मंदसौर में रिटायर्ड प्रिंसिपल की अनोखी पहल, पालक चुकंदर और गोबर से बना दिया हर्बल गुलाल
मंदसौर में एक रिटायर्ड प्रिंसिपल ने प्राकृतिक मिट्टी, गाय के गोबर और हल्दी संग चुकंदर का प्रयोग कर हर्बल कलर तैयार किया.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 13, 2025 at 11:07 PM IST
मंदसौर: होली का पर्व रंगों के बिना फीका लगता है. इसलिए रंग-बिरंगे गुलाल में केमिकल का प्रयोग होने के बावजूद भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. इन रंगों के इस्तेमाल से आंख और त्वचा खराब होने का खतरा बना रहता है, लेकिन इन सब के बावजूद साल में एक बार होली पर्व आने के चलते लोग केमिकल से भरे रंगों का प्रयोग करने से खुद को नहीं रोक पाते हैं. ऐसे में रंगों के खतरों से बचने के लिए मंदसौर की एक रिटायर्ड प्रिंसिपल ने होली को सुरक्षित और हर्बल तरीके से मनाने का सिलसिला 10 साल पहले शुरू किया था. जो कि उनके द्वारा तैयार हर्बल कलर से होली खेलने का चलने अब तेजी से बढ़ रहा है.
रिटायर्ड प्रिंसिपल ने तैयार किया हर्बल कलर
फाल्गुन महीने की पूर्णिमा से शुरू होकर रंग तेरस, यानि 13 दिनों तक चलने वाले होली पर्व की शुरुआत हो गई है. गुरुवार से पूरे देश में 13 दिनों तक रंगों से होली खेलने का सिलसिला शुरू हो गया है. हालांकि, होली खेलने में प्रयोग किए जाने वाले रंग केमिकल युक्त होते हैं. फार्मेसी कॉलेज की रिटायर्ड प्रिंसिपल डॉक्टर अनुरेखा जैन ने हर्बल कलर तैयार किया है. इसकी पहल उन्होंने लगभग 10 साल पहले की थी.
प्राकृतिक मिट्टी और गाय के गोबर का प्रयोग
डॉक्टर अनुरेखा जैन ने कहा, "मैंने यह विधि बुजुर्गों और साहित्य में छिपे तथ्यों के आधार से सीखी है. पिछले कुछ सालों से इस विधि को आगे बढ़ते हुए नए निराश्रित बालिकाओं को जोड़ रही थीं. जिला प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने से यह काम बंद हो गया है. इसलिए हर्बल कलर बनाने की विधि धीरे-धीरे कम हो रही है. इसको तैयार करने में प्राकृतिक मिट्टी, गाय के गोबर और पत्तियों के पाउडर संग हल्दी, चुकंदर और पलाश का उपयोग किया जाता है."
हर्बल कलर की विधि सीखने के लिए इंदौर से पहुंची छात्रा
डॉ. अनुरेखा जैन की हर्बल कलर बनाने की विधि से प्रभावित होकर कई लड़कियां इसको बनाने की विधि सीख रही हैं. इंदौर से आई एक छात्रा वेदिका ने कहा, "मैंने सोशल मीडिया की साइट पर डॉक्टर अनुरेखा जैन को विजिट किया था. यह तरीका मुझे बहुत पसंद आया. कलर सीखने की विधि जानने के लिए उनके घर पहुंची हूं. ऐसा करके मुझे बहुत खुशी मिल रही है."
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प्राकृतिक कलर बनाने की विद्या को पुनर्जीवित करने के मामले में मंदसौर जिला प्रशासन ने भी डॉक्टर अनुरखा जैन की पहल को सराहा है. एडीएम एकता जायसवाल ने कहा, "डॉक्टर जैन ने इस परंपरा को जिंदा रखा है. मैं भी लोगों से अपील करती हूं कि वह होली में हर्बल कलर का ही उपयोग करें. ताकि परंपराओं के साथ प्राकृतिक तरह से होली मनाई जाए."

