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रायपुर में पुलिस कमिश्नरी बनाने की प्रक्रिया शुरू, 7 आधिकारियों की बनी टीम, जानिए क्या होगा नियम

CM साय के ऐलान के बाद पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी तेज हो गई है.

Police Commissioner system  Process
रायपुर में पुलिस कमिश्नरी बनाने की प्रक्रिया शुरू (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : September 10, 2025 at 8:16 PM IST

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रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर में पुलिस कमिश्नरी बनाने के लिए काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए उच्च स्तरीय टीम का गठन भी दिया गया है. ये टीम पुलिस कमिश्नरेट का प्रारूप तैयार करेगी. इस टीम में उनको शामिल किया गया है जो रायपुर की बेहतर समझ रखते हैं या रायपुर में काम करके गए हुए हैं. 15 अगस्त 2025 को रायपुर को पुलिस कमिश्नरी बनाने का ऐलान सीएम ने किया था उसके बाद से इस प्रक्रिया में काम शुरू हुआ है.

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इस तरह लागू होगा रायपुर में कमिश्नर सिस्टम (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

7 अधिकारियों की बनाई टीम: छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है. इस समिति के अध्यक्षता एडीजी प्रदीप गौतम को दी गई है. इनके अलावा रायपुर रेंज के आईजी भी इस टीम में हैं. वहीं DIG संतोष सिंह जो इससे पहले रायपुर के SSP थे, वे भी टीम में हैं.

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CM साय के ऐलान के बाद पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी तेज हो गई है (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

देश में कब से है यह व्यवस्था?: भारत में पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था काफी पुरानी है. भारत की आजादी से पहले ही पुलिस कमिश्नरी का प्रारूप रहा है. भारत में पहली पुलिस कमिश्नरी 1864 में कोलकाता में लागू की गई थी. उसके बाद 1866 में ब्रिटिश काल में ही मुंबई और आजादी से कुछ पहले 1939 में चेन्नई में लागू किया गया था. भारत की आजादी के बाद यह व्यवस्था भारत के कई महानगरों में लागू है.

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पुलिस कमिश्नर प्रणाली से जुड़ी जानकारी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रायपुर के लिए क्या है?: CM के ऐलान के बाद से ही चर्चा तेज है कि, रायपुर के लिए आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ गई. रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को लेकर जो सामान्य चर्चा सामने आ रही है उसमें रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी होने के साथ ही कई राजधानियों के तुलना में तेजी से बढ़ती हुई आर्थिक संरचना का शहर बन गया है. यहां का विकास कई राज्यों की राजधानियां से ज्यादा है. शहरी क्षेत्र में लगातार आबादी, यातायात बढ़ा है. प्रशासनिक चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही है. खास तौर से रायपुर में यातायात व्यवस्था और इंटरनेशनल तस्करी के मामले भी काफी तेजी से बढ़े हैं. कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस के पास कई ऐसी शक्तियां होंगे जिससे उनका कानून व्यवस्था को स्थापित करने में ज्यादा आसानी होगी.

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रायपुर का फॉर्मूला जानिए (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

रायपुर का फॉर्मूला जानिए: रायपुर को पुलिस कमिश्नरेट बनाने को लेकर रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल पुलिस राजीव माथुर का कहना है कि रायपुर में एक पुलिस कमिश्नर के साथ ही 4 डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस हो सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्र को छोड़कर शहरी क्षेत्र में इसका बंटवारा किया जा सकता है. शहरी क्षेत्र के लिए दिशाओं के मुताबिक क्षेत्रीय विभाजन हो सकता है. इसमें ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग से एक अधिकारी जिसे पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के तौर पर भी रखा जा सकता है. पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस राजीव माथुर ने कहा कि शहरी क्षेत्र के लिए जो प्रणाली लागू होगी उसमें काम तेजी के साथ पारदर्शी और निर्धारित समय सीमा में होगा. क्योंकि इसके लिए कई ऐसे अधिकार हैं जो पुलिस के पास सुरक्षित होंगे. माना जा रहा है कि 1 नवम्बर से रायपुर में ये व्यवस्था लागू करने की योजना है.

पुलिस कमिश्नरी बनने से क्या होगा अधिकार?: किसी भी जिले या क्षेत्र को जब कमिश्नरी प्रणाली के तहत लाया जाता है उसमें शहर की पूरी कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस कमिश्नर की होती है. उनके पास CRPC की धाराओं के तहत मजिस्ट्रेट के कई अधिकार होते हैं. उन्हें किसी भी मामले में जिले के जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती.

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नोट- जिले की आबादी के अनुसार पद और उनकी संख्या निर्धारित होती है. (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
  • जिले में हथियार के लाइसेंस, बीयर बार के लाइसेंस के साथ ही धरना प्रदर्शन की अनुमति देने का अधिकार होता है.
  • शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित शक्तियां संविधान के तहत पुलिस कमिश्नर के पास होती है.
  • पुलिस कमिश्नर के पास कानून व्यवस्था को लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी होती है.
  • पुलिस विभाग के लिए नीतियां बनाना और उसके लिए व्यवस्थाओं को बनाए रखना पुलिस कमिश्नर के अंदर आता है.
  • पुलिस कमिश्नर को उनके तहत आने वाले क्षेत्र के लिए बजट के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी होती है.
  • कानून के सुचारु रखने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों और सामुदायिक समूहों के साथ सीधे तौर पर जुड़कर काम करने के अधिकार होते हैं.
  • पुलिस कमिश्नर के पास भारतीय दंड प्रक्रिया की धारा 107 116 144 145 के तहत अंतिम फैसला लेने का अधिकार होता है.
  • इसके लिए उसे किसी जुडिशल मजिस्ट्रेट या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से अनुमति नहीं लेनी होती है.
  • पुलिस कमिश्नर पद के अंदर मजिस्ट्रेट के पावर निहित होते हैं.
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गैंगस्टर एक्ट जैसी धाराओं का प्रयोग करने के लिए पुलिस कमिश्नर का आदेश ही अंतिम आदेश होता है.
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