पीएम मोदी ने क्यों कहा घूम आओ अजयगढ़ किला, चंदेल राजाओं की शौर्य गाथा का है प्रतीक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में बुंदेलखंड के किलों का किया जिक्र. लोगों से इन किलों को देखने की अपील भी की.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 27, 2025 at 8:27 PM IST
|Updated : July 27, 2025 at 9:07 PM IST
पन्ना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के 124वें एपिसोड को संबोधित किया. पीएम ने इस एपिसोड में बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासतों का विशेष रूप से उल्लेख किया. इस दौरान उन्होंने पन्ना जिले में स्थित अजयगढ़ किले की गौरव गाथा को देशवासियों से साझा किया और सभी से इन ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा कर भारतीय संस्कृति और इतिहास को करीब से जानने की अपील की.
'इतिहास को जानें, गौरव महसूस करें'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "बुंदेलखंड में ग्वालियर, झांसी, दतिया, अजयगढ़, गड़कुंडार और चंदेरी जैसे कई किले हैं. ये सिर्फ पत्थर से बने ढांचे नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और स्वाभिमान के प्रतीक हैं. इनकी ऊंची दीवारों से हमारा गौरव झांकता है.
देशवासियों को चाहिए कि इन स्थलों की यात्रा करें और अपने इतिहास पर गर्व करें." प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मन की बात में इस धरोहर का उल्लेख इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
India is known for its outstanding forts. Talked about forts in Karnataka, Rajasthan and the Bundelkhand region, which showcase our vibrant culture. #MannKiBaat pic.twitter.com/ol582JzNaT
— Narendra Modi (@narendramodi) July 27, 2025
चंदेल राजाओं की शौर्य गाथा का प्रतीक अजयगढ़ किला
इतिहासकार सूर्यभान सिंह परमार के अनुसार, "अजयगढ़ किले का निर्माण 10वीं शताब्दी में चंदेल वंश के राजा कीर्ति वर्मन द्वारा करवाया गया था. यह किला उस दौर की शिल्पकला, सैन्य रणनीति और स्थापत्य का जीवंत उदाहरण है. बाद में जब बुंदेला शासन की स्थापना हुई तो महाराजा छत्रसाल ने 1671 में इसे अपने अधीन कर लिया. बाद में यह किला उनके पुत्र जगत राज को उत्तराधिकार में मिला, जिन्हें चरखारी रियासत भी प्राप्त हुई थी."

विंध्याचल की पहाड़ियों पर बसा आकर्षक किला
अजयगढ़ किला विंध्याचल पर्वतमाला की ऊंची चट्टानों पर समुद्र तल से लगभग 688 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इस किले तक पहुंचने के दो रास्ते हैं. एक अजयगढ़ बस्ती से होकर जाता है, जहां लगभग 500 सीढ़ियों का रास्ता जंगलों के बीच से होकर ऊपर की ओर जाता है. दूसरा रास्ता तरौनी गांव से है, जो अपेक्षाकृत अधिक दुर्गम और कठिन है.

- पन्ना के अजयपाल किले में रखी ऐतिहासिक तोप, आवाज से कांप जाते थे 30 कोस दूर के गांव
- पन्ना के अजयपाल किले में छिपा है खजाना, ताला-चाबी में है पहुंचने का रास्ता
नक्काशी और मूर्तिकला में खजुराहो जैसा सौंदर्य
चूंकि यह किला चंदेल शासकों द्वारा बनवाया गया था, इसकी स्थापत्य शैली और नक्काशी में खजुराहो के मंदिरों की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है. किले के स्तंभों पर बारीक नक्काशी की गई है और चट्टानों पर देवी-देवताओं की अद्भुत मूर्तियां उकेरी गई हैं, जिनमें भगवान गणेश की मूर्ति प्रमुख आकर्षण है.
यह स्थान इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए विशेष रुचिकर है. भले ही यह किला स्थापत्य कला और इतिहास का जीवंत उदाहरण है, लेकिन संरक्षण के अभाव में इसकी हालत दिनों-दिन जर्जर होती जा रही है. स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग के प्रयासों की कमी के चलते यह विरासत अपने मूल स्वरूप को धीरे-धीरे खोती जा रही है.

