मध्य प्रदेश में देहदान की लगी होड़, रतलाम मेडिकल कॉलेज में सैकड़ों ने कराया रजिस्ट्रेशन
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार की मुहिम लाई रंग, देहदानियों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित करने से नेत्रदान-अंगदान के रजिस्ट्रेशन में हुई वृद्धि.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 27, 2025 at 2:48 PM IST
रतलाम: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार के एक फैसले ने परोपकार की एक ऐसी राह खोली है कि अब प्रदेश में देहदान और अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता आ रही है. मध्य प्रदेश सरकार ने जब से देहदान और अंगदान करने वालों को गार्ड ऑफ ऑनर देने और उनके परिजनों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है. उसके बाद से देहदान, नेत्रदान और अंगदान के रजिस्ट्रेशन में वृद्धि हुई है.
रतलाम स्टेटस शासकीय मेडिकल कॉलेज में अब तक कुल 33 देहदान और 100 से अधिक नेत्र दान सम्पन्न हो चुके हैं. वहीं, बीते हफ्ते में ही 3 देहदान मेडिकल कॉलेज को प्राप्त हुए हैं. जिन्हें मध्य प्रदेश पुलिस प्रशासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया है. वहीं, देहदान और अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने की संख्या में भी इजाफा हुआ है.
देहदान-नेत्रदान करने वालों में इजाफा
रतलाम स्थित डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे शासकीय मेडिकल कॉलेज में जावरा के स्वर्गीय कनकमल कांठेड़ और रतलाम शहर की स्वर्गीय सुशीला दिवेकर के देहदान के उपरांत गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया था. इसके बाद उज्जैन जिले से भी स्वर्गीय देवी प्रसाद शर्मा का देहदान रतलाम मेडिकल कॉलेज में संपन्न हुआ है. देहदान, नेत्रदान और रक्तदान के लिए सामाजिक सेवा करने वाले गोविंद काकानी ने बताया कि "मध्य प्रदेश की मोहन सरकार के इस फैसले से लोगों में देहदान और अंगदान के प्रति जागरूकता आई है. वहीं, बीते दिनों रतलाम शहर और जावरा के देहदान और उन्हें मिले गार्ड ऑफ ऑनर के सम्मान ने लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया है. देहदान और नेत्रदान के रजिस्ट्रेशन में भी वृद्धि हुई है.

33 देहदान संपन्न, 168 ने करवाया रजिस्ट्रेशन
रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉक्टर अनीता मुथा ने बताया, "राज्य शासन का अंगदान और देहदान को बढ़ावा देने का फैसला लोगों को प्रेरित कर रहा है. रतलाम मेडिकल कॉलेज में एक हफ्ते में ही 3 देहदान संपन्न हुए हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश शासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है. इसके अलावा रतलाम में देहदान और अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन करने वालों में इजाफा हुआ है. रतलाम में अब तक 33 देहदान संपन्न हो चुके हैं जबकि 168 लोगों ने देहदान के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है. वहीं नेत्रदान के मामले में भी 100 से अधिक नेत्रदान अब तक संपन्न हुए हैं. 500 से अधिक लोग नेत्रदान के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं.''

इन्हें मिला गार्ड ऑफ ऑनर
जावरा निवासी 88 वर्षीय स्वर्गीय कनकमल कांठेड़ का निधन होने पर उनके परिजन ने देहदान कराने का निर्णय लिया. रतलाम पुलिस और प्रशासन ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया. इसके बाद रतलाम मेडिकल कॉलेज में उनके नेत्रदान और देहदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई गई. उन्हें जिले के पहले देहदानी होने का सम्मान भी प्राप्त हुआ है.
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रतलाम स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर रवि दिवेकर की माताजी सुशीला दिवेकर के निधन होने पर दिवेकर परिवार ने उनका नेत्रदान और देहदान संपन्न करवाया है. स्वर्गीय सुशीला दिवेकर को रतलाम शहर की पहली देहदानी होने का सम्मान प्राप्त हुआ. साथ ही रतलाम में पहली बार देहदानी को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया है.

