तबाही के कगार पर झुमरा का लालगढ़, छह महीने में एक करोड़ के इनामी सहित 12 का एनकाउंटर!
झारखंड के बोकारो से लेकर गिरिडीह के जंगली क्षेत्रों में नक्सलियों का आतंक अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है.

Published : July 17, 2025 at 3:55 PM IST
रांचीः एक समय था जब झारखंड के बोकारो से लेकर गिरिडीह का पूरा जंगली क्षेत्र लाल आतंक के लिए जाना जाता था. लेकिन मात्र 1 साल के भीतर यह लाल गलियारा तबाही के आखिरी तक पहुच गया है. बुधवार को कुंवर मांझी के मारे जाने के बाद इलाके में नक्सलियों का थोड़ा बहुत प्रभाव था वह भी खत्म हो चला है.
सबसे बड़ी सफलता जब विवेक सहित आठ का हुआ एनकाउंटर
21 अप्रैल 2025 यह वह तारीख है जिस दिन झारखंड पुलिस ने पहली बार एक करोड़ के इनामी नक्सली नेता को उसके आठ साथियों के साथ मार गिराया था. सारंडा में पुलिस के चक्रव्यूह में फंसे एक दर्जन से ज्यादा नक्सलियो के लिए मारा गया विवेक एक बड़ी आस था. सारंडा में पुलिस के दबाव को कम करने के लिए विवेक उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में लाल ताकत को बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ था. लेकिन बेहद सटीक सूचना के बाद उसकी पूरी टीम का ही एनकाउंटर कर दिया गया था. इससे पहले जनवरी 2025 में भी बोकारो में चार नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ जिसमें तीन इनामी थे.
बिल से निकलते ही एनकाउंटर
मतलब साफ है झारखंड पुलिस का इरादा भी बेहद स्पष्ट है. झुमरा से लेकर पारसनाथ अगर अब कोई भी नक्सली नेता सिर उठेगा तो उसके कुचल दिया जाएगा. उसके पास एकमात्र विकल्प है कि वह आत्मसमर्पण कर दें. अगर आंकड़ों की तरफ देख तो पुलिस अपने दावों को लेकर बेहद मुखर है. झुमरा से लेकर पारसनाथ पहाड़ी तक आतंक मचाने वाले एक दर्जन नक्सली मात्र 6 महीने में मारे गए. विवेक के दस्ते के मारे जाने के बाद कुंवर माझी इलाके में दो बड़े नक्सलियों के मूवमेंट में लगा हुआ था लेकिन बुधवार को एनकाउंटर में कुंवर माझी भी मार गया.
नक्सलियों में खलबली
एक करोड़ के इनामी विवेक के साथ साथ आठ नक्सलियों के एनकाउंटर और फिर बुधवार को पांच लाख के कुंवर मांझी के मारे जाने के बाद झारखंड में भाकपा माओवादियों के बीच खलबली मची हुई है. सारंडा में पुलिस के चक्रव्यूह में फंसे एक दर्जन से ज्यादा नक्सलियों के लिए मारा गया कुंवर का दस्ता एक बड़ी आस था. सारंडा में पुलिस के दबाव को कम करने के लिए कुंवर कुख्यात वीरसेन और सहदेव के साथ छोटानागपुर प्रमंडल में लाल ताकत को बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ था.
ताकत बढ़ाने में लगा था लेकिन कुनबा ही हो गया तबाह!
भाकपा माओवादियों के सेंट्रल कमेटी सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत पूरे दस्ते के सफाए के बाद कुंवर के मारे जाने से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में माओवादी संगठन का लगभग खात्मा हो गया है. पिछले छह महीने से सारंडा इलाके में केंद्रीय बलों की मदद से भाकपा माओवादियों के ईआरबी सचिव मिसिर बेसरा, सेंट्रल कमेटी मेंबर पतिराम मांझी और आकाश मंडल उर्फ तिमिर, अनमोल के दस्ते के खिलाफ अभियान जारी है.
सारंडा में चल रहे निर्णायक ऑपरेशन को लेकर भाकपा माओवादी दबाव में थे. सारंडा में चल रहे ऑपरेशन के दबाव को कम करने की जिम्मेदारी सेंट्रल कमेटी मेंबर प्रयाग मांझी को दी गई थी. प्रयाग मांझी बीते एक साल से नए लड़को को जोड़कर भाकपा माओवादी कैडर को मजबूत करने में लगा था, ताकि सारंडा में कमजोर पड़ने पर उत्तरी छोटानागपुर में नया आधार बनाया जा सके.
प्रयाग मांझी बीते एक साल से लगातार अपने हथियारबंद दस्ते के साथ लुगू पहाड़, पारसनाथ और झुमरा के इलाकों में अपने लोकेशन बदल बदल कर रह रहा था. विवेक के द्वारा संगठन को दोबारा मजबूत करने की सूचना मिलने के बाद झारखंड पुलिस का इंटेलिजेंस विभाग पूरी तरह से एक्टिव होकर उसकी जानकारी हासिल करने में लगा हुआ था.
मिथलेश के सरेंडर और रणविजय की गिरफ्तारी से मिले थे प्रयाग दस्ते का इनपुट
भाकपा माओवादियों के सैक कमांडर मिथलेश ने बीते दिनों झारखंड पुलिस के सामने हथियार डाल दिए थे. वहीं कुख्यात रणविजय महतो की गिरफ्तारी बोकारो से ही कर ली गई थी. दोनों माओवादियों से पूछताछ के बाद प्रयाग मांझी के दस्ते की गतिविधियों की जानकारी एजेंसियों को मिली थी. जिसके बाद से उसकी तलाश एजेंसियों ने तेज कर दी थी. प्रयाग मांझी बीते दो दशकों से पारसनाथ, झुमरा के इलाके में सक्रिय था.
माओवादी सेंट्रल कमेटी मेंबर और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के सदस्य के तौर पर देशभर के शीर्ष माओवादियों में उसकी गिनती होती थी. रणनीतिक सुझबूझ वाले प्रयाग मांझी को संगठन के विस्तार के लिए साल 2021 के बाद तकरीबन 10 करोड़ की राशि मिली थी. लेवी के जरिए मिली इस राशि से न सिर्फ झारखंड बल्कि बिहार, बंगाल, असम, यूपी तक में संगठन के विस्तार की योजना थी.
सारंडा में जब नक्सल विरोधी अभियान अब चरम पर है. ऐसे में माओवादी फिर से पारसनाथ झुमरा के इलाके में खुद को मजबूत करने के प्रयास में प्रयाग मांझी के नेतृत्व में लगे थे. लेकिन प्रयाग मांझी के साथ साथ उसके सैक कमांडर अरविंद यादव और जोनल कमांडर साहेबराम मांझी से मारे जाने के बाद अब कुंवर के एनकाउंटर की वजह से दस्ता कमजोर पड़ गया है.
अभियान जारी रहेगा
झारखंड पुलिस के आईजी अभियान माइकल राज ने बताया कि बोकारो के नक्सल बेल्ट में हमारा लगातार अभियान जारी है. हम किसी भी तरह से नक्सलियों को बाहरी मदद लेने नहीं देंगे. आप यह जानते हैं कि जनवरी 2025 से लेकर अबतक केवल बोकारो में 12 बड़े-छोटे नक्सलियों का एनकाउंटर हो चुका है. अब उस इलाके में केवल नक्सलियों का एक छोटा दस्ता ही बचा हुआ है. जिनके खात्मे के लिए अभियान अभी भी जारी है.
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