बाघ के जबड़े से खींच लाया अपने साथी को, जांबाजी और खौफ के 30 मिनट की वो दास्तां
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघ का हमला. चौकीदार ने दिखाई बहादुरी. साथी को बचाया. निहत्थे चौकीदार ने कैसे किया टाइगर से संघर्ष, जानिए.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 31, 2025 at 11:12 AM IST
|Updated : June 4, 2025 at 12:59 PM IST
नर्मदापुरम (देवेंद्र वैश): सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में मढ़ई के जंगल में बाघ के मुंह से साथी चौकीदार की जान बचाने वाले जांबाजा रामदास को इस बात का सुकून है कि उसने बहादुरी दिखाकर साथी की जान बचा ली. बाघ के चंगुल से छुड़ाने के बाद भी खौफ का साया कम नहीं हुआ. आधा घंटे तक बाघ दोनों चौकीदारों पर फिर से हमले की फिराक में घेरे रहा. जांबाज चौकीदार रामदास से ईटीवी भारत ने दहशत और बहादुरी के वो 30 मिनट की दास्तां सुनी. आप भी सुनिए....
बाघ के हमले से चौकीदार गंभीर रूप से घायल
बाघ का नाम सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई के कोर एरिया के लागदा कैंप में चौकीदार बृजेंद्र टेकाम पर बाघ ने हमला कर दिया. वहां मौजूद चौकीदार रामदास इवने जोकि बृजेंद्र का जीजा भी हैं. उसने बाघ से डटकर मुकाबला किया और अपने साले को बचा लिया. आधे घंटे का संघर्ष का समय बहुत खौफनाक रहा. बाघ के हमले में बृजेंद्र के कंधे एवं पीठ पर चोट आईं. उसका जिला अस्पताल में इलाज जारी है.
जान की परवाह किए बगैर टाइगर से संघर्ष
जांबाज चौकीदार रामदास बताते हैं "बुधवार की रात 8 बजे की घटना है. हम फोन पर परिवार से बात करने के लिए चौकी से बाहर निकले. मेरे से 10 मीटर की दूरी पर बृजेंद्र पर टाइगर ने हमला कर दिया. हमला होते ही बृजेंद्र जमकर चिल्लाया कि जीजा मुझे बचाओ. मैंने देखा तो 10 मीटर की दूरी पर टाइगर मेरे साले बृजेंद्र को खींचकर लेकर जा रहा था. मैं जमकर चिल्लाकर टाइगर की तरफ दौड़ा. मैंने सोचा इसको बचाना बहुत जरूरी है, चाहे मुझे कुछ भी हो जाए. मैंने अपनी जान की परवाह किए बगैर चिल्लाकर टाइगर की ओर दौड़ लगा दी."
हमले के बाद भी घात लगाए बैठा रहा टाइगर
जांबाज चौकीदार रामदास बताते हैं "मेरे द्वाराा जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर बाघ भाग गया. मैंने जैसे तैसे करके अपने साले को टाइगर से छुड़ाया और कैंप में लेकर आया. तभी बिजेंद्र ने बोला कि मुझे पानी लाकर दो. मैं पानी लेने के लिए बाहर निकला तो टाइगर कैंप के बाहरी ही खड़ा था. मैंने तुरंत बाहर से पानी लेकर अंदर घुसा और गेट लगा लिया. हम दोनों अंदर कैंप में हो गए. फिर रेंजर पीएन ठाकुर को फोन लगाया और गाड़ी लेकर आने के लिए कहा. हमने बताया कि बिजेंद्र पर टाइगर ने हमला कर दिया है. इसके बाद मढ़ई फोन लगाकर गाड़ी बुलाई. कैंप में अंदर जिस जगह पर नेटवर्क आता था, उसी के पास टाइगर का मूवमेंट बना हुआ था."

बाघ के आगे वाहन खड़ा किया, तब भागा
रामदास बताते हैं "कैंप के बाहर टाइगर घात लगाए बैठा था. जहां मेरी छांव जा रही थी, वहीं टाइगर भी खड़ा था. करीब आधे घंटे तक टाइगर वहीं खड़ा रहा. जब कैंप के पास गाड़ी पहुंची तो उन्हें बताया गया कि टाइगर यहीं पर है. गाड़ी में जितेंद्र धुर्वे, संजू धुर्वे, ओम प्रकाश धुर्वे, दीपक धुर्वे ड्राइवर थे. गाड़ी के पास टाइगर खड़ा था. उन्होंने गाड़ी को उसके आगे किया बाघ को भगाया. इसके बाद घायल बिजेंद्र को गाड़ी से लेकर अस्पताल लेकर पहुंचे."
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चौकीदारों के पास अपनी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं
रामदास बताते हैं "सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो चौकी पर हम लोगों के पास कुछ नहीं रहता. जंगल में जब पेट्रोलिंग की जाती है तो हमारे पास एक कुल्हाड़ी रहती है. साथ में पानी की बोतल रहती है. इसके अलावा कुछ भी नहीं रहता. जिस समय चौकी पर घटना घटी, उस समय भी हमारे पास कुछ नहीं था. जंगल में औजारों की अनुमति नहीं है. यदि शासन कोई आवाज करने वाली चीज दे ताकि कोई जानवर के पास आवाज कर दी जाए तो वह सामने से हट जाए. इससे पहले भी लेपर्ड ने एक चौकीदार पर हमला किया था. इससे उसकी मौत हो गई थी."

