रोहतास शक्तिपीठ से शुरू होगा बिहार में राहुल का अभियान, NDA के खिलाफ SIR एजेंडा पर फोकस
बिहार चुनाव से पहले राहुल गांधी ने सियासत गरमा दी है. वे ताराचंडी मंदिर से पूजा में कर NDA के खिलाफ अभियान शुरू करेंगे.

Published : August 10, 2025 at 6:23 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम है. NDA और INDIA गठबंधन मिशन मोड में आ चुके हैं. अमित शाह ने पुनौरा धाम से प्रचार की शुरुआत की, जबकि राहुल गांधी भी शक्तिपीठ से अभियान शुरू करेंगे. सभी प्रमुख राजनीतिक दल इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं. भाजपा के कई दिग्गज नेता चुनावी मैदान में उतर चुके हैं.
राहुल गांधी का शक्तिपीठ अभियान: गृह मंत्री अमित शाह ने सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में मंदिर शिलान्यास कर अभियान की शुरुआत की. वहीं, राहुल गांधी भी एक शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना के बाद अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं. दोनों गठबंधन धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मतदाताओं से गहरा जुड़ाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
बिहार से एनडीए के खिलाफ चुनावी मोर्चा: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार से एनडीए के खिलाफ चुनावी मोर्चा खोलने का फैसला किया है. वे अपने अभियान की शुरुआत सासाराम के प्रसिद्ध ताराचंडी शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना से करेंगे. एसआईआर अभियान के जरिए राहुल गांधी जनता से संवाद स्थापित करेंगे और एनडीए की नीतियों पर निशाना साधेंगे.

रैलियों के जरिए हल्ला बोल: पूजा के बाद वे पूरे बिहार में यात्रा कर जनसभाओं और रैलियों के जरिए हल्ला बोल अभियान को गति देंगे. राहुल गांधी इस बार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय और आक्रामक दिख रहे हैं. पहले जहां वे चुनाव के दौरान सिर्फ एक-दो बार बिहार आते थे.

ताराचंडी मंदिर से पूजा-अर्चना: अभियान सासाराम के ताराचंडी मंदिर से पूजा-अर्चना के साथ शुरू होगा और फिर औरंगाबाद, गया, नवादा, किशनगंज होते हुए मिथिलांचल तक पहुंचेगा. इस दौरान वे SIR (संविधान, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोजगार) मुद्दों को लेकर NDA के खिलाफ हल्ला बोल अभियान चलाएंगे.

30 अगस्त तक चलेगा अभियान: राहुल गांधी की यह यात्रा सासाराम से शुरू होकर औरंगाबाद, गया, नवादा, किशनगंज होते हुए मिथिलांचल पहुंचेगी और अंत में 30 अगस्त को इसका समापन होगा. यात्रा के दौरान राहुल गांधी जनसभाओं, संवाद कार्यक्रमों और रैलियों में भाग लेंगे और भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएंगे.

90% जिलों का दौरा करेंगे: राहुल गांधी बिहार के लगभग 90% जिलों का दौरा करेंगे. उनका यह दौरा केवल एक चुनावी यात्रा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है कि कांग्रेस अब बिहार को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. राहुल गांधी की इस यात्रा को कांग्रेस की नई रणनीति और जनसंपर्क को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

SIR के खिलाफ अभियान चलाएंगे: कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने बताया कि राहुल गांधी बिहार में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Special Electoral Revision) SIR के खिलाफ अभियान चलाएंगे. "चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं रही और इससे विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई है." राहुल गांधी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे और उन्हें तथ्यों से अवगत कराएंगे.

हिंदू वोट बैंक को साधने की कोशिश: राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय कुमार का मानना है कि दोनों नेता अमित शाह और राहुल गांधी बहुसंख्यक हिंदू वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं. डॉ. संजय कुमार का यह भी कहा कि कि 80% के आसपास की बहुसंख्यक आबादी पर सभी दलों की नजर है. यही कारण है कि धार्मिक स्थलों से अभियान की शुरुआत की जा रही है.

"राहुल गांधी पहले भी मंदिरों का दौरा करते रहे हैं और खुद को 'जनेऊधारी हिंदू' बताकर अपनी हिंदू पहचान को सामने रखने की कोशिश करते रहे हैं. ऐसे में ताराचंडी मंदिर से अभियान की शुरुआत करना उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है." -डॉ. संजय कुमार, राजनीतिक विश्लेषक

खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश: भाजपा की ओर से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे वरिष्ठ नेता पहले ही मैदान में उतर चुके हैं, वहीं कांग्रेस अब राहुल गांधी को फ्रंटफुट पर लाकर बिहार में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है. पिछले चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, लेकिन अब पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है.
राजनीतिक संजीवनी की तलाश में राहुल: 1990 के बाद कांग्रेस बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के बैसाखी के सहारे राजनीति कर रही है. बिहार में पिछड़ा वोट बैंक पर नीतीश कुमार की पकड़ है. राहुल गांधी इस वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि बिहार चुनाव से पहले देश के तीन राज्यों के चुनाव दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. जम्मू-कश्मीर और झारखंड में इंडिया गठबंधन को जीत जरूर मिली लेकिन दोनों राज्यों में कांग्रेस जूनियर पार्टनर की भूमिका में थी. ऐसे में वह बिहार में अपना जनाधार मजबूत करने में जुटी है.
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