्रतियोगिता में छात्राओं ने लिया भाग.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 19, 2025 at 8:35 PM IST
रतलाम: पितृ पक्ष के दौरान मालवांचल में युवतियों द्वारा मनाए जाने वाला परंपरागत त्यौहार संजा अब विलुप्त होता जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों संध्या के समय गूंजने वाले संजा के गीत अब सुनाई नहीं पड़ते हैं. लेकिन अब भी कुछ गांव में संजा बनाने की यह परंपरा बदस्तूर जारी है. इस मालवा के कल्चर और परंपराओं को दर्शाने वाले त्योहार को पुनर्जीवित करने की एक पहल के तहत धौंसवास गांव के शासकीय स्कूल में एक अनोखी प्रतियोगिता आयोजित की गई है. यहां छात्राओं के लिए शिक्षकों ने संजा बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन किया है. जिसमें से 10 से अधिक छात्राओं ने हिस्सा लिया और दीवार पर आकर्षक संजा बनाई है.
कुंवारी युवतियां गोबर से बनाती हैं आकृति
पितृ पक्ष के 16 दिनों में मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्र में कन्याओं के द्वारा संध्या के समय घर की दीवारों पर संजा बनाकर संजा के मंगल गीत गाने और पूजा करने की परंपरा है. स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार संजा सांझ या सांझी माता से तात्पर्य संध्या या शाम से है. संजा माता को मां पार्वती का रूप माना जाता है. खासकर कुंवारी कन्याओं के लिए यह विशेष 16 दिनों का त्यौहार होता है, जिसमें वह अच्छे वर की कामना के लिए दीवार पर गाय के गोबर से संजा माता, सूरज, चांद और तुलसी क्यारी वाले आंगन की आकृति बनाती हैं.
लड़कियां करती हैं संजा माता की पूजा-आराधना
फूल और रंगीन पेपर से इन्हें किसी रंगोली की तरह सजाया जाता है. इसके बाद कन्याएं संजा के गीत गाकर और आरती कर प्रसाद बांटती हैं. कुछ अन्य लोक कथाओं में संजा माता को गांव की रक्षा करने वाली देवी बताया गया है. वहीं, उनकी पूजा और आराधना करने वाली कन्याओं को सुयोग्य वर मिलता है और मनोकामना पूर्ण होती है.
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संजा प्रतियोगिता में 10 से अधिक छात्राओं ने लिया भाग
धौंसवास स्थित नित्यानंद माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं के लिए इस विशेष प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. स्कूल के प्राचार्य गोपाल वर्मा ने बताया कि "हमारे स्कूल की महिला शिक्षकों ललिता कदम, सीमा चौहान और आशा शर्मा ने छात्राओं को इस पारंपरिक संजा माता के त्यौहार से परिचित करवाने के लिए विशेष प्रतियोगिता का आयोजन किया था. जिसमें 10 से अधिक छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिसके लिए उन्हें प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए गए.

