अपमनिधि पांडे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर फहराया भारत का परचम, इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड में जीता सिल्वर
जेईई की तैयारी कर रहे अपमनिधि पांडे ने चीन में आयोजित इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड में सिल्वर मेडल हासिल किया है.

Published : August 20, 2025 at 1:51 PM IST
जयपुर : अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराने वाले 'भविष्य के वैज्ञानिक' अपमनिधि पांडे ने इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड (IESO) 2025 में सिल्वर मेडल हासिल किया. जीनिंग (चीन) में हुए इस ओलंपियाड में उन्होंने 31 देशों के 130 प्रतिभागियों के बीच अपना लोहा मनवाते हुए देश को गौरवान्वित किया है. आगे अपमनिधि विज्ञान की गहराइयों में नई खोज करते हुए ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कार्बन को अवशोषित कर नए और उपयोगी तत्व विकसित करने की दिशा में काम करना चाहते हैं.
प्रेरणा स्रोत बने सीनियर यशस्वी गुप्ता : अंतरराष्ट्रीय मंच पर अर्थ साइंस ओलंपियाड में सिल्वर मेडल जीतने वाले अपमनिधि पांडे ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिजनों, मेंटर्स, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन को दिया. उन्होंने बताया कि इस ओलंपियाड की जानकारी उन्हें पिछले वर्ष प्रतिभागी रहे यशस्वी गुप्ता से मिली, जिन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. यशस्वी ही उनके प्रेरणास्रोत बने और उन्होंने ही आवश्यक पुस्तकों की सूची भी सुझाई.
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जियोलॉजी पर विशेष फोकस : अपमनिधि ने बताया कि अर्थ साइंस एक विस्तृत विषय है. उन्होंने पुराने प्रश्न पत्रों का अध्ययन किया और पाया कि करीब 40% प्रश्न जियोलॉजी से जुड़े होते हैं, इसलिए उनका मुख्य फोकस जियोलॉजी पर रहा. इसके अलावा उन्होंने वायुमंडल (Atmosphere), समुद्र विज्ञान (Oceanology), भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology) और छोटे टॉपिक जैसे नैनो टेक्नोलॉजी व सेडिमेंटोलॉजी को भी पढ़ा. उन्होंने बताया कि जिस जगह प्रतियोगिता हो रही है प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए वहां के वातावरण और ज्योमॉर्फोलॉजी का ज्ञान भी पता होना जरूरी है.
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31 देशों के बीच भारतीय प्रतिनिधित्व : इस प्रतियोगिता में 31 देशों के 130 प्रतिभागी शामिल हुए. अपमनिधि ने बताया कि पूर्व प्रतिभागियों ने पहले ही सचेत किया था कि यूएसए और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश अक्सर डॉमिनेट करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में मंच पर विनम्रता और संयम बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. प्रतियोगिता के दौरान उनके साथ भी ऐसा अनुभव हुआ, लेकिन पूर्व छात्रों के अनुभवों का उन्हें लाभ भी मिला और उन्होंने कंपटीशन के दौरान दूसरे देशों के प्रतिभागियों को खुद पर हावी नहीं होने दिया.

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तीन स्तरों की प्रतियोगिता : उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता तीन चरणों में होती है. पहला इंडिविजुअल राउंड, जिसमें लिखित और प्रैक्टिकल टेस्ट होते हैं. वो इस राउंड में महज 0.5 अंकों से ब्रॉन्ज मेडल से चूक गए. इसके बाद टीम रिसर्च राउंड हुआ. इसमें स्पेन, रोमानिया और मलेशिया के छात्रों के साथ उनकी टीम बनी. टीम ने रिसर्च कर जजों के सामने पोस्टर प्रेजेंटेशन किया. कार्बन को नियंत्रित कर जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित इस रिसर्च को सिल्वर मेडल मिला. फिर फील्ड इन्वेस्टिगेशन चरण में छात्रों को सैंपल एकत्रित कर एनालिसिस कर आउटकम निकालना होता है. हालांकि, इस स्तर पर उन्हें सफलता नहीं मिल सकी.

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भविष्य का लक्ष्य - रिसर्च और इनोवेशन : अपमनिधि ने बताया कि अर्थ साइंस मंत्रालय ने उन्हें IIT कानपुर और IIT गांधीनगर में जियोलॉजी की सीट रिजर्व रखने का आश्वासन दिया है. हालांकि, उनका लक्ष्य IIT बॉम्बे या IISC बेंगलुरु में रिसर्च करना है. फिलहाल वे जेईई की तैयारी कर रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कार्बन को अवशोषित कर नए और उपयोगी तत्व विकसित करने की दिशा में काम करें. अपमनिधि पांडे एक सामान्य परिवार से आते हैं. उनकी माता सरकारी स्कूल में टीचर हैं, जबकि पिता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करते हैं.


