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साइबर ठगी से बचने के लिए अब पहाड़ी भाषा में भी किया जाएगा अलर्ट, एक साल में उड़ाए 34 करोड़

प्रदेश में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं. लगाम लगाने के लिए पुलिस ने भी कमर कस ली है.

Cyber ​​Crime
साइबर अपराध को लेकर जागरूकता (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 26, 2025 at 11:07 AM IST

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Updated : August 26, 2025 at 11:17 AM IST

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हल्द्वानी: साइबर अपराधी लोगों के जमा पूंजी लूटने के लिए नए-नए तरीके इजाद कर रहे हैं. साइबर अपराध को लेकर पुलिस लगातार जन जागरूकता अभियान चलाई हुई है, इसके बावजूद भी लोग साइबर ठगों के झांसे में आकर अपना जमा पूंजी गंवा रहे हैं. ऐसे में अब पुलिस साइबर अपराध को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए कुमाऊंनी और पहाड़ी भाषा में जन जागरूकता अभियान चलाने जा रही है. जिससे साइबर क्राइम पर रोक लगाई जा सके.

साइबर ठगी के शिकार हो रहे लोग: पुलिस साइबर अपराध से लोगों को बचाने के पुलिस लोकभाषा (कुमाऊंनी) में जागरूकता अभियान चलाएगी. इसके लिए आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने जिले के कप्तानों को निर्देश दिए हैं. पिछले दिनों हुई क्राइम बैठक में भी साइबर अपराध के मामले पर चर्चा की गई, इसके बाद आईजी ने निर्देश जारी किया है.आईजी कुमाऊं ने बताया कि आधुनिक समय में साइबर फ्रॉड सबसे बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है. अनपढ़ लोगों के साथ ही पढ़े-लिखे लोग भी इससे बच नहीं पा रहे हैं.

साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने की कोशिश (Video-ETV Bharat)

चलाया जाएगा जागरूक अभियान: साइबर अपराध को रोकने के लिए पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट और फेसबुक पेज पर अलग-अलग तरीकों से साइबर अपराध के नए ट्रेंड का जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इसके बावजूद भी साइबर ठगी के मामले रुक नहीं रहे हैं. साइबर अपराध रोकने के लिए लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर किसी प्रकार के लिंक या फोन पर आए मैसेज और ओटीपी को शेयर ना करें.साइबर अपराध के मामले में पुलिस वर्कआउट भी कर रही है.

कुमाऊंनी भाषा में किया जाएगा जागरूक: जिसके लिए जनपद स्तर पर साइबर सेल का गठन भी किया गया है. उन्होंने बताया कई बार देखा गया है कि पहाड़ों पर लोग अभी भी साइबर अपराध को को लेकर जागरूक नहीं हैं. जिसके लिए पुलिस के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्थानीय कुमाऊंनी भाषा में लोगों से संवाद पोस्टर और ऑडियो वीडियो के माध्यम से प्रचार करने के निर्देश दिए गए हैं. जिससे साइबर अपराधों को रोका जा सके.

बुजुर्गों व रिटायरमेंट कर्मी सॉफ्ट टारगेट: गौरतलब है कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा में साइबर ठग सबसे अधिक सक्रिय हैं.साइबर ठग नौकरी के नाम पर, अंजान लिंक या मैसेज भेजकर, आवाज बदलकर कॉल करके, झूठे केस में फंसाने समेत तमाम झांसे देकर लोगों को जाल में फंसाते हैं. सीधे-साधे लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते हैं और लाखों रुपये चंद सेकेंड में गंवा देते हैं. पहाड़ के बुजुर्गों व रिटायरमेंट सीधे-साधे लोगों के खातों पर भी अपराधी सेंध मार रहे हैं.

रिकवरी रेट काफी कम: कई बुजुर्गों को साइबर अपराधी कॉल कर मीठी-मीठी बातों में बहला फुसला रहे हैं. पिथौरागढ़ और चंपावत में ऐसे ठगी के कुछ मामले सामने आए हैं. आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल कुमाऊं में नौ से अधिक लोगों से करीब 34 करोड़ की ठगी हुई थी. लोगों ने जागरूकता के अभाव में अपनी जीवन भर की जमापूंजी को गंवाया. हालांकि इसमें से 40 प्रतिशत पुलिस ने रिकवरी कराई. ऐसे में पुलिस अब साइबर अपराध को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जन जागरूकता अभियान चलाने जा रही है.

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Last Updated : August 26, 2025 at 11:17 AM IST