अब 9वीं कक्षा से ही की जा रही करियर काउंसलिंग, ताकि छात्र भविष्य के लिए ले सके उचित फैसला
छात्र भविष्य के लिए ले सके उचित फैसला, इसलिए 9वीं कक्षा से करियर काउंसलिंग की जा रही है. वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग भी.

Published : June 11, 2025 at 11:17 PM IST
|Updated : June 12, 2025 at 8:54 AM IST
जयपुर: राजस्थान के स्कूलों में शिक्षा केवल एकेडमिक कोर्सेज तक सीमित नहीं रही. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा निर्देशों को अपनाते हुए राज्य के 5000 सरकारी स्कूलों में वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग को लागू किया जा रहा है. खास बात ये है कि इस मॉडल में करियर काउंसलिंग भी एक मेजर पार्ट है, जिससे छात्र ने केवल कौशल सीख रहे हैं, बल्कि ये भी जान रहे हैं कि भविष्य में उन्हें किन क्षेत्रों में करियर बनाना है. इसकी शुरुआत 9वीं कक्षा से ही की जा रही है.
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में दो साल पहले वर्ष 2023 में करियर काउंसलिंग की शुरुआत की गई थी. प्रदेश के शिक्षा महकमे ने पहल करते हुए उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 10वीं कक्षा पास कर चुके छात्रों को आगामी कक्षाओं में सब्जेक्ट सलेक्शन के लिए गाइड किया जा रहा था. साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 'डायल फ्यूचर' इनिशिएटिव के तहत परामर्श कार्यक्रम भी चलाया गया था, लेकिन छात्र अपनी रूचि और क्षमता के आधार पर करियर गोल्स को ध्यान में रखते हुए उचित फैकल्टी का चयन कर सकें, इसके लिए 9वीं कक्षा से ही उन्हें गाइड किया जा रहा है.
इस संबंध में शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि छात्र ट्रेडिशनल कोर्स के सलेक्शन के बजाए करियर ऑप्शन के अनुसार सब्जेक्ट के चयन को प्रेरित हो, इस उद्देश्य से 9वीं कक्षा से ही छात्रों का करियर काउंसलिंग शुरू कर दिया गया है. ये वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग का मेजर पार्ट है.
उन्होंने बताया कि सभी छात्र आईआईटी मेडिकल जैसे लाइन में जाना प्रिफर करते हैं, लेकिन सॉफ्ट फ्लोर पर भी लोग चाहिए. बच्चों को पता नहीं होता कि इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे इक्का-दुक्का अन्य कोर्स के अलावा और क्या ऑप्शन है. इसलिए 10वीं से पहले ही उन्हें गाइड किया जा रहा है.
उनमें ये समझ विकसित की जा रही है कि जरूरी नहीं कि साइंस सब्जेक्ट होने पर ही अच्छा स्टूडेंट कहलाएगा. इसी तरह 12वीं के बाद ये बताना पड़ेगा कि बच्चों के पास क्या-क्या ऑप्शन है. इसलिए करियर काउंसलिंग पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है.
फिलहाल, समसा के माध्यम से 5000 स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग कर रहे हैं और छात्रों को बताया जा रहा है कि सिर्फ डिग्री इंपॉर्टेंट नहीं है. वो देश के लिए किस तरह से उपयोगी हो सकते हैं, ये इंपॉर्टेंट है. इसी नजरिए से करियर काउंसलिंग की जा रही है.
बहरहाल, राज्य सरकार लक्ष्य है कि राज्य के हर सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में करियर काउंसलिंग डेस्क स्थापित की जाए. वोकेशनल एजुकेशन का उद्देश्य भी तभी सफल होगा, जब बच्चा अपनी योग्यता को पहचान कर सही निर्णय ले पाए.

