देवघर की आयुषी मुखर्जी ने नीट पीजी 2025 में लहराया परचम, देशभर में हासिल किया 116वां रैंक
देवघर की आयुषी मुखर्जी ने नीट पीजी 2025 में 116वां रैंक हासिल कर पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है.


Published : August 20, 2025 at 5:17 PM IST
देवघर: नीट पीजी 2025 के परिणामों ने हजारों मेडिकल छात्रों के सपनों को नई उड़ान दी है. इस परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले छात्र अब एमडी, एमएस और अन्य पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में दाखिला लेंगे. झारखंड के देवघर की बेटी आयुषी मुखर्जी ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में देशभर में 116वां रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे राज्य का नाम रोशन किया है. आयुषी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के बल पर झारखंड के युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं.
नीट पीजी: मेडिकल शिक्षा का स्वर्णिम द्वार
नीट पीजी (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-पोस्टग्रेजुएट) मेडिकल क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. इस परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले छात्रों को उनके अंकों के आधार पर भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जाता है. इन कॉलेजों में आधुनिक संसाधनों और बेहतर फैकल्टी के साथ पढ़ाई कर छात्र एक कुशल डॉक्टर बनने का सपना पूरा करते हैं.
इस वर्ष नीट पीजी 2025 में हजारों छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है. इनमें से एक नाम है देवघर की आयुषी मुखर्जी का, जिन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से पूरे देश में 116वां रैंक हासिल किया है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि झारखंड के युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी स्थापित की है.
आयुषी की उपलब्धि: एक अविश्वसनीय क्षण
ईटीवी भारत से बातचीत में आयुषी मुखर्जी ने अपनी सफलता की कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उन्होंने नीट पीजी 2025 में 116वां रैंक हासिल किया है, तो यह उनके लिए एक अविश्वसनीय क्षण था. परिणाम देखने के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. आयुषी ने कहा, "मैंने कड़ी मेहनत की थी, लेकिन इतना ऊंचा रैंक पाना मेरे लिए सपने जैसा है. मैं अपने परिवार और शिक्षकों को इस उपलब्धि का श्रेय देती हूं."
आयुषी ने अपनी पढ़ाई के दौरान झारखंड के रांची स्थित रिम्स (राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) मेडिकल कॉलेज की अहम भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान रिम्स में मिली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने उनकी नींव को मजबूत किया. आयुषी ने कहा "नीट पीजी जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा के लिए एमबीबीएस का चार साल का कोर्स बुनियादी आधार की तरह काम करता है. यदि बेसिक्स मजबूत न हों, तो आगे की पढ़ाई में सफलता मुश्किल हो जाती है,".
रिम्स और परिवार का योगदान
आयुषी ने अपनी सफलता का श्रेय रिम्स कॉलेज के साथ-साथ अपने परिवार को भी दिया. उन्होंने बताया कि एमबीबीएस पूरा करने के बाद उन्होंने एक साल तक घर पर रहकर नीट पीजी की तैयारी की. संयुक्त परिवार होने के बावजूद उनके परिवार ने उन्हें हर संभव सहयोग प्रदान किया. आयुषी ने भावुक होकर कहा "मेरे परिवार ने मुझे पढ़ाई के लिए शांत और अनुकूल माहौल दिया. उनकी प्रेरणा और समर्थन के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी".
आयुषी के पिता ने भी इस मौके पर अपनी बेटी की मेहनत की सराहना की. उन्होंने कहा, "प्रत्येक अभिभावक को अपने बच्चों की जरूरतों को समझना चाहिए. मेडिकल की पढ़ाई के लिए संसाधन और किताबें उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. हमने आयुषी को हर संभव संसाधन मुहैया कराया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है."
झारखंड में मेडिकल शिक्षा की स्थिति
आयुषी ने झारखंड में मेडिकल शिक्षा की स्थिति पर भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि रिम्स जैसे संस्थानों की बदौलत झारखंड के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, लेकिन अभी और प्रयासों की जरूरत है. आयुषी ने जोर देकर कहा "झारखंड में हजारों प्रतिभाशाली छात्र हैं, जो मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं. इसके लिए रिम्स जैसे और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना होनी चाहिए, जहां आधुनिक संसाधन और अनुभवी फैकल्टी उपलब्ध हों".
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्य सरकार को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करनी चाहिए. इससे न केवल स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी, बल्कि युवाओं को भी अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलेगा.
रेडियोलॉजी में बनाना चाहती हैं करियर
आयुषी ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया कि वह नीट पीजी की काउंसलिंग के बाद रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करना चाहती हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनके रैंक के आधार पर काउंसलिंग में उन्हें देश के किसी प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा. उन्होंने कहा "मैं रेडियोलॉजी में पढ़ाई कर एक कुशल डॉक्टर बनना चाहती हूं और समाज की सेवा करना चाहती हूं".
जूनियरों के लिए प्रेरणादायक संदेश
आयुषी ने नीट पीजी की तैयारी कर रहे अपने जूनियरों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी. उन्होंने कहा, "किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सफलता के लिए मन से पढ़ाई करना जरूरी है. किताबों को अपना दोस्त बनाएं, क्योंकि यही आपको ज्ञान और आत्मविश्वास देती हैं. इंटरनेट का सहारा लें, लेकिन पूरी तरह उस पर निर्भर न रहें. मेहनत और धैर्य के साथ लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है."
उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई के दौरान नियमितता और अनुशासन बहुत जरूरी है. वे कहती हैं "अपने बेसिक्स को मजबूत करें और समय प्रबंधन पर ध्यान दें. नीट पीजी जैसी परीक्षा में सफलता के लिए यह बहुत जरूरी है".
समुदाय की ओर से सम्मान
आयुषी की इस उपलब्धि के बाद देवघर और आसपास के बंगाली समुदाय ने उन्हें बधाई दी और सम्मानित किया. समुदाय के लोगों ने आयुषी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उम्मीद जताई कि वह एक कुशल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेंगी. स्थानीय लोगों में आयुषी की इस सफलता को लेकर गर्व की भावना है, और वे उन्हें एक प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं.
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