बिहार में चौकीदारों और दफादारों के समर्थन में आए पशुपति पारस को याद आए अपने चाचा, जानें क्यों
पशुपति कुमार पारस चौकीदारों और दफादारों की मांगों के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने कहा कि मेरे परिवार से भी दो चौकीदार थे.

Published : July 25, 2025 at 5:06 PM IST
पटना: बिहार के चौकीदार दफादार बीते 5 दिनों से गर्दनीबाग धरना स्थल पर अपनी मांगों को लेकर बैठे हुए हैं. उनकी मांग है कि पूर्व की प्रक्रिया के तहत चौकीदार दफादार के आश्रितों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराई जाए. इसके अलावा जिन लोगों को सेवा मुक्त कर दिया गया उन्हें पुनः सेवा में वापस लिया जाए.
चौकीदारों और दफादारों को मिला पारस का साथ: चौकीदारों और दफादारों की मांग के समर्थन में शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस चौकीदारों दफादारों के धरना में पहुंचे. इस मौके पर उनके साथ पूर्व सांसद सूरजभान सिंह मौजूद रहे.
सूरजभान ने भी की वकालत: इस मौके पर सूरजभान सिंह ने कहा कि 1990 में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने चौकीदारों और दफादार के लिए जो हक दिया था, वह इन लोगों को मिलना चाहिए. यह इनकी पेट से जुड़ा हुआ मामला है.
"यह सभी रात भर जगकर लोगों को सुरक्षा देते हैं. जागते रहो बोलते हुए लोगों को सचेत करते हैं. इनका हक इन्हें वापस मिलना चाहिए क्योंकि वर्षों से यह लोगों को सचेत करने की परंपरा का पालन करते रहे हैं."- सूरजभान सिंह, पूर्व सांसद
आश्रितों को नौकरी की मांग: चौकीदार दफादार संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि साल 1990 में सरकार ने उन लोगों को सरकारी कर्मी का दर्जा दिया. इस समय यह नियम था कि एच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उनके परिवार के सदस्य को पिता की नौकरी मिल जाती थी. चौकीदारी दफादारी उन लोगों की पुरानी परंपरा रही है.

"साल 2014 में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद आश्रितों की नौकरी के लिए कई आवेदन आए. सेवानिवृत्त लोगों के आवेदन मांगे गए और कई लोगों का योगदान भी कराया गया. सरकार ने वेतन भुगतान भी किया और अचानक से सभी को सेवा से बाहर कर दिया. हमारी मांग है कि सभी को सेवा में पुनः बहाल की जाए और आश्रितों को नौकरी देने की वर्षों से जो आवेदन लंबित है, उसे पुन: बहाल किया जाए."- धर्मेंद्र कुमार, प्रदेश कोषाध्यक्ष, चौकीदार दफादार संघ
आजादी के समय मिलता था ₹2 वेतन: वहीं इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने कहा कि चौकीदार और दफादार पासवान समाज से होते हैं. आजादी के पहले से चौकीदारी की परंपरा चली आ रही है और इसमें अंग्रेजों ने भी पासवान समाज को हक दिया था. आजादी के समय अंग्रेज ₹2 वेतन देते थे. उनके परिवार में भी उनके दो चाचा चौकीदार थे. उनके परिवार के लोग चौकीदार थे इसलिए वह चौकीदारों की पीड़ा समझते हैं.

"जगन्नाथ मिश्रा ने चौकीदारों को हक दिलाया था और यह हक नीतीश सरकार ने छीन लिया है. चौकीदार लोग जो डिमांड कर रहे हैं वह सब जायज है. नीतीश कुमार ने सरकार में आने के बाद पिछड़ा और अति पिछड़ा लाकर के पासवान समाज को अति पिछड़ा से हटकर पिछड़ा में डालकर उपेक्षा की है."-पशुपति पारस,पूर्व केंद्रीय मंत्री
पारस ने किया बड़ा वादा: पशुपति पारस ने कहा कि आज वह चौकीदारों और दफादारों के बीच में इसलिए आए हैं क्योंकि वह सभी उनके परिवार के सदस्य हैं. इन लोगों की मांगी जायज है और उनके आश्रितों को नौकरी मिलनी चाहिए. उनके समर्थन की सरकार बनेगी तो चौकीदारों और दफादार के अस्तित्व के नौकरी के लिए जितने भी आवेदन लंबित हैं, इसका निपटारा होगा और सभी को नौकरी दी जाएगी.
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