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नेत्रदान के मामले में रतलाम शतकवीर, जानिए घर में कैसा होता है आई डोनेशन

रतलाम में बीते 6 महीनों में ही नेत्रदान का शतक पूरा. पिछले कुछ सालों में 500 से अधिक लोग कर चुके हैं नेत्रदान.

RATLAM 100 EYE DONATIONS IN 6 MONTH
6 माह में नेत्रदान का शतक पूरा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : June 28, 2025 at 8:40 PM IST

3 Min Read
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रतलाम: नेत्रदान और अंगदान को महादान माना जाता है और इस परोपकारी काम में रतलाम जिला प्रदेश में अग्रणी बन रहा है. यहां नेत्रदान को लेकर आम लोग जागरुक हो रहे हैं और अपने दिवंगत परिजनों के नेत्रदान कर सैकड़ो लोगों के जीवन में उजाला ला रहे हैं.

6 माह में नेत्रदान का शतक पूरा

रतलाम शहर की जागरुकता देखिए कि बीते 6 महीनों में ही नेत्रदान का शतक पूरा कर लिया गया है. शहर की नेत्रम संस्था और समाजसेवियों की प्रेरणा से ईदगाह रोड निवासी रमाबाई बाटोलिया के निधन पश्चात इस वर्ष के 100वें नेत्र महादान को संपन्न करवाया गया है. रतलाम के मेडिकल कॉलेज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के द्वारा बीते कुछ वर्षों में करवाए गए नेत्रदान की संख्या 500 से अधिक पहुंच चुकी है.

RATLAM INCREASING ORGAN DONATION
पिछले कुछ सालों में 500 से अधिक लोगों ने किया नेत्रदान (ETV Bharat)

मेडिकल कॉलेज के कारण बढ़ा नेत्रदान

दरअसल पूर्व में भी नेत्रदान और अंगदान करने के लिए कई लोग सामने आते थे. शहर की सामाजिक संस्थाएं भी इसके लिए प्रयास करती थी लेकिन आधुनिक चिकित्सा सुविधा और आई बैंक उपलब्ध नहीं होने की वजह से चाहते हुए भी लोग यह नहीं कर पाते थे. 2020 में मेडिकल कॉलेज शुरू होने से यहां चिकित्सा सुविधाएं और सभी विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हुए. इसके बाद यहां नेत्रदान और देहदान की संख्या में अच्छा खासा इजाफा हुआ है. यहां आई बैंक भी बनाया गया है जिसमें नेत्रदान के बाद कॉर्निया को सहेज कर रखा जा सकता है.

40 से अधिक लोग कर चुके देहदान

खास बात तो यह भी है कि यहां के नेत्र विभाग में नेत्रदान के लिए एक डैडीकेटेड टीम भी गठित की गई है. जो सूचना मिलने पर दिवंगत व्यक्ति के घर पर पहुंच कर भी नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न करते हैं. नेत्रदान के साथ ही मेडिकल के छात्रों की पढ़ाई के लिए यहां 40 से अधिक देहदान भी संपन्न हो चुके हैं.

कैसे कर सकते हैं नेत्रदान

नेत्रदान की प्रक्रिया बड़ी ही आसान है और इसमें समय भी अधिक नहीं लगता है. किसी भी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर परिजन नेत्र बैंक के संपर्क नंबर पर कॉल कर सकते हैं. इसके साथ ही नेत्रदान के लिए काम कर रही संस्था जैसे नेत्रम, मानव सेवा समिति एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों से भी संपर्क कर नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण करवाई जा सकती है.

आईए जानते हैं कैसे होती है नेत्रदान की प्रक्रिया

रतलाम के मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के प्रभारी डॉ ऋशेंद्र सिंह ने बताया कि "उनके डिपार्टमेंट में अब तक 100 से अधिक नेत्रदान संपन्न हो चुके हैं. जिसके लिए नेत्र विभाग की टीम हमेशा एक्टिव रहती है. स्थानीय समाजसेवियों और सामाजिक संस्थाओं की मदद से आम लोग अपने मृत परिजन की आंखें दान कर यह परोपकार का कार्य कर रहे हैं."

डॉ ऋशेंद्र सिंह ने बताया कि "नेत्रदान के लिए बड़ी ही आसान प्रक्रिया होती है. इसके लिए मृत शरीर को मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में लाने की भी आवश्यकता नहीं है. नेत्र विभाग की टीम घर या जहां व्यक्ति की मृत्यु हुई है, वहां पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कर देती है. इसमें केवल 15 से 20 मिनट का समय लगता है. नेत्र बैंक की टीम 24 घंटे नेत्रदान के लिए उपलब्ध रहती है."