महर्षि सुश्रुत आयुर्विज्ञान के नाम से जानी जाएगी मेडिकल यूनिवर्सिटी, 76 स्टूडेंट्स को मिला गोल्ड
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के नए नाम महर्षि सुश्रुत आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की घोषणा की. स्थानीय भाषाओं में भी हो रही है पढ़ाई.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 3, 2025 at 5:59 PM IST
जबलपुर: मध्य प्रदेश में मेडिकल की शिक्षा देने वाली यूनिवर्सिटी अब महर्षि सुश्रुत के नाम से जानी जाएगी. मध्य प्रदेश के आयुविज्ञान विश्वविद्यालय का नाम महर्षि सुश्रुत आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर कर दिया गया है. शनिवार को जबलपुर में इस विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया था. इसमें 76 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया.
राज्यपाल ने नए नाम की घोषणा की
मध्य प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज को एफिलिएशन देने वाले आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में शनिवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया. इस आयोजन में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल शामिल हुए. राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस मौके पर मध्य प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की घोषणा की. अब इस यूनिवर्सिटी को महर्षि सुश्रुत आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाएगा.
32 हजार स्टूडेंट्स को मिली उपाधि
इस दीक्षांत समारोह में मेडिकल यूनिवर्सिटी में चलने वाले अलग-अलग कोर्सों में पूरे प्रदेश में अव्वल आने वाले 76 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल दिया गया और कुल मिलाकर 32 हजार छात्र-छात्राओं की उपाधि को अनुमति दी गई.
लाखों छात्र कर रहे हैं अध्ययन
जबलपुर का महर्षि सुश्रुत आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय एमबीबीएस, एमडी, एमएस, बीडीएस, एमडीएस, बीएससी, नर्सिंग, फिजियोथैरेपी, बीएएमएस, आयुर्वेद में पोस्ट ग्रेजुएट, बीएचएमएस, बीपीटीएस, बीएमएलटी, बीएक्सआरटी, एमएमएलटी, बीएएसएलटी और बीयूएमएस कराने वाले कॉलेजों को मान्यता देता है. इस यूनिवर्सिटी के तहत लाखों छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं. इन छात्र-छात्राओं के लिए पाठ्यक्रम निर्धारण करना और उनकी परीक्षाएं करवाना विश्वविद्यालय का काम है.

स्थानीय भाषाओं में भी हो रही है मेडिकल की पढ़ाई
इस मौके पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष डॉ. बी गंगाधर राव भी जबलपुर आए थे. उन्होंने बताया कि "मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी और दूसरी स्थानीय भाषाओं में भी कराई जा रही है. इसके लिए लगातार काम चल रहा है. पुस्तकों का अनुवाद किया जा रहा है. इस कार्य में सभी को मिलजुल कर काम करना होगा और मेडिकल की किताबों को ट्रांसलेट करने के बाद अध्ययन में जो परिवर्तन आ रहा है, उस पर भी हमें ध्यान देना होगा."
महापौर ने की एम्स की मांग
इस आयोजन में शामिल जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अनु ने मंच से मांग की है कि "जबलपुर की मेडिकल सुविधाओं को और आगे बढ़ाते हुए यहां ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (एम्स) की स्थापना की जानी चाहिए."

6 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की होगी स्थापना
इस आयोजन में शामिल मध्य प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि "आने वाले 3 सालों में मध्य प्रदेश में 6 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना होने जा रही है. इसके साथ ही उन्होंने 12 जिलों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप स्कीम के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की नीति बनाई है. मध्य प्रदेश में फिलहाल एमबीबीएस की 5 हजार सीटें हैं, जिन्हें 2 गुना करने का लक्ष्य है."
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ग्रामीण इलाकों में सेवा मुहैया कराने की अपील
जबलपुर में यह आयोजन घंटा घर के नवनिर्मित कन्वेंशन सेंटर पर हुआ. इस आयोजन में सभी छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाई गई. इस मौके पर राज्यपाल और दूसरे वक्ताओं ने भी चिकित्सा शिक्षा पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे लोग ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं दें और गरीबों को सस्ता इलाज मुहैया कराएं.

