'मंदिर बना स्कूल'.. हिंदू-मुस्लिम-क्रिश्चियन बच्चे एकसाथ करते हैं पढ़ाई, 27 साल से भवन का इंतजार
गयाजी में मंदिर परिसर में चल रहा प्राथमिक विद्यालय सौहार्द की मिसाल है. हिंदू-मुस्लिम-क्रिश्चियन बच्चे बिना भेदभाव पढ़ते यहां पढ़ाई करते हैं. पढ़ें खबर.

Published : July 22, 2025 at 8:53 AM IST
|Updated : July 22, 2025 at 9:05 AM IST
गया: गयाजी, जिसे मोक्ष और ज्ञान की नगरी कहा जाता है, यहां एक अनोखा प्राथमिक विद्यालय शिक्षा के मंदिर की सच्ची परिभाषा को बताता है. बकसू बिगहा बाईपास मोहल्ले में भवन के अभाव में जय मां देवी मंदिर के परिसर में राजकीय प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहा है. इस स्कूल में हिंदू, मुस्लिम और क्रिश्चियन समुदाय के बच्चे बिना किसी भेदभाव के एक साथ पढ़ाई करते हैं.
मंदिर में कोई भेदभाव नहीं: इस विद्यालय में सभी समुदायों के बच्चे एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं. शिक्षिका लता कुमारी बताती हैं कि हिंदू, मुस्लिम और क्रिश्चियन छात्र-छात्राएं मन लगाकर पढ़ाई करते हैं और मंदिर का पूरा सम्मान करते हैं.
"खासकर बारिश के मौसम में बच्चे मंदिर के अंदर या परिसर में बने एक छोटे से कमरे में पढ़ते हैं. किसी भी समुदाय की ओर से कोई शिकायत नहीं है, और सभी बच्चे मंदिर के पवित्र वातावरण में पढ़ाई को प्राथमिकता देते हैं."-लता कुमारी, शिक्षिका
मुस्लिम बच्चों को भी कोई हिचक नहीं: स्कूल में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्रा रुखसार परवीन कहती हैं कि उनके लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. उन्हें मंदिर परिसर में पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं है, और न ही किसी ने उन्हें कभी रोका. स्थानीय हिंदू समुदाय को भी मुस्लिम बच्चों के मंदिर में पढ़ने से कोई आपत्ति नहीं है.
"मुझे मंदिर में पढ़ने में को परेसानी नहीं है. हालांकि, भवन के अभाव में बारिश के मौसम में पढ़ाई बाधित होती है, क्योंकि परिसर गीला हो जाता है और जगह की कमी के कारण बच्चे घर लौट जाते हैं."-रुखसार परवीन, छात्रा

छात्रों को नैतिक शिक्षा का भी पाठ: छात्रा आयत परवीन और निहारिका कुमारी बताती हैं कि स्कूल में उन्हें न केवल किताबी ज्ञान, बल्कि नैतिक शिक्षा और आपसी सौहार्द का पाठ भी पढ़ाया जाता है. अभिभावक भी मंदिर में स्कूल संचालित होने के बावजूद अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. उनका मानना है कि शिक्षा के मंदिर में धर्म या जाति का कोई भेद नहीं होता, और बच्चे देश के अच्छे नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर हैं.
"बारिश होने पर छात्रों को मंदिर के अंदर खड़ा किया जाता है, आकाशीय बिजली गिरने का डर लगा होता है, दो सप्ताह पहले ही स्कूल में एक सांप निकला था क्योंकि मंदिर की बाउंड्री के पीछे हिस्से में घास है. हालांकि सांप मारा नहीं गया बल्कि उसे निकाल दिया गया."- निहारिका कुमारी, छात्रा

सुविधाओं का अभाव, पढ़ाई में बाधा: शिक्षिका कुमारी अंजना प्रसाद के अनुसार, स्कूल में 92 छात्र-छात्राएं हैं, जिनमें ज्यादातर गरीब और दलित परिवारों से हैं. स्कूल में पांच शिक्षक और एक रसोईया हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. शौचालय, पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों और शिक्षकों को परेशानी होती है. बारिश, गर्मी और सर्दी में खुले में पढ़ाई करने से बच्चों को कीड़े-मकौड़ों और आकाशीय बिजली का खतरा रहता है.
"स्कूल में प्रधान अध्यापक को मिलाकर पांच शिक्षक हैं, एक रसोईया भी है. स्कूल में अभी 92 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, यह सभी छात्र-छात्राएं गरीब परिवार से संबंध रखते हैं. पढ़ने वालों में हिंदू-मुस्लिम और अन्य समुदाय के बच्चे हैं, हालांकि स्कूल में छात्रों की संख्या दलित बच्चों की अधिक है, हम लोगों की कोशिश होती है कि गरीब परिवारों से आने वाले छात्र ज्ञान प्राप्त करें."-कुमारी अंजना प्रसाद, शिक्षिका

खुले में चलती हैं कक्षाएं: मंदिर परिसर में एक नीम के पेड़ के नीचे कक्षाएं चलती हैं. कक्षा 1 और 2 के लिए लोहे के रॉड और करकट से बनी अस्थायी छत है, जबकि कक्षा 3 से 5 तक के बच्चे खुले में पढ़ते हैं. ब्लैकबोर्ड दीवार पर बनाया गया है, और प्रशासनिक कार्य भी पेड़ के नीचे होते हैं. हाल ही में स्कूल में सांप निकलने की घटना ने बच्चों और शिक्षकों में डर पैदा किया, हालांकि सांप को सुरक्षित निकाल दिया गया.
27 सालों से भवन का इंतजार: यह स्कूल 1998 से मंदिर परिसर में संचालित हो रहा है, लेकिन 27 साल बाद भी इसका अपना भवन नहीं है. जमीन चिह्नित करने की कोशिशें विवादों में उलझ गईं. स्थानीय निवासी राजेंद्र दास कहते हैं कि स्कूल सिर्फ नाम का है, क्योंकि सुविधाओं का अभाव पढ़ाई को प्रभावित करता है. अभिभावक और स्थानीय लोग लंबे समय से भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

जिला शिक्षा पदाधिकारी का आश्वासन: जिला शिक्षा पदाधिकारी कृष्ण मुरारी गुप्ता, जो हाल ही में पदभार ग्रहण किए हैं, ने बताया कि उन्हें भवनहीन स्कूलों की समस्या की जानकारी है. जिले में 157 स्कूल भवनहीन या भूमिहीन हैं, जिनमें 94 स्कूलों की जमीन भी नहीं है. वे इस मुद्दे पर अधिकारियों के साथ समीक्षा करेंगे और भवन निर्माण के लिए कार्रवाई का आश्वासन दिया है. गया शहर में ही 53 ऐसे स्कूल हैं, जो सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे हैं.
"अभी मैंने 10 दिनों पहले ही जिला शिक्षा पदाधिकारी गया के रूप में पदभार संभाला है. मुझे कई विद्यालय में भवन नहीं होने और दूसरी सुविधाओं के अभाव की सूचना मिली है, मैं इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से रिव्यू करूंगा और किन कारणों से विद्यालयों के भवन का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है, उस संबंध में जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई करूंगा."-कृष्ण मुरारी गुप्ता, जिला शिक्षा पदाधिकारी

सौहार्द की मिसाल, लेकिन सुविधाओं की जरूरत: पूर्व वार्ड पार्षद संतोष सिंह कहते हैं कि मंदिर में स्कूल चलना मजबूरी है, लेकिन यह सौहार्द का प्रतीक है. सभी समुदाय के बच्चे बिना भेदभाव के पढ़ते हैं, और स्थानीय लोगों को इससे कोई आपत्ति नहीं. फिर भी, अभिभावक और शिक्षक चाहते हैं कि स्कूल का अपना भवन बने, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो. यह स्कूल न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता की मिसाल भी है, जिसे सुविधाओं के साथ और सशक्त करने की जरूरत है.
"ये तो मजबूरी में स्कूल मंदिर के परिसर में संचालित हो रहा है, लेकिन फिर भी शिक्षा के मंदिर में भेदभाव नहीं होता है. मंदिर में संचालित स्कूल में हिंदू-मुस्लिम सभी बच्चे पढ़ते हैं. लोगों को इससे कोई शिकायत नहीं है कि मुस्लिम बच्चे पढ़ने आते हैं, स्कूल में सिर्फ बच्चे पढ़ने आते हैं, जाती धर्म का कोई मामला नहीं होता."-संतोष सिंह, पूर्व वार्ड पार्षद

157 विद्यालयों के नहीं हैं भवन: जिले में ऐसा नहीं है कि सिर्फ बकसु बिगहा विद्यालय का ये हाल है, बल्कि जिले में ऐसे 157 स्कूल हैं जो भूमिहीन और भवनहीन हैं. जिला शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में 157 विद्यालयों में 23 विद्यालयों के भवन की मंजूरी के साथ टेंडर का कार्य पूरा हो चुका है और उनमें कुछ के भवन के निर्माण कार्य भी शुरू हो चुके हैं. अभी जिले में 134 ऐसे विद्यालय हैं जिसमें भवन नहीं है या फिर वह विद्यालय भूमिहीन है.

इतने विद्यालय हैं भूमिहीन: बता दें कि 134 विद्यालयों में 94 विद्यालय भूमिहीन हैं , जबकि 40 ऐसे विद्यालय हैं जिनकी भूमि तो है लेकिन वहां उनका भवन नहीं है. अधिकतर भूमिहीन विद्यालय दूसरे स्कूलों या सामुदायिक भवन, निजी भवन, मदरसे और दूसरे भवनों में टैग कर दिए गए हैं और वहीं से उनके शिक्षा का कार्य हो रहा है.
ऐसे 53 स्कूल गया जी शहर में हैं: जिले के ऐसे 134 भावनहीन और भूमिहीन विद्यालयों में सब से अधिक गया टाउन में ऐसे विद्यालय हैं, इन में 53 स्कूल गया जी शहरी क्षेत्र में स्थित हैं. जबकि आमस प्रखंड में 2, अतरी प्रखंड में 1, बांके बाजार में 2 , बाराचट्टी में 3, बेलागंज प्रखंड में 11, बोधगया प्रखंड में 5 , डोभी प्रखंड में 10 ,फतेहपुर प्रखंड में 4 , गुरुवा प्रखंड में 2 , इमामगंज प्रखंड में 3 , खिजरसराय प्रखंड में 8 , कोंच प्रखंड में 7 ,मानपुर प्रखंड में 1, मोहनपुर प्रखंड में 5 ,मोहरा प्रखंड में 1, परैया प्रखंड में 2, शेरघाटी में 2, टनकुप्पा में 1 , टेकारी में 5 और वजीरगंज प्रखंड 5 विद्यालय हैं जिनके अपने भवन नहीं हैं.
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