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दंतेवाड़ा में पोटा केबिन के छात्र ने की आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस

दंतेवाड़ा से दुखद खबर आई है. यहां पोटा केबिन के एक छात्र ने जान दे दी है.

DANTEWADA POLICE
दंतेवाड़ा के पोटा केबिन में बड़ी घटना (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : December 8, 2024 at 5:17 PM IST

3 Min Read
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दंतेवाड़ा: दंतेवाड़ा में बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए संचालित पोटा केबिन में रविवार को एक दर्दनाक घटना घटी. यहां आठवीं क्लास के एक स्टूडेंट ने आत्महत्या कर ली. पूरी घटना दंतेवाड़ा के भांसी पोटा केबिन का है. बीती देर रात छात्र ने यह घातक कदम उठाया. पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि स्टूडेंट् कुंदेली का रहने वाला था. उसने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया इस बारे में पुलिस पता कर रही है.

दंतेवाड़ा पुलिस ने क्या कहा?: इस घटना के बाद दंतेवाड़ा पुलिस की टीम भांसी पोटा केबिन पहुंची. यहां जांच की जा रही है. पुलिस ने रविवार की सुबह को छात्र के शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया. पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. इस केस में पुलिस ने पोटा केबिन के मैनेजमेंट से बात की है. इसके अलावा छात्र के परिजनों से भी पुलिस बात कर रही है.

घटना बीती रात की है,हमे जैसे सूचना मिली हम पुलिस दल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. छात्र के शव को कब्जे में लिया गया. पोस्टमार्टम के लिए शव लेकर हम जिला अस्पताल पहुंचे. उसके बाद हमने पोटाकेबिन को सील कर दिया है. पोटा केबिन के बच्चों और पोटा केबिन के वार्डन से पूछताछ की जा रही है. घटना की बारीकी से जांच की जा रही है. पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंपा जाएगा. हम परिजनों से भी पूछताछ कर रहे हैं-आरके बर्मन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा

"सभी एंगल से हो रही घटना की जांच": दंतेवाड़ा के एएसपी आरके बर्मन ने बताया कि हर एंगल से इस घटना की जांच कर रहे हैं. जांच के बाद जो भी बातें सामने आएगी उसे मीडिया को भी शेयर किया जाएगा. हम छात्र के परिवार के सदस्य, पोटा केबिन प्रबंधन, और पोटा केबिन के छात्रों से बात कर रहे हैं. हमारा इस घटना की तह तक जाने का प्रयास है.

क्या होता है पोटा केबिन?: बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा की व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए साल 2011 में पोटा केबिन की शुरूआत की गई थी. पोटा केबिन सरकारी आवासीय विद्यालय है. नक्सली जिन स्कूलों को बम बारूद और आगजनी से तबाह कर देते थे. उनके स्थान पर जब दोबारा स्कूल नहीं बन पाया तो सरकार ने पोटा केबिन की अवधारणा विकसित की. पोटो केबिन के तौर पर स्कूल बनाए गए. इसमें आवासीय सुविधा भी विद्यार्थियों को दी जाती है.

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