पितृपक्ष मेला 2025: प्रथम द्वार पुनपुन में पिंडदान नहीं कर पाये तो गयाजी में कर्मकांड का विधान
6 सितंबर से पितृपक्ष मेला की शुरुआत हो रही है. पहले दिन प्रथम द्वार पुनपुन में पिंडदान होगा. अगले दिन से गया में पिंडदान होगा.

Published : September 5, 2025 at 8:38 PM IST
|Updated : September 5, 2025 at 8:59 PM IST
गयाजी: बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला 2025 की शुरुआत 6 सितंबर से हो रही है. उपमुख्यमंत्री, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा भव्य उद्घाटन होगा. 17 दिवसीय पितृपक्ष मेले के पहले दिन गयाजी के गोदावरी सरोवर अथवा पुनपुन नदी में पिंडदान का विधान है.
पुनपुन नहीं जाने पर क्या करें?: शास्त्रों के अनुसार जो श्रद्धालु पुनपुन जाने में असमर्थ होते हैं वे गयाजी स्थित गोदावरी सरोवर में पिंडदान व तर्पण का कर्मकांड कर सकते हैं. गोदावरी को काशी खंड कहा गया है. इससे पिंडदान करने वाले को पुनपुन नदी में कर्मकांड करने के समान फल प्राप्त होगा.
पुनपुन प्रथम द्वार: 17 दिवसीय कर्मकांड में 54 वेदी स्थलों पर पिंडदान करने का विधान तीर्थ पुरोहितों के द्वारा बताया जाता है. मसौढ़ी के पुनपुन नदी को पिंडदान का प्रथम द्वार भी कहा जाता है. ऐसा विश्वास है कि पितरों का गयाजी में पिंडदान करने से पहले यहां पुनपुन में पिंडदान करना जरूरी होता है.
क्या कहते हैं जानकार?: पुनपुन में पिंडदान करने के बाद ही गया में पिंडदान को संपन्न माना जाता है. कर्मकांड के जानकार महेशलाल जी कहते हैं कि इसके पीछे सदियों से चली आ रही मान्यता भी शामिल है. हालांकि अगर कोई श्रद्धालु पुनपुन जाने में असमर्थ होते हैं तो वो गयाजी के गोदावरी सरोवर में पिंडदान कर सकता है.
"पुनपुन एक पावन नदी है. गयाजी के गोदावरी को काशी खंड कहा गया है. अगर कोई पुनपुन नहीं जा पाता है तो वो विकल्प के रूप में गोदावरी सरोवर में पिंडदान कर सकता है." -महेशलाल जी, विष्णुपद मंदिर

पुनपुन या गोदावरी दोनों समान: महेशलाल बताते हैं कि इस का महत्व पुराण में बताया गया है. इसको काशी खंड भी कहा जाता है. जो इस खंड पर पिंडदान कर देता है तो वह पुनपुन ना जाने से उसके श्राद्ध कर्म में कोई कमी नहीं रह जाती है. पुराण में लिखा हुआ है कि पुनपुन या गोदावरी दोनों में से किसी भी जगह कर सकते हैं. फल समान मिलता है.
कब से शुरू होगा पितृपक्ष?: पितृपक्ष मेले का उद्घाटन 6 सितंबर को होगा. यह मेला 22 सितंबर 2025 तक चलेगा. वैसे तो पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से होगी. पहले दिन पिंडदानी पुनपुन नदी में श्राद्ध करने के बाद गया के लिए रवाना होंगे.
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