बड़ी खबर : राजस्थान हाईकोर्ट ने SI भर्ती परीक्षा 2021 को किया रद्द
पेपर लीक होने के कारण राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 परीक्षा रद्द कर दी है.

Published : August 28, 2025 at 1:30 PM IST
जयपुर : जयपुरः राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 की संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने आरपीएससी को कहा है कि वह भर्ती विज्ञापन के तहत या गत 17 जुलाई को जारी नए भर्ती विज्ञापन में 2021 की भर्ती के 859 पदों को शामिल करें. वहीं, अदालत ने मामले में आरपीएससी की कार्यप्रणाली पर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए प्रकरण को जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा है. जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश कैलाश चन्द्र शर्मा व अन्य की याचिकाओं पर फैसला देते हुए दिए. अदालत ने 14 अगस्त को सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी सिंह और अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने बताया कि भर्ती परीक्षा की तीन स्तर पर शुचिता प्रभावित हुई है. सर्वप्रथम आरपीएससी के स्तर पर तत्कालीन आयोग सदस्य ने पेपर लीक किया. वहीं, परीक्षा केन्द्र से भी पेपर लीक किया गया. इसके अलावा परीक्षा में डमी परीक्षार्थी बैठाए गए. पेपर लीक होने के बाद इसका पूरे प्रदेश भर में वितरण किया गया. ऐसे में चयनितों में से उन लोगों की छंटनी संभव नहीं है, जिन्होंने पेपर लीक का फायदा उठाया. वहींं, एसओजी व कैबिनेट सब कमेटी और महाधिवक्ता ने भी अपनी पहली रिपोर्ट में यह बात मानी थी, इसलिए भर्ती परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए.
इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद और एएजी विज्ञान शाह ने कहा कि याचिका में प्रकरण में की जा रही जांच पर सवाल नहीं उठाए गए हैं. राज्य सरकार स्वयं भी मामले के तह तक जाना चाहती है. अभी तक की जांच में 68 ट्रेनी दोषी पाए गए हैं. इनमें से 54 ट्रेनी को गिरफ्तार किया गया. छह अभ्यर्थियों ने चयन के बाद पद ग्रहण नहीं किया. इसके अलावा आठ आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं. कैबिनेट सब कमेटी ने हाल ही में फिलहाल भर्ती रद्द नहीं करने की सिफारिश दी है, जिसे मुख्यमंत्री स्तर पर स्वीकार किया गया है. ऐसे में याचिकाओं को खारिज किया जाए.
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वहीं, चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कहा कि मामले में एसओजी ने विस्तृत जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की है. चयनित पक्षकार अभ्यर्थियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, यदि भर्ती रद्द की गई तो करीब 500 से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य खराब होगा. कई अभ्यर्थी पूर्व की सरकारी सेवाओं को छोड़कर एसआई बने हैं. सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया.
अदालत ने कहा कि इस भर्ती के पेपर लीक होने में आरपीएससी के चेयरमैन सहित 6 सदस्यों की सक्रिय भूमिका भी सामने आई है. इससे साबित है कि घर के भेदियों ने ही लंका को ढहा दिया. भर्ती की गोपनीयता तब ही भंग हो गई थी, जब आरपीएससी के पूर्व सदस्य ने हाथ लिखित पेपर प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया था.
आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन संजय श्रोत्रिय के भी मामले में शामिल होने से इसकी गंभीरता बढ़ती है. श्रोत्रिय ने ना केवल रामूराम रायका को उनके बेटे और बेटी के साक्षात्कारों से संबंधित भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्देश दिए, बल्कि खुद ने भी साक्षात्कार पैनल में सक्रिय तौर पर भाग लिया था. राज्य सरकार, एजी, उप मंत्रिमंडलीय समिति और एसओजी ने भी एसआई भर्ती- 2021 को पूर्व में रद्द करने की सिफारिश की थी। राज्य सरकार और एजी ने बाद में भी यह माना था कि इस भर्ती को भविष्य में रद्द किया जा सकता है. भर्ती रद्द नहीं हुई तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर सकती है.
नई भर्ती में शामिल करें पदः अदालत ने आरपीएससी से कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया को उसी विज्ञापन 3 फरवरी 2021 के तहत, या 17 जुलाई 2025 के विज्ञापन में वैकल्पिक व्यवस्था करे और इन पदों को नई भर्ती में शामिल करें. इसके अलावा 2021 की भर्ती में शामिल हुए अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी आयु पात्रता में छूट पर भी सकारात्मक रूप से विचार किया जाना चाहिए. आवेदकों को आगामी परीक्षा की तैयारी और परीक्षा में बैठने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए. वहीं, आरपीएससी आगामी भर्ती में निष्पक्षता बनाए रखे.
आयोग की कार्यशैली पर प्रसंज्ञानः अदालत ने आरपीएससी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इस संबंध में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है. वहीं, इसे जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने का निर्देश देते हुए मामले को खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के लिए सीजे को भिजवा दिया है. अदालत ने कहा कि आरपीएससी की कमियां केवल एसआई भर्ती 2021 तक ही सीमित नहीं रही हैं, बल्कि अन्य भर्तियों में भी रही है. एसआईटी की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि भर्ती प्रक्रिया में कई कमियां रहीं और इसके सदस्यों ने ही इसके पेपर्स को प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंचने से पहले ही लीक किया.
सही और गलत की छंटनी मुश्किलः अदालत ने कहा कि भर्ती में सही और गलत की छंटनी संभव नहीं है. कई अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने ईमानदारी से पेपर दिया है. उनके प्रति भी हमारी सहानुभूति है, हालांकि अगर पेपर लीक के जरिए एक भी व्यक्ति थानेदार बनता है तो यह सही नहीं होगा.

