राजस्थान के सबसे लंबे ब्रिज को NBWL क्लीयरेंस, 256 करोड़ से बनेगा तीन लेन का पुल
चंबल घड़ियाल अभयारण्य में इंद्रगढ़-ललितपुर राज्य मार्ग-120 पर 1880 मीटर लंबा ब्रिज बनेगा, जिसे राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने क्लीयरेंस दे दी है.

Published : May 14, 2025 at 11:37 AM IST
कोटा : चंबल नदी पर इटावा इलाके में एक और हाई लेवल ब्रिज का निर्माण किया जाना है, यह निर्माण राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) क्लीयरेंस के चलते 2 साल से शुरू नहीं हो पाया था, जबकि इसके निर्माण की घोषणा 4 साल पहले हुई थी. अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के हस्तक्षेप के चलते इसे एनवायरमेंट क्लीयरेंस मिली है.
यह ब्रिज चंबल-घड़ियाल अभयारण्य में इंद्रगढ़-ललितपुर राज्य मार्ग-120 पर बनेगा, जिसे राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है. इसके बाद फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से भी जल्द ही क्लीयरेंस इसे मिल जाएगी. सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इसकी प्रक्रिया पहले ही शुरू की हुई है. इसके बाद ब्रिज का निर्माण शुरू होगा, जिससे कोटा जिले के इटावा-पीपल्दा क्षेत्र ही नहीं बारां जिले के लाखों की आबादी को भी फायदा होगा.

मध्य प्रदेश और बारां जिले को फायदा : ब्रिज कोटा जिले के चंबल डीपरी गांव से बूंदी जिले के चांणदा खुर्द को जोड़ने वाला है. बारां जिले और कोटा जिले के पीपल्दा से दिल्ली की तरफ यात्रा करने के लिए दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे का उपयोग करना भी आसान हो जाएगा. यह लोग सीधे लाखेरी और इंद्रगढ़ के नजदीक इंटरचेंज पर एक्सप्रेसवे को पकड़ सकेंगे. बूंदी जिले के लाखेरी और इंद्रगढ़ क्षेत्र की आबादी को भी कोटा आने में काफी आसानी होगी. इसके अलावा जयपुर जाने वाले यात्रियों को भी एक और सीधा रूट मिल जाएगा. इससे मध्य प्रदेश के लोग भी सीधा जयपुर जा सकेंगे.
कांग्रेस शासन में शुरुआत और बजट घोषणा : प्रदेश में बीते कांग्रेस शासन के दौरान ही साल 2021 में डीपीआर बनवाई गई और 2023 के बजट में 256 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई थी, लेकिन निर्माण की पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिली. इसके चलते यह निर्माण नहीं हो पा रहा था. यह प्रदेश का सबसे लंबा ब्रिज बनने वाला है. इसकी लंबाई झरेल के बालाजी के नजदीक चंबल नदी पर बन रहे 1880 मीटर के ब्रिज के बराबर ही है. ऐसे में यह भी प्रदेश का सबसे लंबा ब्रिज होने वाला है. झरेल के बालाजी से एक लेन ज्यादा चौड़ा यह ब्रिज होगा. झरेल के बालाजी का ब्रिज दो लेन का है, जबकि गोठड़ा कलां वाला तीन लेन का बनाया जाएगा. झरेल का निर्माण साल 2026 में पूरा होना है, ऐसे में साल 2027 में गोठड़ा कलां का ब्रिज बन जाएगा.
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हादसे में 13 कई मौत, फिर सरकार ने की थी घोषणा : कोटा जिले से काफी संख्या में लोग बूंदी जिले में इंद्रगढ़ के नजदीक कमलेश्वर महादेव मंदिर (क्वालजी) पर दर्शन के लिए जाते हैं. जिले के इटावा व खातोली और बारां जिले के मांगरोल इलाके से चंबल नदी को क्रॉस कर कमलेश्वर महादेव जाना काफी आसान रहता है. ऐसे में अधिकांश लोग अपने वाहनों को नाव में लेकर जाते हैं, लेकिन 16 दिसंबर 2020 को कोरोना काल के दौरान इसी तरह से नाव में सवार होकर तीन दर्जन से ज्यादा लोग जा रहे थे. यह नाव चंबल नदी के बीच में जाकर पलट गई, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी. इस हादसे में बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग सब शामिल थे. इसके बाद ही तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ब्रिज बनाने की घोषणा बजट में की थी.

चंबल नदी पर होंगे प्रदेश के तीन सबसे लंबे ब्रिज : वर्तमान में चंबल नदी पर प्रदेश का सबसे लंबा ब्रिज गैंता माखीदा है, जिसकी लम्बाई 1652 मीटर है. यह ब्रिज भारतीय जनता पार्टी के 2013 से 2018 के शासन में बना था. तीन दशक से भी ज्यादा समय से लोग इस ब्रिज की मांग कर रहे थे. इसके बाद बूंदी जिले के लबान से कोटा जिले के इटावा का सीधा संपर्क हो गया है. दूसरे दो ब्रिजों में झरेल के बालाजी और गोठड़ा कला की बराबर लंबाई 1880 मीटर है. दोनों ब्रिज का निर्माण होने के बाद चंबल नदी पर ही प्रदेश के तीन लंबे ब्रिज होंगे.
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