पटना विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वालों की संख्या क्यों घटी? 950 सीट अब भी खाली
पटना विश्वविद्यालय के लिए एडमिशन करने वालों की संख्या लगातार घट रही है. इस बार अभी भी 950 सीट रिक्त है. पढ़ें पूरी खबर..

Published : July 24, 2025 at 5:40 PM IST
पटना: जिस पटना विश्वविद्यालय को कभी बिहार की उच्च शिक्षा का सिरमौर माना जाता था, आज वहां एडमिशन के प्रति छात्रों में रुचि कम होती दिख रही है. वर्ष 2025 के अंडर ग्रेजुएट नामांकन सत्र में विश्वविद्यालय की कुल 4445 सीटों में से लगभग 950 सीटें अब भी रिक्त पड़ी हैं. यह स्थिति उस विश्वविद्यालय के लिए गंभीर संकेत है, जहां कभी एक-एक सीट के लिए छात्रों में प्रतिस्पर्धा होती थी.
तीन राउंड की मेरिट लिस्ट के बाद भी सीट खाली: विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक तीन राउंड की मेरिट लिस्ट जारी की है. इसके अतिरिक्त एक स्पॉट राउंड भी आयोजित किया जा चुका है. बावजूद इसके बीसीए कोर्स समेत कई विषयों में सीटें नहीं भर सकीं. विशेष रूप से वाणिज्य संकाय में संचालित बीसीए कोर्स में करीब 250 सीटें अब भी खाली हैं, जो विश्वविद्यालय में किसी एक कोर्स में सबसे अधिक रिक्तता है.
पटना कॉलेज जैसे प्रमुख संस्थानों में इतिहास, भूगोल और हिंदी जैसे पारंपरिक विषयों में भी सीटों की कमी देखने को मिल रही है. यह हालत विश्वविद्यालय के बदलते शैक्षणिक माहौल और छात्रों की बदलती प्राथमिकताओं की ओर इशारा करती है.
स्पॉट राउंड के जरिए दाखिला का अंतिम मौका: पटना विश्वविद्यालय के डीन प्रो. डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि नामांकन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे 26 जुलाई तक स्पॉट राउंड के माध्यम से शेष सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी कर लें. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन छात्रों ने पहले ही ऑनलाइन आवेदन किया है, उन्हीं को स्पॉट राउंड में नामांकन का अवसर मिलेगा.
"अंडर ग्रेजुएट नामांकन सत्र में विश्वविद्यालय की कुल 4445 सीटों में से लगभग 950 सीटें रिक्त हैं. कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे 26 जुलाई तक स्पॉट राउंड के माध्यम से शेष सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी कर लें. विश्वविद्यालय की प्राथमिकता यह है कि पूर्व में आवेदन कर चुके छात्र ही इस प्रक्रिया से लाभान्वित हों, न कि वे जिन्होंने पहले आवेदन नहीं किया है."- प्रो. डॉ. अनिल कुमार, डीन, पटना विश्वविद्यालय

भाषा विषयों में नामांकन घटा: डॉ. अनिल कुमार के अनुसार विश्वविद्यालय में रिक्त सीटों में बड़ी संख्या में वे विषय शामिल हैं, जो भाषाई और साहित्यिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं. जैसे कि अरबी, पर्शियन, बांग्ला और मैथिली. इन विषयों में नामांकन की संख्या साल दर साल घटती जा रही है. इसके विपरीत हिंदी, गणित, अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र जैसे विषय आज भी छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं. यह विषय अभी भी छात्रों में लोकप्रिय है और इन विषयों में छात्र नामांकन ले रहे हैं.
वोकेशनल कोर्सेज में कमी: प्रोफेसर अनिल कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय में अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस या साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक कोर्स संचालित नहीं हो रहे हैं. हालांकि कुछ वोकेशनल कोर्सेज जैसे कि बीसीए की शुरुआत की गई है लेकिन उनमें भी अपेक्षित संख्या में छात्र नहीं आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि वोकेशनल कोर्सेज में अभी ठीक-ठाक संख्या में सीट खाली है और अभी इनमें नामांकन की प्रक्रिया जारी है. इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय आकर इन विषयों में नामांकन ले सकते हैं.
समय के साथ कोर्सेस का उन्नयन जरूरी: प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. डॉ. बीएन प्रसाद कहते हैं कि आज का छात्र वर्ग उद्योग और नौकरी की मांग को ध्यान में रखकर कोर्स का चयन करता है. उन्होंने कहा कि अब शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं, बल्कि रोजगार हासिल करना बन गया है. परंपरागत और सांस्कृतिक विषयों में छात्रों की रुचि लगातार घट रही है. क्योंकि उनमें रोजगार की संभावनाएं सीमित हैं.
वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्स आज के छात्र के लिए अधिक आकर्षक हैं, क्योंकि ये न केवल भविष्य की तकनीकी दुनिया में प्रासंगिक हैं बल्कि बेहतर करियर विकल्प भी प्रदान करते हैं. इसलिए समय के साथ कोर्सेस का उन्नयन जरूरी है.
विश्वविद्यालय को चाहिए कोर्सेस में नवाचार: डॉ. बीएन प्रसाद ने पटना विश्वविद्यालय को सुझाव दिया कि उसे अपने पाठ्यक्रमों की पुनर्समीक्षा करनी चाहिए और उद्योग की मांग के अनुसार नए कोर्स शुरू करने चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय आधुनिक तकनीक से जुड़े कोर्स शुरू करता है तो न केवल छात्रों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी.
"कई ऐसे छात्र हैं जो पहले राउंड में मेरिट लिस्ट में आए थे लेकिन किन्हीं कारणों से नामांकन नहीं ले सके, उनके लिए यह अंतिम मौका है कि वे 26 जुलाई से पहले विश्वविद्यालय में दाखिला ले लें."- प्रो. डॉ. बीएन प्रसाद, प्रख्यात शिक्षाविद
छात्रों की मानसिकता में बदलाव: बीएन प्रसाद का मानना है कि आज के समय में छात्र केवल डिग्री के लिए नामांकन नहीं ले रहे बल्कि वे यह देखते हैं कि उस डिग्री से उन्हें क्या करियर मिलेगा. इसका सीधा असर उन विषयों पर पड़ा है, जिनका सीधा संबंध किसी विशिष्ट रोजगार से नहीं होता. पटना विश्वविद्यालय जैसी पारंपरिक संस्थाएं यदि समय के अनुरूप अपने कोर्सेस को अपडेट नहीं करतीं हैं तो आने वाले वर्षों में दाखिले की यह गिरती दर और गंभीर हो सकती है.
वे कहते हैं कि बाजार की मांग, तकनीकी प्रगति और रोजगार की अनिवार्यता को समझते हुए यदि पटना विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों में नवाचार और व्यावसायिकता को शामिल करता है, तो वह एक बार फिर से छात्रों की पहली पसंद बन सकता है.
ये भी पढ़ें: वाणिज्य महाविद्यालय की प्रिंसिपल होम साइंस की प्रोफेसर तो महिला कॉलेज के प्राचार्य बने पुरुष, नियुक्ति पर विवाद

