नर्सरी का हब बन रहा पुष्कर, सालाना 100 करोड़ का कारोबार, ठंडे प्रदेशों में उगने वाले पौधे भी मौजूद
पुष्कर का वातावरण और मिट्टी के चलते यहां नर्सरी उद्योग विकसित हो गया है. अब यहां देशी के साथ विदेशी पौधे भी मिल जाते हैं.

Published : July 7, 2025 at 7:03 AM IST
अजमेर: राजस्थान में पुष्कर नर्सरी का हब बन चुका है. एक समय था जब जामुन, शहतूत जैसे कुछ फल और फूलों के पौधे तैयार करने तक ही यहां की नर्सरी सीमित थी. लेकिन आज पुष्कर में सवा सौ से भी अधिक नर्सरियां संचालित हैं. पुष्कर की नर्सरी में देश के कोने-कोने में मिलने वाले फल और फूलों के पौधे उपलब्ध हैं. पुष्कर की नर्सरी में तैयार पौधे केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं. वहीं अन्य राज्यों से भी फल-फूल और सजावटी पौधे पुष्कर बिकने के लिए आते हैं. इनमें कुछ पौधे तो विदेशों से भी आते हैं. एक अनुमान के मुताबिक पुष्कर की नर्सरीयों में सालाना 100 करोड़ से अधिक कारोबार होता है.
ठंडे प्रदेश के पौधे भी मौजूद: विगत एक दशक से पुष्कर में नर्सरीयों के कारोबार में शानदार प्रगति हुई है. खेती छोड़कर यहां कई किसान नर्सरी का कारोबार कर रहे हैं. इनमें कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने 1992 से नर्सरी के कारोबार में कदम रखा और आज नर्सरी कारोबार से सालाना करोड़ों रुपए कमा रहे हैं. यहां आंवला, जामुन, फालसे, करुंदे, शहतूत समेत फलों, फूलों और सब्जियों की खेती की जाती है. मानसून और सर्दियों में नर्सरी का पीक समय होता है. इस दौरान नर्सरी कारोबारी व्यस्त रहते हैं. बड़ी संख्या में लोग यहां पौधे खरीदने के लिए आ रहे हैं. वहीं पुष्कर आने वाले पर्यटक भी नर्सरियों से विभिन्न सजावटी, फल, फूल की पौध अपने साथ ले जाते हैं. इन नर्सरीयों में उन ठंडे प्रदेश के पौधे भी मिल जाते हैं जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है.
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देशी ही नहीं विदेशी किस्में भी हैं मौजूद: पुष्कर में वर्षों से नर्सरी का कारोबार कर रहे मनोहर लाल महावर ने बताते हैं कि पुष्कर में सवा सौ से अधिक नर्सरियां हैं. पुष्कर का वातावरण और यहां की मिट्टी में खासियत है कि यहां नर्सरी उद्योग विकसित हो गया है. इस कारण देश के किसी भी कोने से लाए पौधे भी यहां पनपने लगते हैं. उन्होंने बताया कि यहां लीची, सेब, आड़ू, आलू बुखारा, अंजीर, नाशपाती, बादाम, पिस्ता, अंगूर, कटहल तक के पौधे मिल जाते हैं. इसके अलावा अमरूद, आम, खजूर की कई वैरायटियां यहां मिल रही हैं. उन्होंने बताया कि आम में दशहरी, लगड़ा, केसर, सरोली के अलावा, थाईलैंड के आम की वैरायटी की पौध भी यहां मिल जाती है.

गुलाबी गुलाब की खास मांग: उन्होंने बताया कि 50 फीसदी पौध पुष्कर में तैयार की जाती है और 50 फीसदी अन्य राज्यों से मंगाई जाती है. नर्सरी के मामले में पुष्कर राजस्थान का मुख्य बाजार बन चुका है. महावीर बताते हैं कि पाम की 20 से अधिक वैरायटी मिल जाती है. पुष्कर की नर्सरी में करीब 1 हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है. गुलाब की पौध खेतों में लगाने के लिए किसानों को सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है. बता दें कि पुष्कर के गुलाब में औषधीय गुण होते हैं. इसलिए इसकी पत्तियों की डिमांड कॉस्मेटिक, गुलकंद, गुलाब जल और अन्य उत्पाद के लिए रहती है. खासकर गुलाबी रंग का गुलाब ज्यादा डिमांड में रहता है.

पुष्कर की नर्सरी में मिलने वाले पौधों का रिजल्ट अच्छा: भीनाय से पौधे खरीदने आए राकेश खंडेलवाल बताते हैं कि पुष्कर की नर्सरी में छोटे, मध्यम और बड़े आकार के पौधे उपलब्ध हो जाते हैं. वे अपनी ग्राम पंचायत के लिए 5 साल से पौधे लेने पुष्कर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार के हरियालो राजस्थान अभियान के लिए ही काम किया जा रहा है. चापनेरी ग्राम पंचायत के सरपंच बच्छराज जाट बताते हैं कि सरकार के हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पंचायतों में पौधे लगाए जा रहे हैं. 3 साल से ग्राम पंचायत क्षेत्र में पौधे लगा रहे हैं. हर वर्ष 2000 पौधे लगाए जाते हैं. पुष्कर की नर्सरी से लिए गए पौधे पनप गए हैं और अच्छे परिणाम भी दे रहे हैं.
उन्होंने बताया कि जामुन और आंवला के पौधे ग्राम पंचायत में लगाए जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में ग्राम पंचायत की आय भी हो सके. जाट ने बताया कि ठंडे प्रदेशों में मिलने वाले फल, मेवों के पौधे भी यहां विकसित किया जा रहे हैं. इन पौधों पर फल भी लग रहे हैं. उन्होंने बताया कि राकेश खंडेलवाल के औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में बागवानी की गई है. जहां ठंडा प्रदेश के पौधे पुष्कर से खरीद कर लगाए गए हैं और वह फल भी दे रहे हैं.

250 से भी अधिक पौध की किस्में: पुष्कर में फल, फूल, मेवे, सजावटी पौधों के अलावा लोंग, इलायची, दालचीनी की 250 से भी अधिक वैरायटी हैं. यहां खजूर की चार वैरायटी हैं. इनमें एक इजरायल से भी आती है. इसी तरह से सजावट के काम में आने वाले पौधे फाइकस पांडा, चांदनी ड्रॉप, फाइकस काला, साइकस, पाम की अनेकों वैरायटी हैं. सजावट में काम आने वाले पौधों में 100 से भी अधिक पौधे हैं. वहीं 50 से अधिक पौधे छायादार हैं. इस प्रकार नींबू की 7, अमरूद की 7, कटहल की, आंवले की 3, जामुन की 3, मौसमी की 3, अनार की 3, शहतूत की 2, करूंदा, मोरपंखी, मोरपंखी गोल्डन, संतरा, हार श्रृंगार, केला, आम की 7, चीकू की 2, नारियल, इमली की दो, बेर की पांच, बगन बैल की 2, क्रिसमस ट्री, सेवरा बेल, राखी बेल, एलीमुण्डा बेल, छपरा बेल, बिगोनिया बनिष्ठा, नीम चमेली, चमेली, केलो डम डम, जूही बेल, कुंज, पर्दा बेल, अपराजिता मौजूद हैं.

इसके अलावा पाम 20, सन ऑफ इंडिया, ड्रेसीना, क्रोटन बैंग्लोरी, क्रोटन माइक्रो, काली मिर्च, दफन, गंधराज, स्वर्ण चंपा, लोंग, कपूर,मोगनी, फण, लीची, बादाम, रुद्राक्ष, गुडेल 2, नारंगी, चीन मिर्च, एक जोरा, चीयर बेल, थम सम बेल, ड्रैगन फ्रूट, पिस्ता, टीपू चाइना, घास कट्टा, घास, मोगरा दो, कनेर पांच, नीम 3, चंदन सफेद और लाल, बांस 2, कनेर मिनिचर, अंजीर, अशोक दो, सीताफल तीन, फाइकस वेनजना, सागवान, क्रोटन मदर, शमी, सर्फगंधा, अल्स्टोनिया, शीशम, करज, अर्जुन, बेलपत्र, कदम, गुलमोर, जकरंडा, बड़, पीपल, पारस पीपल, लाजसटोनिया, पाकड़, सिल्वर लॉक के पौधे मौजूद हैं.
वहीं स्पोथोरिया, बोतल बुश, चंपा 3, क्षरेष, बकान, बालम खीरा, रामफल, मेरी पाराक्स, बिजोरा नींबू, गुलाब 3, सफारी फाइकस, डक फाइकस, जस्ट्रोपा, हमेलिया 2, जूनिप 2, पेन्शील पाइन, , रबड़ 2, ड्रेसीना, कोनो क्रॉप्स, चंपा गुड्डीका, अंगूर दो, कलंजू 2, संकुलर, एलीफेंडा, सोन बुश, चैरी, कुटिका लाल, कुटिका मेहरून, कैजीरोना, एगलोनिया, ड्रेसीना मिक्स, लिस्टिक, मरोड़ा, एरेलिया, इलायची, पाइनएप्पल, अंजीर 2, मधुकामिनी, गूलर, मौला सरी, लैला मजनू, मीठा नीम, दुरंतों, लाल साग, रैलियां, ट्रैमीडिया वेरीकेटेड, ग्रास, ग्रास लेमन और रात रानी समेत कई किस्मत के पौधे यहां उपलब्ध हैं.
100 रुपए से 60 हजार रुपए तक के पौधे: पुष्कर की नर्सरी में देशी-विदेशी कई तरह के पौधे हैं. हर पौधे की उम्र और साइज पर उसकी कीमत निर्भर है. मसलन 10 साल का सजावटी पौधा टपोरी 60 हजार रुपए, बीस मर्खिया पाम, साइक्स पाम के एक पौधे की कीमत 20-20 हजार रुपए है. यहां कश्मीर, हिमाचल, आंध्र प्रदेश, यूपी, महाराष्ट्र, बंगाल, चीन और इजरायल से भी पौधे आते हैं.

