नैनीताल के खूपी गांव में दरकते पहाड़, घरों में पड़ीं दरारें, भूस्खलन से खतरे में कई परिवार
गांव में हो रहे भूस्खलन से ग्रामीणों की करीब 100 नाली भूमि अब तक भूस्खलन में समा चुकी है

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 16, 2025 at 5:13 PM IST
|Updated : July 16, 2025 at 7:06 PM IST
नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल का खूपी गांव भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बनता जा रहा है. साल 2014 से गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है. जिसके चलते अब तक कई परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं. भूस्खलन के कारण गांव में लगातार बड़ी-बड़ी दरारें पड़ रही हैं. जिससे अब गांल के अस्तित्व पर खतरा मंजरा रहा है. इसके बावजूद भी अब तक शासन प्रशासन का ध्यान खुपी गांव के प्रभावितों की तरफ नहीं गया.
क्षेत्रीय निवासी मुन्नी देवी बताती हैं कि लगातार गांव में हो रहे भूस्खलन से ग्रामीणों की करीब 100 नाली भूमि अब तक भूस्खलन में समा चुकी है. गांव में हो रहे भूस्खलन से अधिकांश घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने लगी हैं. घरों में पड़ी दरार के चलते करीब आधा दर्जन से अधिक परिवार गांव छोड़कर दूसरे सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं.
स्थानीय महेंद्र प्रसाद बताते हैं 2011 गांव में भूस्खलन हो रहा है. गांव के सामने मंडरा रहे खतरे से निजात दिलाने को लेकर कई बार उन्होंने सरकारी नुमाइंदों समेत राजनेताओं से फरियाद लगाई, लेकिन अब तक उनकी फरियाद किसी ने नहीं सुनी. स्थानीय मुन्नी देवी बताती हैं कि मेहनत मजदूरी कर दो कमरों का घर बनाया जो अब भूस्खलन की जद में आ चुका है. घर में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं. उन्होंने कहा आज उनका घर खतरे में है. इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी और नेताओं ने उनकी सुध नहीं ली.

कई दशकों से गांव में हो रहे से नैनीताल के अस्तित्व पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है. खूपीगांव नैनीताल की तलहटी समेत बलिया नाले से लगता हुआ है. जिससे गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है. खूपी गांव के ठीक ऊपर आर्मी कैंट एरिया और आलूखेत गांव है. जिन पर सबसे ज्यादा भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है. मामले में नैनीताल एसडीएम नवाजिश खालिक ने बताया भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है. पूर्व में एक स्थान चिन्हित किया गया था जिसे भूगर्भीय दृष्टि से असुरक्षि घोषित किया है. दूसरा स्थान विभाग द्वारा चिन्हित किया जा रहा है.


