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सूअरों में जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस की पुष्टि, सरगुजा में 61 सैंपल पॉजिटिव, इंसानों के लिए जानलेवा है जापानी बुखार

सूअरों में पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया गया है.

Japanese encephalitis virus in Surguja
सूअरों में जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस की पुष्टि (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : October 5, 2025 at 11:25 AM IST

3 Min Read
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सरगुजा: जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है. पशु विभाग द्वारा जिले भर से जुटाए गए 120 सूअरों के सैंपल में से 61 सैंपल पॉजिटिव पाए गए है. JE वायरस की पुष्टि होने के बाद पशु चिकित्सा विभाग के साथ ही सरगुजा स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह एक जानलेवा बीमारी है जिसे जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है और यह मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारी है. यदि जापानी इंसेफेलाइटिस से संक्रमित सुकर को काटने के बाद मच्छर ने इंसान को काट लिया तो यह इंसान में भी फैल जाती है.

सरगुजा में 61 सैंपल पॉजिटिव, इंसानों के लिए जानलेवा है जापानी बुखार (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

चेतावनी जारी: जापानी इंसेफेलाइटिस के संदेह पर सरगुजा जिले के अंबिकापुर, लुंड्रा, बतौली, सीतापुर, मैनपाट क्षेत्र से 120 सूअरों के सैंपल लिए गए थे. सैंपल को जांच के लिए ICAR निवेदी बेंगलुरु भेजा गया था. इस दौरान जांच में कुल 61 सैम्पल में जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस की पुष्टि हुई है. जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पशु चिकित्सा विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर चेतावनी जारी की गई है. SOP का पालन करते हुए सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि पशु चिकित्सा विभाग का कहना है इससे जानवरों को कोई खास नुकसान नहीं होता लेकिन इंसानों के लिए यह घातक है.

सरगुजा से सूअरों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था. जांच रिपोर्ट में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है. कुल 61 केस मिले हैं, हमारी तरफ से स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया गया है और सावधानी बरतने को कहा गया है- उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आरपी शुक्ला

क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस: जापानी इंसेफेलाइटिस मच्छर से फैलने वाला विषाणु जनित रोग है. यह सीधे तौर पर इंसान के मस्तिष्क को प्रभावित करता है और मस्तिष्क में सूजन पैदा करता है. यह गंभीर लेकिन टीका-रहित बचाव योग्य रोग है. आम तौर पर बारिश के समय मच्छर बढ़ते हैं. ऐसे में यदि कोई मच्छर JE से संक्रमित सूकर को काटता है और फिर वही मच्छर इंसान को काटता है तो यह बीमारी इंसान को हो जाती है लेकिन यह एक इंसान से दूसरे इंसान को नहीं फैलती है.

यह जानवरों से मच्छर के माध्यम से इंसानों में फैलता है. यह मनुष्य के मस्तिष्क को प्रभावित करता है. जेई का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं है. बच्चों को इस बीमारी से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है. लोग अपने आस पास सफाई रखें और मच्छर को पनपने से रोके, मच्छरदानी का उपयोग करें, किसी भी प्रकार के लक्षण नजर आने पर चिकित्सक से सम्पर्क करें- ऐपेडेमिक नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता

इस वायरस का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों में होता है. उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में जापानी इंसेफेलाइटिस या जापानी बुखार के कारण बड़ी संख्या में छोटे बच्चों की मौत होती है. हालांकि सरगुजा में अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है. चिंता की बात यह है कि इस वायरल का कोई अलग से इलाज नहीं है.

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