सुप्रीम कोर्ट में देश की पहली ट्रांसजेंडर वकील से खास बातचीत, तमाम चुनौतियों से लड़कर हासिल किया मुकाम
राघवी ने कहा, "मैं ट्रांसजेंडर समुदाय से भेदभाव और उनके अधिकारों के हनन के खिलाफ लड़ती हूं. अवेयरनेस कैंप भी लगाती हूं."

Published : March 7, 2025 at 3:47 PM IST
नई दिल्ली: हमारे समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को अभी भी अलग नजरों से देखा जाता है. उन्हें समाज का हिस्सा नहीं माना जाता. कई जगह भेदभाव का सामना करना पड़ता है. लेकिन इसके बावजूद भी इन लोगों में से कुछ प्रतिभाशाली लोग ऐसे भी हैं जो अपने जीवन में जो बनना चाहते थे जो करना चाहते थे वह उस मुकाम पर भी पहुंच चुके हैं. तमाम परेशानियों से लड़ते हुए उन्होंने समाज में अपनी एक पहचान बनाई है और यह ऐसी पहचान है कि उसके बल पर वह अपने समुदाय के दूसरे लोगों के काम भी आ रहे हैं.
ट्रांसजेंडर समुदाय में से एक ऐसी ही ट्रांसजेंडर राघवी हैं. राघवी अपने समुदाय के लोगों के लिए एक मिसाल हैं, जहां ट्रांसजेंडर्स के लिए जगह-जगह भेदभाव का शिकार करना पड़ता है. ऐसे में उन सभी चुनौतियों से लड़ते हुए राघव भी आज देश की पहली ट्रांसजेंडर बन गई हैं जो सुप्रीम कोर्ट में वकालत करती हैं. राघवी ने बताया कि मैं एकमात्र सुप्रीम कोर्ट में देश की पहली ट्रांसजेंडर एडवोकेट हूं.
भेदभाव, अधिकारों के हनन के खिलाफ लड़ाई: राघवी ने बताया कि मैं ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव और उनके अधिकारों के हनन के खिलाफ लड़ाई लड़ती हूं. उनको जागरूक करने के लिए वर्कशॉप्स और अवेयरनेस कैंप भी लगाती हूं. सरकार की कई एजेंसियों के साथ मिलकर के हम काम कर रहे हैं ताकि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के बीच में अपने अधिकारों और कानूनी जो सुविधा उन्हें सरकार के द्वारा मिलनी चाहिए उनके बारे में वह जान सके.
ट्रांसजेंडर समुदाय अधिकारों से वंचित: ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग आज भी बहुत से अधिकारों से वंचित हैं. मेरे इन कार्यों को देखते हुए ही आज मुझे माता अहिल्याबाई होल्कर महिला सम्मान से सम्मानित किया गया है. केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के हाथों से और नितिन गडकरी जी की उपस्थिति में सम्मानित होकर मैं बहुत गर्व महसूस कर रही हूं. इससे आगे बढ़ने की और काम करने की प्रेरणा भी मिली है.

राघवी ने डीयू के लॉ सेंटर से की कानून की पढ़ाई: दिल्ली में रहने वाली राघवी ने बताया कि मैंने अपनी एलएलबी की पढ़ाई डीयू के प्रतिष्ठित कैंपस लॉ सेंटर से पूरी की है. यह काफी प्रतिष्ठित जगह है. यहां देशभर से बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं. इन सबके बीच में एक ट्रांस ट्रांसजेंडर के तौर पर सरवाइव करना बहुत चुनौती पूर्ण रहता है कभी भी आपके साथ बुलिंग हो जाती है. कभी भी आपके साथ भेदभाव हो जाता है.
राघवी ने कहा कि डीयू के कैंपस लॉ सेंटर से देश के मौजूदा चीफ जस्टिस से लेकर पहले के भी तमाम चीफ जस्टिस निकले हैं. 2023 में मैंने अपनी लॉ की डिग्री पूरी करने के बाद जब प्रैक्टिस के लिए किसी सीनियर वकील के साथ जुड़ना चाहा तो बहुत समस्याएं सामने आईं. ट्रांसजेंडर होने की वजह से कई लोगों ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी. लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ हुआ और आज में अपने पैरों पर खड़ी हूं.
ट्रांसजेंडर्स को मिलना चाहिए आरक्षण: राघवी कहती हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव को दूर करने के लिए सरकार द्वारा उन्हें आरक्षण के दायरे में लाया जाना चाहिए. उनके लिए अलग टॉयलेट और अलग सुविधा मिलनी चाहिए. राघवी ने बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को दाखिले को लेकर और अपने किसी डॉक्यूमेंट को चेंज कराने के लिए बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा अगर वह किसी को अडॉप्ट करना चाहे तो एडॉप्शन में भी उनको बहुत समस्या आती हैं तो इन सभी चीजों में सुधार की जरूरत है.
राघवी ने बताया कि ट्रांसजेंडर्स या पुरुषों के साथ जोर जबरदस्ती होती है तो उसे भारतीय न्याय संहिता में कवर नहीं किया गया है. ये तो किसी के साथ भी हो सकता है, चाहे वह पुरुष हो चाहे महिला हो. ट्रांसजेंडर्स के साथ ऐसी घटनाएं होने का एक लंबा इतिहास है. बहुत सारे मामले उनके सेक्सुअल हैरेसमेंट के सामने आते रहते हैं. इन घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता और सख्त कदम उठाने की जरूरत है. इस तरह के पीड़ितों के मुद्दे में निशुल्क लड़ने का काम कर रही हूं.

