रायसेन में 57 करोड़ साल के प्राचीन खजाने पर UNESCO का ठप्पा, रिसर्चर्स के लिए राज
रायसेन के भीमबेटका में मानव निर्मित लगभग 10 से 50 हजार साल पुराने शैल चित्र मौजूद हैं. यह यूनेस्को की एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट है.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 5, 2025 at 8:27 PM IST
|Updated : March 5, 2025 at 8:50 PM IST
रायसेन(अमित दुबे) : मध्य प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों के बीच कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर करोड़ों साल पुराना खजाना मौजूद है. खोजकर्ताओं को इस प्राचीन स्थल पर 57 करोड़ वर्ष पुराने फॉसिल मिले हुए हैं, जो आज भी लोगों के बीच चर्चा के विषय के साथ शोधकर्ताओं के लिये किसी बड़े खजाने से कम नहीं हैं. यह स्थल प्रदेश के नवीनतम रातापानी टाइगर रिजर्व के बीच मौजूद है. जहां पर कई टूरिस्ट स्पॉट के साथ इतिहास से जुड़े हुए कई स्मारक भी देखने को मिलते हैं.
भीमबेटका में 10 से 50 हजार साल पुराने शैल चित्र
राजधानी भोपाल से लगभग 40 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में भीमबेटका में मानव निर्मित लगभग 10 से 50 हजार वर्ष पुराने शैल चित्र मौजूद हैं. यह यूनेस्को की एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट है. शोधकर्ताओं को यहां पर 57 करोड़ साल पुराने फॉसिल भी मिले हैं. हर साल हजारों की संख्या में इस स्थान पर कई रिसर्चर पहुंचकर अपना शोध करते हैं और लोगों के बीच इतिहास के उन पन्नों को लेकर आते हैं जो अब तक आम लोगों की नजरों से ओझल थे.

मिला 57 करोड़ वर्ष पुराना फॉसिल
ऐसा ही कुछ 2021 में देखने को मिला था जब 36वीं इंटरनेशनल जियोलॉजिकल कांग्रेस से पहले 2 शोधकर्ता भीमबेटका के टूर पर गए थे. यहां उनकी नजर एक चट्टान पर मौजूद एक छत्ते नुमा फॉसिल पर पड़ी. जब इस फॉसिल की जांच पड़ताल की गई तो यह अब तक दुनिया भर में मौजूद सबसे पुराने फॉसिल में से एक निकला. जिसकी आयु शोधकर्ताओं द्वारा लगभग 57 करोड़ वर्ष पुरानी बताई गई है. जब शोधकर्ताओं को भीमबेटका के अपने टूर के दौरान एक पत्तीनुमा आकृति नजर आई. यह जमीन से 11 फीट की उंचाई पर चट्टान के ऊपर मौजूद थी और किसी रॉक आर्ट की तरह नजर आ रही थी. डिकिनसोनिया को लगभग 541 मिलियन वर्ष पहले, कैम्ब्रियन काल में प्रारंभिक, सामान्य जीवों और जीवन की शुरुआत के बीच प्रमुख लिंक में से एक माना जाता है.

भीमबेटका में 750 से ज्यादा शैलाश्रय
भीमबेटका में 750 से ज्यादा शैलाश्रय हैं. इनमें से 400 गुफाओं में चित्रकारी है. यहां मौजूद शैल चित्र पूर्व पाषाण काल से मध्य ऐतिहासिक काल तक मानव गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. मुख्यतया सामूहिक नृत्य, रेखांकित मानवाकृति, शिकार, पशु-पक्षी, युद्ध और प्राचीन मानव जीवन के दैनिक क्रियाकलापों से जुड़े हैं. चित्रों में प्रयोग किये गए खनिज रंगों में मुख्य रूप से गेरुआ, लाल और सफेद हैं और कहीं-कहीं पीला और हरा रंग भी प्रयोग हुआ है. वहीं भीमबेटका के कुछ शैलाश्रयों में प्रागैतिहासिक गुफा चित्रकारी है और सबसे पुराने 10,000 ईसा पूर्व के हैं, जो भारतीय मेसोलिथिक काल के अनुरूप हैं.

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में है शामिल
रातापानी टाइगर रिजर्व में आने वाले भीमबेटका को लेकर टाइगर रिजर्व अधीक्षक सुनील भारद्वाज ने बताया कि "यह एक टूरिस्ट स्पॉट है, जो कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. प्राकृतिक वातावरण के बीच यहां पर वन्यजीवों का भी अवलोकन करने का आनंद लोगों को मिलता है. रिसर्चर यहां पर अपने शोध कार्य के लिए आते रहते हैं और इतिहास से जुड़े हुए खजाने को लोगों के बीच लाते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि यहां पर और भी रिसर्चर आएंगे जो यहां मौजूद प्राचीन इतिहास से जुड़ी हुई जानकारी की खोज कर लोगों के बीच साझा करेंगे."
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मानव सभ्यता से जुड़ा है इतिहास
इतिहास के जानकार राकेश ठाकुर से जब भीमबेटका में मौजूद रॉक पेंटिंग और फॉसिल के संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि "भीमबेटका का इतिहास मानव सभ्यता से जुड़ा हुआ है जो आज से हजारों वर्ष पुराना है. हाल ही में जिस तरह से खोजकर्ताओं को यहां पर करोड़ों वर्ष पुराने फॉसिल मिले हैं, वह अपने आप में एक चर्चा का विषय है. और कहीं ना कहीं हमें इस बात की भी जानकारी देता है कि यहां मौजूद रॉक पेंटिंग और फॉसिल अन्य देशों के मुकाबले बहुत प्राचीन हैं."

