नर्मदापुरम में रखे हैं 1880 की रामलीला के राजसी पोशाक, तंबाकू के पत्तों से प्रोटेक्शन
नर्मदापुरम में साल 1880 में रामलीला महोत्सव की हुई थी शुरुआत, बनारस से मंगवाए गए थे राजसी पोशाक, देखते रह जाएंगे सोने-चांदी की अद्भुत कलाकारी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : October 1, 2025 at 2:59 PM IST
नर्मदापुरम: सेठानी घाट पर चल रहे 18 दिवसीय रामलीला महोत्सव की शुरुआत 17 सितंबर को हुई थी. यह महोत्सव 5 अक्टूबर तक चलेगा. रोजाना 8 बजे रात से कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जाता है. आयोजन से जुड़े लोग बताते हैं कि रामलीला महोत्सव की शुरुआत आज से 145 साल पहले सेठ नन्हेलाल घासीराम के द्वारा की गई थी. इस महोत्सव की शुरुआत सेठानी घाट के सामने तिलक भवन में हुई थी. तब से हर साल बिना रुके रामलीला का आयोजन हो रहा है.
बनारस से मंगाए गए थे राजसी पाेशाक
रामलीला संयोजक ने बताया, "साल 1880 में जब रामलीला महोत्सव की शुरुआत की गई थी. तब स्थानीय कलाकार पात्रों का मंचन किया करते थे. उनको पहनने के लिए पोशाक और रामलीला मंचन से जुड़े सामानों को जयपुर और बनारस से लाया गया था, जो आज भी नर्मदापुरम में सुरक्षित रखे हुए हैं. इसमें भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, माता जानकी, हनुमान के पात्रों के कपड़ों सहित अन्य उपयोगी चीजें हैं. इन वस्त्रों में चांदी, सोने की जरी का काम हुआ है. इन वस्त्रों को तंबाकू के पत्तों में संभाल कर रखा जाता है."
145 वीं रामलीला महोत्सव आयोजित
रामलीला महोत्सव के संयोजक मुन्नू दुबे ने ईटीवी भारत से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि "नर्मदापुरम में 145 साल पहले जितने जोश के साथ रामलीला महोत्सव का प्रारंभ हुआ था. आज 2025 में उतने ही उत्साह के साथ रामलीला महोत्सव का आयोजन हो रही है. इसमें नर्मदांचल के कलाकार अभिनय करते हैं. 15 से 20 दिन पहले प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं. उसके बाद कलाकार महोत्सव में अभिनय करते हैं.

18 दिनों तक होगा मंचन
मुन्नू दुबे ने बताया कि "अनुष्ठान, पूजन के साथ रामलीला महोत्सव की शुरुआत होती है. इस साल 17 सितंबर को मुकुट पूजन और घट स्थापना के साथ ही इसकी शुरुआत हुई है. शिव शंकर भगवान की लीला और नारद मुनि की लीला से प्रारंभ होकर श्री राम राज्याभिषेक तक पूरी लीलाएं 18 दिन तक मनाई जाएंगी."

कपड़ों की हालत दयनीय
साल 1880 में रामलीला महोत्सव के लिए मंगवाए गए वस्त्रों के बारे संयोजक मुन्नू दुबे ने बताया कि "पात्रों के कपड़ों को बनारस और जयपुर से खरीदकर लाया गया था. इसमें राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, माता जानकी जी एवं हनुमान जी के यह वस्त्र थे. इसके अलावा इसमें राजसी पंखा, छत्र, चवर, दंड, चांदी के ठोस यह सभी बनारस से लाए गए थे. चांदी के जो छत्र रखे हुए हैं वो ठीक हैं, लेकिन वस्त्रों की हालत दयनीय है.

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पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा है अध्यक्ष
इन कपड़ों में चांदी, सोने की जरी लगी हुई है. अब नए वस्त्रों का उपयोग होने लगा है. 1970 के दशक में जब रामलीला महोत्सव की कमान भवानी शंकर शर्मा ने संभाली, तो उन्होंने पात्रों के नए वस्त्र मंगवाए, जो 2000 तक चलते रहे. साल 2025 में फिर से रामलीला महोत्सव का पूरा सामान खरीद कर लाया गया है. मुन्नू दुबे ने बताया कि "आजकल पूर्व विधायक गिरजाशंकर शर्मा की अध्यक्षता में रामलीला समिति का कार्यभार रहता है."
पुरातन काल के वस्त्र थोड़े बहुत बच गए हैं. इसमें माता जानकी की चुनरी है. उसे बड़े-बड़े तंबाकू के पत्तों में सुरक्षित रखा जाता है. इन वस्त्रों को समय-समय पर ड्राई क्लीन करवाया जाता है, जिससे की कोई खराब न आए. तंबाकू के पत्तों में रखने से कपड़ों में ना तो कीड़े पड़ते हैं और ना ही उनकी चमक खराब होती है.

