मुरैना में पत्थरों से लिपटी 700 साल पुरानी लोकतंत्र की निशानी, देखने दौड़े आते हैं सैलानी
मध्य प्रदेश के मुरैना में प्राचीन भवन में छुपी है भारतीय लोकतंत्र की जीवंत कहानी. गर्व कराता है 64 योगिनी का डिजाइन.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 27, 2025 at 4:30 PM IST
|Updated : September 27, 2025 at 4:59 PM IST
रिपोर्ट: पियूष श्रीवास्तव
मुरैना: चंबल अंचल पर्यटन की अपार संभावनाओं से घिरा है, लेकिन आप जानकर हैरान होंगे कि हमारे भारत के लोकतंत्र की पहली निशानी अंचल के मुरैना में मौजूद है, वह मंदिर जिसे देखने के बाद देश का संसद भवन बनाया गया. आइए पर्यटन दिवस 2025 के मौके पर आपको भी रूबरू कराते हैं उस स्थान से जहां से देश के पहले संसद भवन के डिजाइन की प्रेरणा ली गई.
ऊंची पहाड़ी पर स्थित है मंदिर समूह
मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में स्थित है 64 योगिनी मंदिर, जोकि मुरैना जिला मुख्यालय से करीब 27 किलोमीटर दूर है. मितावली गांव आज मध्य प्रदेश का पर्यटन ग्राम है. 300 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बना 64 योगिनी मंदिर अध्यात्म और आर्किटेक्चर का अद्भुत नमूना है. ये मंदिर लघु मंदिरों का एक समूह है, जहां 64 शिव मंदिर बने हुए है. ये मंदिर एक साथ मिलकर एक गोलाकार आकृति में दिखाई देते हैं. इनके ठीक बीच में मुख्य मंदिर स्थित है, जिसे इकत्तोरसों महादेव मंदिर कहा जाता है.
64 योगिनी मंदिर से ली गई थी पुराने संसद भवन की प्रेरणा
64 योगिनी मंदिर इसलिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है क्योंकि इसे देख कर ही दिल्ली का संसद भवन बनाया गया था. यही बात पर्यटकों को देश और विदेश से यहां खींच लाती है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख में संरक्षित इस हेरिटेज साईट को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भी रखा गया है.

1323 ईसवी में हुआ था निर्माण
पूरा मंदिर समूह पाषाण निर्मित है, जिसे 1323 ईस्वी में कच्छप घात राजा देवपाल देव ने बनवाया था. कहा जाता है वे बड़े शिव भक्त थे. और उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य के बीच ऊंची पहाड़ी के ऊपर मंदिर मठ के रूप में इन मंदिरों का निर्माण कराया था. पुरातत्व विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके रिटायर्ड पुरातत्व अधिकारी लाल बहादुर सिंह सोमवंशी बताते हैं कि "कई वर्षों पहले नागपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चंद्रशेखर गुप्ता मुरैना के मितावली में रिसर्च के लिए आए थे. यहां इकत्तोरसो मंदिर पहुंचे और शोध किया. उन्होंने अपनी शोध में पाया कि ये मंदिर योगिनियों का था. यहां बने 64 मठ में जबलपुर की तरह ही शिवलिंग के साथ योगिनियां भी थी."

चंबल बना पर्यटन का केंद्र
अब चंबल अंचल पर्यटन का केंद्र बन रहा है. मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग भी अब सैलानियों को इस क्षेत्र की पर्यटन संपदाओं को एक्सप्लोर कराने के लिए कदम आगे बढ़ा रही है. यही वजह है कि मितावली को पर्यटन ग्राम बनाया गया है. यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधाओं में इजाफा करते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने 4 होमस्टे भी शुरू किए हैं, जहां सैलानी ठहर कर चंबल के कल्चर को समझ सकते हैं और खान पान का लुत्फ उठा सकते हैं.
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मितवाली पर्यटन के लिहाज से मुरैना और चंबल के लिए महत्वपूर्ण स्थल है. दूर से ज्यादातर रिसर्चर और सैलानी संसद भवन की प्रेरणा 64 योगिनी मंदिर को देखने आते हैं. भले ही यह क्षेत्र बीहड़ में है लेकिन अब यहां आसानी से पहुचा जा सकता है. देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को मुरैना तक रेल सुविधा दी गई है. इसके अलावा पर्यटक मितावली तक सड़क मार्ग के जरिए बस या प्राइवेट वाहन से आसानी से पहुंच सकते हैं. आप भी एक बार जरूर इस जगह को एक्सप्लोर करें. यहां खड़े होकर भारत के संसद भवन की मूल प्रेरणा को देखना अपने आप में सुखद अनुभव देता है.

