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राज्य शिक्षक पुरस्कार; बिकरू गांव के राजन लाल ने नवाचार से किया कमाल, सम्मानित करेगी योगी सरकार

सहायक अध्यापक राजन लाल ने 35 से अधिक नवाचार किए हैं. गांव में निशुल्क लाइब्रेरी की स्थापना भी की है.

बच्चों के बीच सहायक अध्यापक राजन लाल.
बच्चों के बीच सहायक अध्यापक राजन लाल. (Photo Credit : ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 1, 2025 at 9:39 AM IST

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कानपुर : कहावत है कि हर एक छोटा बदलाव एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है. कुछ ऐसा ही बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में कानपुर बिकरू गांव के सहायक अध्यापक राजन लाल ने कर दिखाया है. राजन लाल ने सूने-वीरान पड़े सरकारी स्कूल को सजाया संवारा और बच्चों को अपने अनोखे नवाचार से पढ़ाया. नतीजतन उनका नाम राज्य अध्यापक पुरस्कार की सूची में जुड़ गया है. राजन लाल को यह पुरस्कार और सम्मान उनके 35 से अधिक नवाचारों के लिए दिया गया है. इस कड़ी में 5 सितंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ के द्वारा सम्मान पत्र मिलेगा. राजन लाल ने राज्य अध्यापक पुरस्कार मिलने का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को दिया है.

कानपुर बिकरू गांव के राजन लाल के मिलेगा राज्य शिक्षक पुरस्कार. देखें पूरी खबर (Video Credit : ETV Bharat)


ईटीवी भारत से बातचीत में मूलरूप से बिकरू गांव के रहने वाले राजन लाल ने बताया कि पहली नियुक्ति 17 जनवरी 2003 को प्राथमिक विद्यालय बंसथी प्रथम विकासखंड-चौबेपुर में सहायक अध्यापक के रूप में हुई थी. मैं विद्यालय पहुंचा तो छात्रों की संख्या बेहद कम थी. कुछ बच्चे आते थे, लेकिन उनमें पढ़ाई को लेकर कोई उत्साह नहीं था. ऐसे में चुनौती बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के साथ उन्हें शैक्षिक वातावरण से जोड़ने की थी. इसके लिए अभिभावकों से संपर्क करने के साथ नवाचारों का प्रयोग शुरू किया. यूनिफॉर्म में आने वाले बच्चों को स्टार ऑफ द डे के रूप में चयनित कर सम्मानित करना शुरू किया तो बच्चों की संख्या बढ़ने लगी. पुरस्कार स्वरूप कॉपी, पेन बैग मिलने से बच्चों में स्कूल आने की उत्सुकता बढ़ी. अब विद्यालय में 152 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.

गांव में खोली निशुल्क लाइब्रेरी.
गांव में खोली निशुल्क लाइब्रेरी. (Photo Credit : ETV Bharat)
बालिका शिक्षा के लिए बढ़ाया हाथ.
बालिका शिक्षा के लिए बढ़ाया हाथ. (Photo Credit : ETV Bharat)


सहायक शिक्षक राजन लाल के मुताबिक वे हमेशा विद्यालय में 30 मिनट पहले ही पहुंच जाते थे. साथ ही स्कूल को साफ सुथरा और स्मार्ट क्लास की दिशा में काम शुरू किया. दो स्मार्ट क्लासेस में टीवी, लैपटॉप की व्यवस्था की गई. बच्चों की यूनिफॉर्म आदि पर अपने वेतन से खर्च किया. इसमें पत्नी ने भी सहयोग किया. इसके अलावा कुछ अभिभावकों ने मदद को हाथ बढ़ाया. इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गांव में निशुल्क लाइब्रेरी की स्थापना कराई. लाइब्रेरी में 10th से आगे की पढ़ाई के साथ बीएससी, एमएससी व प्रयोगात्मक परीक्षाओं की तैयारियों से जुड़ी पुस्तकें रखी गईं.

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