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मध्य प्रदेश में छिपा 5 रहस्य, बूंदों से भरता तालाब होगा UNESCO में शामिल?

मध्य प्रदेश में मौजूद है ऐतिहासिक धरोहर, 5 धरोहरों को UNESCO में की अस्थाई सूची में मिलेगी जगह, पढ़ें ऐतिहासिक दिलचस्प स्टोरी

MP 5 HISTORICAL HERITAGES
मध्य प्रदेश के 5 जगहों में छिपा रहस्य (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 8, 2025 at 5:13 PM IST

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Updated : July 8, 2025 at 5:25 PM IST

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भोपाल (ब्रिजेंद्र पटेरिया): मध्य प्रदेश के समृद्ध इतिहास की कहानियां आज भी ऐतिहासिक धरोहरें बताती हैं. प्रदेश की ऐसी ही कई ऐतिहासिक धरोहरें यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद विश्व स्तर पर चर्चा में आ चुकी हैं. अब प्रदेश की 5 धरोहरों को और यूनेस्को की अस्थाई सूची में जगह मिल सकती है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इन्हें अपने मापदंड के आधार पर इनका अध्ययन कर रही है. माना जा रहा है कि जल्द ही इन्हें अस्थाई सूची में शामिल किया जा सकता है.

यह 5 ऐतिहासिक धरोहर बढ़ाएंगी सम्मान

यूनेस्को ने इसी साल मार्च माह में मध्य प्रदेश की 4 ऐतिहासिक धरोहरों को अस्थाई सूची में शामिल किया था. इसमें सम्राट अशोक के शिलालेख, चौसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किलों को शामिल किया गया था. जबकि साल 2024 में ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला के रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार के ऐतिहासिक समूह को अस्थाई सूची में शामिल किया था.

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रायसेन का किला (ETV Bharat)

अब मध्य प्रदेश के 4 और स्थलों असीरगढ़ का किला, रायसेन का किला, छिंदवाड़ा का देवगढ़, धार के बाघ गुफाओं और ओबेदुल्लागंज के पास स्थित गिन्नौरगढ़ को शामिल किया जा सकता है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षक मनोज कुर्मी के मुताबिक राज्य सरकार ने इन 5 स्थानों को अस्थायी सूची के लिए चयनित किया है. अब इनको लेकर अध्ययन किया जा रहा है.

इसलिए खास है असीरगढ़ का किला

असीरगढ़ के किला का उल्लेख इतिहासकारों ने बाब-ए-दक्खन यानी दक्षिण के द्वार के रूप में किया है. बुरहानपुर से करीबन 20 किलोमीटर दूर स्थित इस किले का निर्माण 9वीं और 10वीं सदी में अहीर राजा असीराज ने कराया था. 1600 ईसवीं में मुगल सम्राट अकबर का इस पर कब्जा रहा. बाद में यहां मराठों ने शासन किया. इसके बाद अंग्रेजों का शासन रहा. इस किले की अद्भुत वास्तुकला पर्यटकों को आकर्षित करती है. सतपुड़ा की पहाड़ी पर स्थित यह किला तीन भागों असिर्गगढ़, कमरगढ़ और मलयगढ़ में बंटा है. असीरगढ़ के किले का उपयोग अंग्रेजों ने जेल के रूप में किया. 1857 में अंग्रेजों ने 3 क्रांतिकारियों को कैद में रखा था. बाद में उन्हें यही फांसी दी गई थी.

MP 5 HISTORICAL PLACE IN UNESCO
असीरगढ़ का किला (ETV Bharat)

पारस पत्थर के लिए हुए कई बार हमले

राजधानी भोपाल से करीब 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित रायसेन का किला इतिहास की कई कहानियों को अपने अंदर समेटे हुए हैं. इस किले ने राजाओं के हार के बाद रानियों का जौहर देखा तो पारस पत्थर के लालच में 14 से ज्यादा हमले भी झेले. 10वीं सदी में इसका निर्माण राजा परमार राय सिंह ने करवाया था. इस किले के द्वारों पर उस दौर की नक्काशियां आज भी दिखाई देती हैं. किले में उस दौर में कई छोटे-बड़े तालाब बनवाए गए थे, जो आज भी मौजूद हैं.

किले में बूंदों से भरता है तालाब

छिंदवाड़ा जिले में स्थित देवगढ़ का निर्माण 16वीं सदी में गोंड वंश के राजा जाटव ने करवाया था. करीब 600 मीटर ऊपर सतपुड़ा पर्वतमाला पर स्थित इस किले में मुगल और गोंडी जनजाति की कला शिल्प दिखाई देती है. किले में नक्कारखाना, संगीत गैलरी, मोतीटांका जैसे कई स्थल निर्मित किए गए थे. कहा जाता है कि मोतीटांका पास में स्थित झरने की बूंदों से भरता है. इस किले का उल्लेख बादशाहनामा और दूसरे मुगल साहित्य में भी होती रही है. देवगढ़ किले में एक दो नहीं, कई कुएं और बावड़ियां बनाई गई थीं.

DEOGARH FORT FILLS WITH DROPS
देवगढ़ का किला (ETV Bharat)

अजंता-एलोरो जैसी बाघ गुफाएं

धार जिले में स्थित बाघ गुफाओं को 5वीं और 6वीं शताब्दी में चट्टानों को काटकर बनाया गया था. यह गुफाओं का उपयोग बौद्ध भिक्षुओं द्वारा आराम करने के लिए किया जाता रहा है. आज भी यहां 5 गुफाएं संरक्षित की गई हैं. इन गुफाओं में चेतन्य हॉल में स्तूप को आज भी देखा जा सकता है. इन गुफाओं की तुलना अजंता और एलोरा गुफाओं से की जाती है. इन गुफाओं की खोज 1818 में डेन्जर फील्ड द्वारा की गई थी. इन गुफाओं का 416-17 ई. के एक ताम्र पात्र में भी मिलता रहा है. हालांकि बौद्ध धर्म के पतन के बाद इन गुफाओं में बाघों का निवास रहा होगा. इसलिए माना जाता है इसका नाम बाघ गुफाएं हो गया.

DHAR BAGH CAVES LIKE AJANTA ELLORA
अजंता-एलोरो जैसी बाघ गुफाएं (ETV Bharat)

किले के नीचे है जलाशय

भोपाल से 65 किलोमीटर दूर स्थित गिन्नौरगढ़ के किले के बारे में कहा जाता है कि यहां राजा गौंड अपनी 7 रानियों के साथ रहा करते थे. इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में गोंड राजा उदय वर्मन द्वारा कराया गया था. बाद में यहां गौंड, मुगल और पठानों ने भी शासन किया. गिन्नौरगढ़ की बावड़ी, इत्रदान और बादल महल आज भी अपनी भव्यता से लोगों को लुभाती है. इतिहासकारों की मानें तो किले के नीचे एक गुफा मौजूद है और इस गुफा में एक जलाशय मौजूद है.

Last Updated : July 8, 2025 at 5:25 PM IST