मरा हुआ बेटा 15 साल बाद लौटा घर, मां ने कहा- 'ये मेरा बेटा नहीं...'
मां ने बेटे को मृत समझकर 10 साल पहले पिंडदान कर दिया. उसी बेटे को जब मां ने देखा तो पहचानने से इनकार कर दिया.

Published : April 18, 2025 at 12:26 PM IST
भागलपुर: 15 साल के बाद मां और परिवारवालों से बिछड़े सागर मंडल दोबारा अपने परिवार से मिल सके हैं. यह करिश्माई घटना वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब और हैम रेडियो की कोशिश से संभव हो सका है. हैम रेडियो की कोशिश के कारण फिर से 15 साल बाद भागलपुर के मां और बेटे का मिलन हुआ है.
15 साल बाद मां से मिला लापता बेटा: बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर बंशीपुर पंचायत के महेशपुर देवरी गांव के रहने वाले स्वर्गीय बद्री मंडल का पुत्र सागर मंडल आज से करीब 15 साल पहले खेत से घर लौट के दौरान गायब हो गया था. उस वक्त सागर मंडल की उम्र करीब 11 वर्ष का बतायी जा रही है. अब वह घर अपनों के पास लौट आया है.
हैम रेडियो की मदद से लौटा घर: सागर के अचानक गायब होने के बाद मां झाझी देवी और परिवार सहित गांव वालों ने काफी खोजबीन की, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला. समय बीतता चला गया, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला. जिसके बाद थक- हार कर मां झाझी देवी ने खोजबीन करना बंद कर दिया. अब अचानक से हैम रेडियो के सदस्यों की मदद से वह घर लौट आया है.
हैम रेडियो के सदस्य तलाश रहे थे परिवार: ईटीवी भारत से फोन पर बातचीत में "हैम रेडियो" से जुड़े लोगों के संगठन "पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब" के सचिव अम्बरिश नाग बिस्वास ने बताया कि सागर मंडल के बारे में हम लोगों को 2019 में पता लगा. सागर मंडल का दिमागी संतुलन खो गया था. उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिला में धुलागढ़ ट्रक टर्मिनल के पास यह काफी वर्षों से रहता था.

"कई समाजसेवी संगठन व लोगों ने इसे अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचाया, लेकिन फिर वापस वहीं चला आता था. अचानक से एक दिन 2019 में रात में एक ट्रक के चपेट में आने से सागर मंडल घायल हो गया. घायल अवस्था में वह सड़क किनारे पड़ा हुआ था. तभी जगदीश जाना नाम के एक व्यक्ति ने उसे उठाकर हावड़ा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज चला."-अम्बरिश नाग बिस्वास, सचिव,पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब
'नाम पता बता नहीं पा रहा था सागर': अम्बरिश नाग बिस्वास ने बताया कि 2019 से अब तक हावड़ा अस्पताल में ही सागर इलाजरत रहे. 2020 में हम लोगों को सागर मंडल के बारे में पता चला. हमारे हैम रेडियो के सदस्यों ने सागर मंडल से काफी बातचीत करना चाहा. उससे नाम पता पूछता था, लेकिन वह बता नहीं पाते थे.

समाजसेवी के प्रयासों से मालूम हुआ पता: उन्होंने कहा कि सागर मंडल बातचीत करने की स्थिति में नहीं थे. धीरे-धीरे उनका इलाज हुआ. फिर 2025 में एक दिन सागर मंडल से मिलने समाजसेवी महिला आशा मांझी पहुंची. काफी प्रयास के बाद आशा मांझी को सागर मंडल ने अपना नाम पता और अपने पड़ोस के गांव का नाम बताया. तभी हम लोगों को जानकारी मिली कि सागर मंडल का गांव भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित बंशीपुर में है.

हैम रेडियो के सदस्य पहुंचे सागर के गांव: पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब के सचिव ने बताया कि उनके (सागर और समाजसेवी) बातचीत को रिकॉर्ड कर हम लोगों ने हैम रेडियो के माध्यम से प्रसारित किया. काफी दिनों तक इंतजार किया, लेकिन किसी से कोई संपर्क नहीं हो पाया. फिर हम लोग पता कर बिहार भागलपुर सागर मंडल के गांव पहुंचे. वहां के मुखिया से मिले और उनके माता झाझी को सागर मंडल के जीवित होने की जानकारी दी.
मां और भाई को नहीं हुआ यकीन: उन्होंने कहा कि सागर की मां झाझी देवी ने तो पहले बातचीत करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि मेरा बेटा अब जिंदा नहीं है. इतने दिनों तक वह वापस नहीं लौटा, आप लोग झूठ कह रहे हैं. लेकिन काफी समझाने बुझाने और लोकल थानेदार के कहने पर सागर की मां और बड़ा भाई प्रमोद मंडल तैयार हुए.
"तब जाकर उन्हें हम लोगों ने बंगाल आने के लिए कहा और कागजी प्रक्रिया पूर्ण कर बेटे को वापस ले जाने की बात कही. फिर वे लोग बंगाल हावड़ा सरकारी अस्पताल पहुंचे और सभी कागजी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद उन्हें वापस भेज दिया."-अम्बरिश नाग बिस्वास, सचिव,पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब
मां को सौंपा गया बेटा: रेडियो क्लब के सचिव अम्बरिश नाग बिस्वास ने बताया कि सागर मंडल को प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में उसके माता को सौंप दिया गया. सचिव अम्बरिश नाग बिस्वास ने बताया कि जब हम लोग सागर मंडल के गांव बंशीपुर पहुंचे तो गांव वालों को उसके जिंदा होने का यकीन नहीं हो रहा था.
10 साल पहले किया गया पिंडदान: उन्होंने कहा कि गांव वालों का कहना था कि सालों तक सागर मंडल के नहीं मिलने पर हिंदू रीति रिवाज के अनुसार 10 साल बाद अंतिम संस्कार कर क्रिया कर्म करते हुए पिंडदान कर दिया है. जब उन्हें फोटो दिखाया और बातचीत का ऑडियो सुनाया, तब जाकर लोगों को विश्वास हुआ. इसके बाद सभी लोग सागर मंडल को अपनाने के लिए तैयार हुए.

वज्रपात की चपेट में आने से पति की मौत: झाझी देवी बताती हैं कि पति बद्री मंडल की मौत तभी हो गयी थी, जब दोनों बच्चे छोटे थे. जानकारी दी कि एक दिन मेरे पति खेत में अकेले काम कर रहे थे. अचानक मौसम खराब हो गया और वज्रपात होने लगा. उसी वज्रपात की चपेट में आने से पति की मौत हो गई.
"तभी से बड़े बेटे प्रमोद मंडल और छोटे बेटे सागर मंडल को मेहनत मजदूरी कर पाल रही थी, लेकिन एक दिन खेत से लौटने के दौरान मेरा छोटा बेटा सागर मंडल गायब हो गया और फिर लौट कर वापस नहीं आया. अब 15 साल बाद फिर से बेटा सागर मंडल घर आ गया है. बहुत ही अच्छा लग रहा है."- झाझी देवी, सागर की मां
बेटे को गले लगाकर रो पड़ी मां: 11 साल का बेटा गायब हुआ और लौटा तो 26 साल का हो गया था. जब झाझी देवी अपने बेटे से मिलने बंगाल के हावड़ा अस्पताल पहुंची तो बेटे को देखते ही उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी थी. जिस बेटे को मरा समझ कर मां ने पिंडदान कर दिया था, उसे जिंदा देख वह अपने आंसू रोक नहीं पा रही थी और बेटे को गले लगा लिया.
सदस्यों ने घर लौटने के दिए पैसे: झाझी देवी के पास बेटे को घर लाने तक के पैसे नहीं थे. इसके लिए भी हैम रेडियो ने मदद की.उन्हें घर वापस आने का पैसा दिया. सागर मंडल के भतीजे प्रहलाद मंडल ने बताया कि वह जब छोटे थे, तभी चाचा जी को स्कूल जाते देखा था और खेत में काम करते देखा था. लेकिन वह एक दिन गायब हो गए.
"चाचा वापस घर नहीं लौटे. आज वह घर लौटे हैं, बहुत ही खुशी का माहौल है. परिवार का एक सदस्य 15 साल पहले गुम हो गया था. सालों बाद वापस लौटे हैं. सोशल मीडिया में हमने इनका फोटो डाला था, लेकिन नहीं मिले. इनको लाने के लिए दो-चार दिन पहले गए थे. चाचा का अभी भी इलाज चल रहा है."- प्रहलाद मंडल, सागर मंडल के रिश्तेदार

'तकनीक नहीं भावनात्मक सेवा': हैम रेडियो और वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के लगातार प्रयास से सागर मंडल 15 साल बाद अपने मां से मिल पाया है. हैम रेडियो के सचिव अम्बरिश नाग बिस्वास ने बताया कि हमारे लिए यह तकनीकी नहीं भावनात्मक सेवा है. जब कोई मां अपने खोए हुए बेटे को 15 साल बाद वापस पाती है तो वही हमारी असली सफलता है.
क्या है हैम रेडियो?: हैम रेडियो का इस्तेमाल खासतौर पर किसी आपदा, त्रासदी जैसे भूकंप, बाढ़, तूफान के वक़्त इस्तेमाल किया जाता है. जब संपर्क करने के सभी साधन फ़ेल हो जाते हैं तो, हैम रेडियो ही काम आता है. चाहे वो कोई भी दुर्गम जगह क्यों न हो, हैम रेडियो के रहते आप दूसरे व्यक्ति से सीधा संपर्क कर सकते हैं, जिसके पास हैम रेडियो रहता है. हैम रेडियो, शौकिया रेडियो या एमेच्योर रेडियो एक लाइसेंस प्राप्त रेडियो सेवा है. इसका इस्तेमाल, संदेशों के गैर-वाणिज्यिक आदान-प्रदान के लिए किया जाता है.

हैम रेडियो का उपयोग: हैम रेडियो आपदाओं के दौरान प्रयुक्त होने वाली संचार व्यवस्था है. हैम रेडियो आपदाओं के दौरान विशेष प्रकार के नियमों द्वारा Fi संचालित होता है, जिसका नियंत्रण भारत में संचार मंत्रालय के अधीन बेतार आयोजन एवं समन्वय स्कंध द्वारा किया जाता है. आपरेटर एमेच्योर सैटेलाइट के द्वारा हाथ वाले रेडियो सेट के साथ संवाद करने में सहायक होता है. केवल गैर वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए इसका उपयोग किया जाता है.
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