जयपुर की केसर बनीं हिम्मत की मिसाल, 10 साल की उम्र में गंवाया हाथ, अब बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
एक सड़क हादसे में दायां हाथ खोने के बावजूद हौसला नहीं टूटा और 13 साल की केसर आज एक मिसाल बनकर सामने आई है.

Published : July 21, 2025 at 2:44 PM IST
जयपुर : राजधानी से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो ना सिर्फ लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि मुसीबत में भी उम्मीद नहीं टूटनी चाहिए. जयपुर के निजी स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्रा और महज 13 साल की केसर पारीक ने अपने हौसले और मेहनत से न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करवाया है. उन्हें अपनी इस कामयाबी का सर्टिफिकेट रविवार को हासिल हुआ. केसर अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देती हैं. उन्होंने कहा कि आगे जाकर वह एक कामयाब डांसर और सफल निशानेबाज बनकर अपनी प्रतिभा का लोहा साबित करना चाहती हैं. केसर ने यह भी बताया कि उन्हें स्केचिंग, पेंटिंग और ड्राइंग भी काफी पसंद है.
आंख पर पट्टी बांध खेला बैडमिंटन, बना रिकॉर्ड : केसर पिछले चार महीने से 'ABC : अ ब्रेन कोच' नाम के संस्थान में प्रवीण पारीक और निशा पारीक से मिडब्रेन एक्टिवेशन और सेंसरी एन्हांसमेंट प्रोग्राम की ट्रेनिंग ले रही है. इस ट्रेनिंग की वजह से वह इतनी सक्षम बन गई कि आंखों पर पट्टी बांधकर बैडमिंटन खेल सकीं. इसी वजह से उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया. यह उसकी दिमागी ताकत और एकाग्रता का सबूत है. केसर के पिता सुनील उनकी इस कामयाबी पर काफी खुश हैं. उन्होंने कहा कि वे अपनी बेटी को इसी तरह सफलता की राह पर आगे जाते हुए देखना चाहते हैं.
पढ़ें : हौसले को सलाम! 5 साल की उम्र में दोनों हाथ गंवाए, लेकिन हिम्मत नहीं, अब IAS बनना है पायल का सपना
10 साल की उम्र में हादसा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी : केसर पारीक की मां नंदा पारीक ने बताया कि उनका जीवन 10 साल की उम्र में ही एक भयानक हादसे से पूरी तरह बदल गया. इस हादसे में उसने अपना दायां हाथ खो दिया, जिससे वह पढ़ाई करती थी, लिखती थी और अच्छी ड्रॉइंग बनाती थी. ऐसे हादसे से कोई भी बच्चा टूट सकता है, लेकिन केसर की मां की हिम्मत और साथ उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई. मां ने कभी उसे हार मानने नहीं दी, हर वक्त साथ रहीं और कहा 'तू सब कर सकती है'.

पढे़ं : बिना हाथों के परसाराम क्रिकेट के मैदान में लगा रहे चौके-छक्के, जज्बा देख हो जाएंगे हैरान
बाएं हाथ से सीखा लिखना और बन गईं कलाकार : हाथ के कटने के बाद भी केसर ने बाएं हाथ से लिखना और ड्रॉइंग बनाना सीख लिया. आज वह इतनी अच्छी तस्वीरें बनाती है कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं. उसकी कला, सिर्फ रंगों की तस्वीर नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और आत्मविश्वास की कहानी है. केसर की मां नंदा के मुताबिक जल्द उनके नाम ब्लाइंड फोल्ड बैडमिंटन को लेकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का आने वाला है.

डांस और शूटिंग में भी किया कमाल : केसर सिर्फ ड्रॉइंग ही नहीं करती, बल्कि डांस और शूटिंग जैसे खेलों में भी बहुत आगे है. वह बहुत अच्छी डांसर है और जब स्टेज पर डांस करती है तो लोग तालियां बजाते नहीं थकते. इसके साथ ही, केसर ने 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग में भी शानदार प्रदर्शन किया और स्टेट स्तर से पहले वाली प्रतियोगिता में चयनित हो गई हैं. नंदा पारीक बताती हैं कि उनका लक्ष्य है कि आप उनकी बेटी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए शूटिंग में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करें.

मां-बेटी की प्रेरणादायक जोड़ी : केसर की मां नंदा ने इस पूरी कहानी में सबसे अहम किरदार निभाया है. उन्होंने केसर को सिर्फ सहारा नहीं दिया, बल्कि हर तकलीफ से लड़ना और हार को जीत में बदलना सिखाया. अपनी बेटी के साथ हुए हादसे को लेकर उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें लगा कि जीवन में सब कुछ रुक गया है. ऐसे में उन्हें पॉजिटिव थिंकिंग और सकारात्मक माहौल ने आगे बढ़ने की सीख दी. वह बताती हैं कि सभी को इस तरह के हादसों से टूटने की जगह मजबूत बनकर उभरना चाहिए. आज मां-बेटी की ये जोड़ी लोगों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन चुकी है. साथ ही केसर पारीक हिम्मत, उम्मीद और मेहनत की पहचान बन चुकी है.

