झारखंड में विस्थापन आयोग के गठन का रास्ता साफ, नियमावली मंजूर, किसको मिलेगी मदद, क्रेडिट लेने की मची होड़
हेमंत सरकार की कैबिनेट ने झारखंड में विस्थापन आयोग नियमावली की मंजूरी दे दी है. सालों से इसकी मांग हो रही थी.

Published : September 3, 2025 at 5:01 PM IST
रांची: झारखंड के लिए खनिज के भंडार को वरदान के साथ-साथ अभिशाप से भी जोड़ा जाता है. इसकी वजह है विस्थापन. विधानसभा में पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह बात सामने आई है कि राज्य में 1.57 लाख परिवार आज भी विस्थापन का दंश झेल रहे हैं. राज्य बनने के 25 साल बाद हेमंत सरकार ने झारखंड विस्थापन आयोग के गठन का फैसला लिया है.
हेमंत कैबिनेट ने राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग (गठन, कार्य एवं दायित्व) नियमावली, 2025 पर मुहर लगा दी है. अब अध्यक्ष और सदस्यों के मनोनयन/चयन के बाद आयोग का कामकाज शुरू हो जाएगा. लेकिन इससे पहले ही आयोग के गठन को लेकर क्रेडिट लेने की होड़ मच गई है. जयराम कुमार महतो दावा कर रहे हैं कि उनकी पहल पर आयोग का गठन हुआ है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आयोग के गठन से विस्थापितों को किस तरह का लाभ मिलेगा.
विस्थापन और पुनर्वास नियमावली का उद्देश्य
- भूमि अधिग्रहण से विस्थापित व्यक्ति, परिवार, समुदाय का सामाजिक, आर्थिक अध्ययन और सर्वेक्षण करना
- सामाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े व्यक्ति, परिवार, समुदाय और क्षेत्र की पहचान करना और इनके पुनर्वास का सुझाव देना
- रिसर्च और योजना बनाने के लिए सरकारी संस्थाओं को आंकड़े उपलब्ध कराना
- विस्थापन और पुनर्वासन के दौरान अनुश्रवण और पर्यवेक्षण के लिए सरकारी संस्थाओं को सहयोग करना
- सरकार के पुनर्वास योजनाओं के क्रियान्वयन और ओरिएंटेशन के लिए सुझाव देना ताकि विस्थापितों को बेहतक पुनर्वास और मुआवजा का भुगतान हो सके
- विस्थापित परिवारों के अधिकार और हित की रक्षा करना
गठन के बाद आयोग का स्वरुप कैसा होगा
- राज्य सरकार नियमावली से मिली शक्ति का इस्तेमाल करते हुए झारखंड राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग का गठन तीन साल के लिए करेगी.
- राज्य सरकार के स्तर से अध्यक्ष और दो सदस्य का मनोनयन होगा. अध्यक्ष पद के लिए सामुदायिक विकास कार्यक्रमों, विस्थापन और पुनर्वास के क्षेत्र में 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए. दो सदस्यों में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी और सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश या 10 वर्ष के कार्य अनुभव वाले अधिवक्ता होंगे.
- तीन आमंत्रित सदस्य को नामित किया जाएगा जो अवैतनिक होंगे.
- पुनर्वास प्रभावित जिला के उपायुक्त, जिप अध्यक्ष, पुनर्वास प्रभावित प्रखंडों के प्रखंड प्रमुख, ग्राम प्रधान, मानकी मुंडा सदस्य होंगे.
- राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के उप सचिव या उप निदेशक स्तर के पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे.
आयोग पर विभाग का होगा नियंत्रण
राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग (गठन, कार्य एवं दायित्व) नियमावली, 2025 के जरिए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि विस्थापन के मामलों में आयोग सर्वेसर्वा की भूमिका में नहीं रहेगा. आयोग के सुझाव राज्य सरकार पर बाध्यकारी नहीं होंगे. आयोग पर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग का प्रशासनिक नियंत्रण होगा. इसके अलावा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य भारतीय न्याय संहिता की धारा 2(28) में परिभाषित लोक सेवक समझे जाएंगे.
जयराम कुमार महतो ने जोरशोर से उठाया था मुद्दा
दरअसल, 28 अगस्त को मॉनसून सत्र के अंतिम दिन डुमरी से जेएलकेएम के विधायक जयराम कुमार महतो ने गैर सरकारी संकल्प के तहत विस्थापन आयोग के गठन का अभिस्ताव रखा था. उन्होंने कहा था कि 5 वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने विस्थापन आयोग के गठन की घोषणा की थी. जबकि जुलाई 2024 में कैबिनेट ने विस्थापन आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी.
वहीं इसी साल बजट सत्र के दौरान बड़कागांव से भाजपा विधायक रौशन लाल चौधरी ने विस्थापन आयोग की मांग को लेकर सदन में सवाल उठाया था. तब सरकार का जवाब था कि 90 दिन के भीतर विस्थापन आयोग का गठन होगा. लेकिन मॉनसून सत्र तक आयोग के गठन का काम पूरा नहीं होने पर जयराम महतो ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था.
उस वक्त विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने स्पष्ट किया था कि बहुत काम हो चुका है और बहुत जल्द नियमावली बन जाएगी. सरकार ने वादे को पूरा भी किया. अब कैबिनेट से नियमावली मंजूर होने पर जयराम महतो इस मुद्दे को उठाकर अपने समर्थकों को बता रहे हैं कि इस मसले को तमाम विधायक उठाते रहे हैं लेकिन हमेशा टालमटोल होता रहा है. लेकिन 28 अगस्त को उन्होंने इस मुद्दे को आक्रामकता के साथ उठाया था, जिसको सरकार ने गंभीरता से लेते हुए स्वीकृति दे दी. हालांकि जयराम महतो ने इसके लिए सीएम को शुभकामनाएं दी.
कौन-कौन से प्रोजेक्ट बने विस्थापन का कारण
झारखंड में रेलवे, NHAI, NTPC, GAIL, CCL, BCCL, ECL की कई परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है. जबकि बोकारो स्टील प्लांट, तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन, बोकारो थर्मल पावर स्टेशन, पतरातू थर्मल पावर स्टेशन, एचईसी, हर्ल, चांडिल डैम, डिमना, कोनार, मैथन, पंचेत, तेनुघाट डैम जैसी परियोजनाओं की वजह से वर्षों पूर्व विस्थापित हुए लोग आए दिन नियोजन और मुआवजा के लिए सड़कों पर उतरते रहते हैं. पिछले दिनों बीसीसीएल के सामने धरने पर बैठे विस्थापित प्रेम महतो की सीआईएसएफ के लाठीचार्ज में मौत हो गई है. यह आरोप खुद विधायक जयराम महतो ने लगाया था.
विस्थापन को दूरगामी प्रभाव से जोड़कर करना होगा हैंडल
झारखंड समेत देश के 15 राज्यों में विस्थापन और पुनर्वास से जुड़ी समस्या और समाधान के लिए काम करने वाली एजेंसी ‘ क्रेडल ’ यानी Consultats for Rural area Development linked Economy के सीईओ प्रणय कुमार ने 30 नवंबर 2024 को संस्था के 30वें स्थापना दिवस पर कुछ आई ओपनिंग बातें कही थी.
उन्होंने कहा था कि रैयत की जमीन की कीमत वन विभाग और सरकार तय करती है. अब एक नई सोच आ गयी है कि रैयत को पैसा दे दो और जमीन ले लो. लेकिन वह पैसे 1st जेनेरेशन का काम आता है. दूसरी पीढ़ी से फिर आंदोलन और संघर्ष शुरू हो जाता है. झारखंड में तो जीएम लैंड पर रह रहे लोगों का पुनर्स्थापन भी एक बड़ी समस्या है.
उन्होंने कहा था कि राज्य में विस्थापन किसी पतझड़ से कम नहीं होता है. इंसान को अपना सबकुछ छोड़ कर विस्थापित होना पड़ता है. 1994 में उन्होंने ट्राइबल और नॉन ट्राइबल पॉपुलेशन पर कोल माइनिंग के प्रभाव पर रिसर्च किया था. इसमें एक खास बात सामने आई थी कि विस्थापन के बाद पुनर्वास को लेकर एक्शन रिएक्टिव होता है. लिहाजा, विस्थापन के मसले को दूरगामी प्रभाव के साथ जोड़कर हैंडल करना होगा.
सबसे खास बात है कि अभी आयोग के गठन के साथ-साथ इसकी नियमावली को कैबिनेट से स्वीकृति मिली है. आयोग को अस्तित्व में आने में थोड़ा वक्त लगेगा. लेकिन अहम बात ये है कि यह आयोग एक परामर्शी संस्था के रूप में काम करेगा. क्योंकि आयोग के पास दंड या जुर्माना लगाने की शक्ति नहीं है. नियमावली में यह भी स्पष्ट है कि आयोग के सुझाव सरकार पर बाध्यकारी नहीं होगे. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि ऐसे आयोग के गठन से विस्थापितों को मदद कैसे मिल पाएगी.
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