ETV Bharat / state

गोंड साम्राज्य की रानी कमलापति की वीरता की साक्षात गवाही दे रहा गिन्नौरगढ़ किला

गोंड़ साम्राज्य की अंतिम हिंदू रानी कमलापति के शौर्य, वीरता, बुद्धमता की कहानियां भारतीय नारी शक्ति के लिए आज भी प्रेरणादायक.

raisen Ginnaurgarh Fort history
रानी कमलापति की वीरता की साक्षात गवाही दे रहा गिन्नौरगढ़ किला (ETV BHARAT)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 8, 2025 at 12:43 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

रायसेन: रायसेन जिला स्थित गिन्नौरगढ़ किला पूरे इतिहास को समेटे हुए है. गिन्नौरगढ़ किला रातापानी टाइगर रिजर्व में 700 मीटर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. कहा जाता है कि 18 वीं शताब्दी में महल का निर्माण निजाम शाह ने करवाया था, जो एक शक्तिशाली गोंड राजा थे. निजाम शाह को उनके भतीजे चैनपुर बारी के प्रमुख द्वारा जहर देकर मार दिया गया.

इसके बाद विधवा मां रानी कमलापति और उनके बेटे ने इसी किले में शरण ली. बता दें कि 4 साल पहले भोपाल में मौजूद हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कर दिया गया है. लेकिन अफसोस है कि गिन्नौरगढ़ किला अब बदहाली का शिकार है.

रानी कमलापति ने ली थी जल समाधि

रानी कमलापति ने अपनी आबरू बचाने और अपने राज्य की रक्षा के लिए अंत में जल समाधि लेने का फैसला किया था. 18वीं शताब्दी की यह महान रानी गोंड साम्राज्य की सुंदर, बुद्धिमान और जल प्रबंधन की महान शख्सियत थी. गिन्नौरगढ़ किला आज भी इन्हीं के नाम से जाना जाता है. पति की मौत होने के बाद उन्होंने अपने बच्चों के साथ इस सल्तनत को संभाला था. लेकिन इस खुशहाल सल्तनत को भोपाल के नवाब दोस्त मोहम्मद खान की बुरी नजर लग गई. और अंत में अंतिम हिंदू रानी को जल समाधि लेनी पड़ी.

raisen Ginnaurgarh Fort history
गिन्नौरगढ़ किला में रानी कमलापति ने ली थी जल समाधि (ETV BHARAT)

रातापानी टाइगर रिजर्व में है गिन्नौरगढ़ का किला

गिन्नौरगढ़ का यह प्राचीन किला आज भी अपने इतिहास की दास्तां को बयां करता है. भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर रातापानी टाइगर रिजर्व के घने जंगल में यह किला मौजूद है. इतिहास के जानकार राजीव चौबे बताते हैं "मध्य प्रदेश के साथ पूरे देश में रानी कमलापति का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है. ये गोंड साम्राज्य की अंतिम हिंदू रानी थीं, जिन्हें अपनी बुद्धिमत्ता वीरता और जल प्रबंधन जैसे विषयों के कौशल के लिए जाना जाता था."

raisen Ginnaurgarh Fort history
गिन्नौरगढ़ किला गौरवशाली इतिहास का गवाह (ETV BHARAT)

हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति रखा

वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश गवर्नमेंट ने रानी कमलापति के नाम पर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन रख दिया था. यह कदम आदिवासी समुदाय के साथ अंतिम हिंदू रानी कमलापति के प्रति सम्मान को भी दर्शाता है. रानी कमलापति का जीवन एक मिसाल के रूप में देखा जाता है. रानी कमलापति का जन्म सीहोर जिले के सलकनपुर के राजा कृपाल सिंह सरौतिया के घर हुआ था. कमलापति बचपन से ही सुंदर, बुद्धिमान और साहसी थीं. कमलापति का विवाह गिन्नौरगढ़ के राजा निजाम शाह से हुआ. कमलापति निजाम शाह की 7 पत्नियों में से एक थीं. राजा का ज्यादातर स्नेह रानी कमलापति के प्रति ही रहता था."

raisen Ginnaurgarh Fort history
गिन्नौरगढ़ किला की दीवारें ढहने लगी हैं (ETV BHARAT)

भोपाल नवाब के दोस्त मोहम्मद खान ने किया हमला

रानी कमलापति के पति निज़ाम शाह की मृत्यु के बाद, भोपाल के नवाब के दोस्त मोहम्मद खान ने मौके का फायदा उठा कर गिन्नौरगढ़ पर हमला कर दिया. इससे गिन्नौरगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था डगमगाने लगी. रानी ने अपनी अस्मिता, सम्मान, धन और आबरू बचाने के लिए जलसमाधि लेने का फैसला किया. उन्होंने अपने सम्मान और धन को बचाने के लिए बड़े तालाब का पानी छोटे तालाब में छोड़ा और फिर जल समाधि ले ली. रानी कमलापति को भोपाल की अंतिम हिंदू रानी और एक महान गोंड शासक के रूप में याद किया जाता है.

raisen Ginnaurgarh Fort history
गिन्नौरगढ़ किला स्थित तालाब (ETV BHARAT)

गोंड साम्राज्य के बारे में क्या कहते हैं रायसेन के युवा

रायसेन जिले के ऐतिहासिक स्थलों पर अक्सर भ्रमण करने वाले कुणाल कंकर बताते हैं "रानी कमलापति महान शासक थीं, जिन्होंने महिला होने के बाद भी अपनी सल्तनत को बखूबी संभाला और नारियों के प्रति सम्मान की भावना राखी. आज भी भारतवर्ष की महिलाएं रानी कमलापति से प्रेरणा लेती हैं कि कैसे सुंदरता के साथ बुद्धिमत्ता और नई-नई चीजों को सीखा जाए, जिससे वह अपने घर के साथ देश के विकास कार्यों में भी योगदान दे सकें. हमारा इतिहास हमें प्रेरणा के साथ भविष्य में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए भी प्रेरित करता है."

raisen Ginnaurgarh Fort history
गिन्नौरगढ़ किला बदहाली का शिकार (ETV BHARAT)

प्राचीन इमारतों को संजोकर रखने की जरूरत

गिन्नौरगढ़ के किले के संबंध में रायसेन के वरिष्ठ पत्रकार राहुल राठौर का कहना है "ये जिला प्राचीन ऐतिहासिक विरासतों की राजधानी कहा जा सकता है. यहां पर कई ऐतिहासिक इमारतें हैं, जिनमें रायसेन दुर्गा, बाड़ी की दीवार, प्राचीन सांची स्तूप, भीमबेटका, भोजपुर मंदिर के साथ गिन्नौरगढ़ का किला भी शामिल है. हमें इन प्राचीन विरासतों को अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोकर रखना चाहिए. सरकार को चाहिए कि इस प्राचीन इमारत का सही रखरखाव करे."

raisen Ginnaurgarh Fort history
प्राचीन इमारतों को संजोकर रखने की जरूरत (ETV BHARAT)