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मैहर का मां शारदा धाम, जहां आज भी आल्हा-ऊदल की पूजा से होती है शुरुआत

मैहर स्थित मां शारदा धाम में आज भी सबसे पहले आल्हा-ऊदल करते हैं पूजा. यहां आस्था, इतिहास और रहस्य तीनों का दिखता है अद्भुत संगम.

MAIHAR MIRACLE TEMPLE
मैहर में स्थित मां शारदा धाम (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : September 30, 2025 at 5:13 PM IST

3 Min Read
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मैहर: मां शारदा धाम का नाम सुनते ही श्रद्धालुओं का सिर श्रद्धा से झुक जाता है. यहां केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और रहस्य तीनों का अद्भुत संगम दिखाई देता है. इस संगम का सबसे बड़ा हिस्सा है वीर आल्हा-ऊदल की अमर कथा, उनकी वीरता जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही उनकी मां शारदा के प्रति भक्ति भी प्रसिद्ध है.

आल्हा और मां शारदा का अमर रिश्ता

ऐसी किवदंती है कि वीर आल्हा ने करीब 12 साल तक कठोर तप कर मां शारदा से अमरत्व का आशीर्वाद पाया था. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आज भी प्रतिदिन मंदिर का पट खुलने से पहले ही आल्हा-ऊदल मां के दर्शन करते हैं. आल्हा ने भक्ति की पराकाष्ठा में अपना सिर और जीभ तक मां को अर्पित कर दिया था. जिन्हें माता ने तुरंत पुनर्जीवित कर दिया. तभी से आल्हा मां को स्नेहपूर्वक "माई" कहकर पुकारने लगे और यही संबोधन आगे चलकर "मां शारदा माई" की पहचान बन गया.

शारदा धाम में दिखता है आस्था, इतिहास और रहस्य तीनों का अद्भुत संगम (ETV Bharat)

रहस्यमय आल्हा तालाब और अखाड़ा

मां शारदा धाम मंदिर परिसर के पीछे स्थित पवित्र आल्हा तालाब आज भी इस कथा का साक्षी है कि आल्हा-ऊदल हर रात यहां स्नान कर फूल चढ़ाने के बाद माता के दर्शन करते हैं. यहां तालाब से कुछ दूरी पर स्थित आल्हा का अखाड़ा आज भी उनकी वीरता की गवाही देता है. यहां उनकी कुश्ती की गूंज और शौर्यगाथा लोकगीतों में जिंदा है.

maihar alha udal maa sharda dham
आल्हा-ऊदल की पूजा से होती है शुरुआत (ETV Bharat)

इतिहासकारों की खोज और अनसुलझे रहस्य

ब्रिटिश काल के प्रसिद्ध इतिहासकार ए. कनिंघम ने भी इस धाम का अध्ययन किया था. मंदिर परिसर से मिले 9वीं और 10वीं शताब्दी के शिलालेख आज तक पूरी तरह पढ़े नहीं जा सके हैं. विद्वानों का मानना है कि इन शिलालेखों में मां शारदा और आल्हा-ऊदल के रहस्यमय इतिहास की गहरी परतें छुपी हैं.

'श्रृंगार का रहस्य आज भी है अनसुलझा'

शारदा धाम के महंत पंडित सुमित महाराज ने कहा, "कई बार जब ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाते हैं तो मां का श्रृंगार पहले से ही सजा मिलता है. लोगों की मान्यता है कि यह श्रृंगार आल्हा स्वयं करते हैं. इस रहस्य को वैज्ञानिक भी समझने की कोशिश कर चुके हैं, मगर आज तक इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला."

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आल्हा की फाइल फोटो (ETV Bharat)

मां शारदा धाम केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि आस्था, भक्ति और रहस्य का केंद्र भी है. आल्हा-ऊदल की अमर कथाएं इसे और भी चमत्कारी बना देती हैं. यही कारण है कि नवरात्रि हो या साधारण दिन, हमेशा लाखों श्रद्धालु पहुंचकर अपनी आस्था अर्पित करते हैं.