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'बालिका वधू' बनने से बगावत की, फिर पढ़ाई कर पाई मंजिल, मुसहर समाज की बेटी सीमा नर्स बनकर कर रही सेवा

जमुई की सीमा अपने गांव की पहली बेटी है जिसने ग्रेजुएट किया और एएनएम बनी है. फिलहाल सीमा समाज सेवा कर रही है.

जमुई की सीमा
जमुई की सीमा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 27, 2025 at 7:43 PM IST

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जमुई: यह सच है कि जब इंसान में कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो कोई भी कठिनाई उसे रोक नहीं सकती है. इस बात को सच कर दिखाया है जमुई के बरहट प्रखंड के नुमर पंचायत के महादलित टोला कटका गांव की बेटी सीमा ने. सीमा न केवल अपने गांव की पहली ग्रेजुएट और एएनएम बनीं बल्कि उन्होंने समाज में एक बड़ा बदलाव लाने का काम किया.

बालिका वधू बनने की बगावत की: 'बालिका वधू' यानी कम उम्र में शादी से इनकार करने वाली सीमा ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद एएनएम का कोर्स करके नर्स बनकर अपने समाज और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में लगी हुई है. इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उसके परिवार के लोगों ने उसका विवाह करना चाहा तो उसने खुलकर बगावत कर दी.

जमुई की सीमा (ETV Bharat)

सीमा डॉक्टर बनना चाहती थी: मुसहर समाज के लोग या तो मजदूरी करते हैं और लड़कियों का शादी बचपन में ही कर दी जाती है. सीमा का कहना है कि वह डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन नर्स बनकर वह लोगों की सेवा कर रही है. सीमा ने अपने घरवालों से साफ कह दिया कि वो कुछ करने लायक हो जाएगी, तभी शादी करेगी.

ETV Bharat GFX
ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

"आमतौर पर हमारे समाज से आने वाले अधिकांश लोग मेहनत मजदूरी करते हैं, लड़कियों को कोई ज्यादा नहीं पढ़ाता है. उनकी 18 वर्ष से कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है. मेरे पिता भी 12वीं से पहले ही मेरी शादी करना चाहते थे. शादी के लिए रिश्ते भी आए, लेकिन मैं अड़ गई, मुझे अभी शादी नहीं करनी है"- सीमा, एएनएम

परिवार का मिला साथ: सीमा बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान उन्हें तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा. समाज के कुछ लोग उनके खिलाफ थे और उन्हें ताने देते थे. लेकिन उसने हार नहीं मानी. परिवार का पूरा सहयोग मिला खासकर उनके पिता का.

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निजी अस्पताल में नर्स: सीमा शहर के मशहूर चिकित्सक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एसएन झा के संपर्क में आई. फिलहाल सीमा एक निजी अस्पताल में नर्स के रूप में काम कर रही हैं और अपने गांव के साथ-साथ आसपास के गांव के लोगों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रही है.

गांव में महिला की स्वास्थ्य जांच करती नर्स सीमा
गांव में महिला की स्वास्थ्य जांच करती नर्स सीमा (ETV Bharat)

सीमा के पिता करते हैं दिहाड़ी मजदूरी: सीमा के पिता रामदेव मांझी दिहाड़ी मजदूर का काम करते हैं, जबकि मां सरकारी विद्यालय में रसोईया का काम करतीं हैं. बड़ी बात यह है कि इस महादलित मुसहर समाज में नाम मात्र ही बेटियां शिक्षित हो पाती हैं, क्योंकि इस समाज में अधिकांश बेटे-बेटियों का विवाह खेलने-खाने के उम्र में ही कर दिया जाता है.

माता-पिता के साथ सीमा
माता-पिता के साथ सीमा (ETV Bharat)

"गांव-समाज ताना देता था. बड़ा पढ़ाने चली है. शादी कर दो लेकिन बेटी के जिद के आगे हम लोग सब कुछ सुनकर अनसुना करते रहे और आज जब बेटी ने पढ़ लिखकर नाम कमाया तो हम लोगों को भी इज्जत मिलने लगी. घर से निकलती है तो लोग कहते हैं वो देखो सीमा के माता-पिता हैं."- कुंती देवी, सीमा की मां

जमुई में सीमा का घर
जमुई में सीमा का घर (ETV Bharat)

700 की आबादी वाला गांव: कटका गांव का अधिकतर परिवार दिहाड़ी मजदूरी ईंट भट्ठे आदि पर काम करते हैं. आर्थिक तंगी से जूझते अधिकतर परिवार के बच्चे भी परिवार के साथ ही काम में लग जाते हैं. लगभग 700 की आबादी वाले उक्त गांव में पढ़ाई शिक्षा का स्तर बेहद कम है.

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