ETV Bharat / state

काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद जयपुर की इस हवेली में ठहरे थे 'आजाद', नहीं पकड़ पाए थे अंग्रेज

हिडन जेम्स ऑफ राजस्थान सीरीज पार्ट-3 में जानिए राजवैद्य पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल की हवेली के बारे में, जहां मेहमान बनकर ठहरे थे चंद्रशेखर आजाद...

पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल की हवेली
पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल की हवेली (ETV Bharat Jaipur)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 8, 2025 at 6:34 AM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

जयपुर : राजस्थान के महल-हवेलियां अपने भीतर कई इतिहास समेटे हुए हैं. इनमें से कई हवेलियों को तो संरक्षित किया गया, लेकिन कई हवेलियां जर्जर अवस्था में हैं. इनकी कोई सुध नहीं ले रहा. इन्हीं में से एक ऐसी हवेली भी है, जहां स्वत्रंतता सेनानी चंद्रशेखर आजाद अंग्रजों से बचने के लिए ठहरे थे. भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद का नाम साहस, बलिदान और अटूट देश भक्ति का प्रतीक है. जब-जब देश की आजादी की बात होती है तब-तब उनका नाम सम्मान और गर्व से लिया जाता है, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि क्रांतिकारी गतिविधियों के दौरान चंद्रशेखर आजाद देश के कई हिस्सों में अंग्रेजी हुकूमत से बचते हुए ठहरे थे. इन्हीं में से एक ठिकाना उनका जयपुर में भी रहा है, जहां आजाद करीब 2 महीने तक एक हवेली में मेहमान बनकर रहे थे.

यह हवेली जयपुर रियासत के राजवैद्य पंडित मुक्तिनाथ नारायण शुक्ला की थी, जहां चंद्रशेखर आजाद उनके मेहमान बनके ठहरे थे. उस वक्त जयपुर में महाराजा मानसिंह द्वितीय की हुकूमत थी. जयपुर रियासत के राजवैद्य पंडित मुक्ति नारायण सिंह शुक्ल की जौहरी बाजार और बाबा हरिशचंद्र मार्ग स्थित शिवनारायण मिश्र की गली में पुश्तैनी हवेली थी और इसी हवेली में महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ठहरे थे. यह वो दौर था जब काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत चंद्रशेखर आजाद के पीछे पड़ गई थी, तब अंग्रेजी हुकूमत से बचने के लिए आजाद ने कई शहरों में अस्थाई शरण ली थी.

पढ़ें. 'खासा कोठी' का अनसुना इतिहास, यहां कभी रुकती थी महाराजा की शाही ट्रेन

गणेश शंकर विद्यार्थी के कहने पर दी थी पनाह : जयपुर रियासत के राजवैद्य मुक्ति नारायण शुक्ल क्रांतिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के अभिन्न मित्र थे. इन्ही के अनुरोध पर उन्होंने चंद्रशेखर आजाद को अपनी हवेली में अपना रिश्तेदार बताकर पनाह दी थी. पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल भले ही जयपुर रियासत के राजवैद्य थे, लेकिन वो हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे. इसी दल से भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद भी जुड़े हुए थे. जयपुर रियासत के राजवैद्य होने के चलते पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल का जयपुर रियासत में अच्छा प्रभाव था. अंग्रेजी हुकूमत के भी जयपुर रियासत से अच्छे संबंध थे, इसलिए मुक्ति नारायण शुक्ल पर कोई संदेह नहीं करता था. पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल के बेटे अवधेश नारायण शुक्ल ने इस पूरे घटनाक्रम का उल्लेख अपनी किताब सत्यमेव जयते में किया है.

पढ़ें. Explainer on Open Jail : ...यहां सजा काट रहे कैदी संवार रहे अपना 'कल', हुनर को काम तो बच्चों को मिल रही शिक्षा

भेष बदलकर भी जयपुर में घूमते थे आजाद : अवधेश नारायण शुक्ल की किताब सत्यमेव जयते के मुताबिक चंद्रशेखर आजाद करीब 2 महीने तक मेहमान बनकर इस हवेली में रहे थे, लेकिन जब भी वो हवेली से बाहर निकलते थे तो अपना भेष बदलकर निकलते थे. चंद्रशेखर आजाद संस्कृत के छात्र थे और वे कई बार हवामहल के सामने स्थित संस्कृत स्कूल के विद्यार्थियों से भी मिलते थे और उनसे संवाद करते थे. दरअसल, मुक्ति नारायण शुक्ल की बाबा हरिशचंद्र मार्ग स्थित हवेली क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना थी. चंद्रशेखर आजाद के अलावा कई और क्रांतिकारी भी यहां पर शरण लेते थे.

पढ़ें. जयपुर में होता है मूंगा को तराशने का काम, समुद्र की गहराइयों से शुरू होती है चमकदार जर्नी

परिवार रात भर देता था पहरा : पंडित मुक्ति नारायण शुक्ला की पत्नी कल्याणी देवी और उनका परिवार क्रांतिकारियों की गुप्त मदद भी करते थे. कई बार वे मिठाइयों और साड़ियों में हथियार लपेटकर क्रांतिकारियों तक पहुंचाते थे. कहा यह भी जाता है कि भगत सिंह ने लाहौर में जिस रिवाल्वर से सांडर्स की हत्या की थी, वो रिवाल्वर भी यहीं से पहुंची थी. वहीं, चंद्रशेखर आजाद जब तक हवेली में मेहमान बनकर ठहरे थे तब तक शुक्ल परिवार इस हवेली में पहरा देता था. रात में भी कल्याणी देवी और उनके बेटे हथियार लेकर हवेली की पहरेदारी करते थे. जरा संदेह होने पर तुरंत चंद्रशेखर आजाद को हवेली के गुप्त तहखाना में छिपा दिया जाता था.

यह हवेली जयपुर रियासत के राजवैद्य की थी
यह हवेली जयपुर रियासत के राजवैद्य की थी (ETV Bharat Jaipur)

पढ़ें. जयपुर का मोहल्ला महावतान: राजशाही के दौर से चला आ रहा हाथी पालने का काम, अब हो रही परेशानी

मुखबिर से ब्रिटिश हुकूमत को मिली थी सूचना : हवेली के पास ही रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गुप्ता का कहना है कि चंद्रशेखर आजाद के पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल की हवेली में ठहरने की सूचना ब्रिटिश हुकूमत को एक व्यक्ति की मुखबिरी से मिली थी. जयपुर रियासत के मुखबिरों से पंडित मुक्तिनारायण शुक्ल को भी इसकी जानकारी मिल गई थी कि ब्रिटिश हुकूमत कभी भी उनकी हवेली पर छापामारी कर सकती है. उन्होंने तुरंत अपने विश्वस्त लोगों से चंद्रशेखर आजाद के पास संदेश पहुंचाया और हवेली छोड़ने को कहा. हालांकि, गफलत में ब्रिटिश पुलिस ने बाबा हरिशचंद्र मार्ग की बजाए शुक्ल परिवार की जौहरी बाजार स्थित हवेली पर छापेमारी की, जहां उन्हें कोई नहीं मिला.

दो माह तक मेहमान बनकर ठहरे थे चंद्रशेखर आजाद
दो माह तक मेहमान बनकर ठहरे थे चंद्रशेखर आजाद (ETV Bharat Jaipur)

पढ़ें. रियासत काल में इस मोहल्ले में पाले जाते थे हिरण और बारहसिंगे, परिवार के लोग जानवरों को करते थे ट्रेंड

साइकिल को याद की तौर पर रखा : ब्रिटिश पुलिस बाबा हरिशचंद्र मार्ग वाली हवेली पर पहुंचती इससे पहले ही चंद्रशेखर आजाद हवेली के एक कमरे की खिड़की तोड़कर नीचे कूद गए. इसके बाद पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल के 14 वर्षीय बेटे अवधेश नारायण शुक्ल के साथ साइकिल से परकोटे की तंग गलियों में से होते हुए पहले घाटगेट पहुंचे और उसके बाद कानोता और बस्सी रेलवे स्टेशन पहुंचे. यहां पर चंद्रशेखर आजाद ने ट्रेन पकड़ी और इलाहाबाद के लिए निकल गए. इसके बाद अवधेश नारायण शुक्ल साइकिल लेकर वापस हवेली पहुंच गए. आजादी के लंबे वक्त बाद शुक्ल परिवार ने इस साइकिल को आजाद की याद के तौर पर इस हवेली में रखा था. जब परिवार इस हवेली से गया तो साइकिल भी अपने साथ ले गया था.

कई क्रांतिकारियों ने ली थी पनाह
कई क्रांतिकारियों ने ली थी पनाह (ETV Bharat Jaipur)

पढ़ें. 'मांडना' को संवारने आगे आईं बाड़मेर की बेटियां, परंपरा की 'कूची' से सहेज रही विरासत

आज जर्जर अवस्था में हवेली : दरअसल, जयपुर की इस हवेली में शरण लेने वाले क्रांतिकारी नाहरगढ़ की पहाड़ियों जाकर रिवाल्वर और अन्य हथियारों से फायरिंग की प्रैक्टिस करते थे. इसके अलावा रामगढ़ बांध के पास जंगलों में भी फायरिंग की प्रैक्टिस की जाती थी. कभी चंद्रशेखर आजाद और कई क्रांतिकारियों की आश्रय स्थली रही पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल की हवेली, आज जर्जर अवस्था में है. कई जगह से कमरे और दीवारें जर्जर हो चुकी हैं. बाबा हरिशचंद्र मार्ग के आसपास रहने वाले लोग आज भी जब इस हवेली के सामने से गुजरते हैं तो उन क्रांतिकारियों को याद करते हैं, जिन्होंने यहां पर पनाह ली थी. यह हवेली भले ही आज वीरान खड़ी हो, लेकिन आज भी वो कमरे और दीवारें इस अतीत को अपने अंदर समेटे हुए हैं. चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर कई बार यहां पर जयपुर के प्रबुद्ध लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करके उन्हें श्रद्धांजलि भी दी है.

आज जर्जर अवस्था में है हवेली
आज जर्जर अवस्था में है हवेली (ETV Bharat Jaipur)

आजादी के आंदोलन का जब भी जिक्र आता है तब जयपुर में इस हवेली का जिक्र जरूर होता है. यह हवेली हमारी ऐतिहासिक धरोहर है, लेकिन फिलहाल जर्जर है. सरकार को इस हवेली का पुनरुद्धार कर इसके बारे में आम जन को बताना चाहिए. : जितेंद्र सिंह शेखावत, वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार