हरिद्वार भूमि घोटाला मामला, करोड़ों में खरीदी गई कौड़ियों की जमीन, जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें
हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाला मामले की जांच लगभग पूरी हो गई है. जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : May 16, 2025 at 8:02 PM IST
|Updated : May 16, 2025 at 11:01 PM IST
(किरणकांत शर्मा) देहरादून: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में एक जमीन की चर्चा बीते कई दिनों से चल रही है. यह जमीन चर्चा में इसलिए आई क्योंकि जिस जमीन के कोई हजारों रुपए देने के लिए तैयार नहीं था, उस जमीन को कुछ अधिकारियों ने नगर निगम के लिए करोड़ों रुपए में खरीद लिया. मामला इतना उठा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंच गया. जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दिए. इस मामले में अब तक चार कर्मचारियों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है. इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह की मानें तो जांच लगभग पूरी हो गई है और जल्द ही शासन को यह जांच सौंप दी जाएगी.
क्या था पूरा मामला: मामला साल 2024 का है. उस दौरान राज्य में निकाय चुनाव हो रहे थे. नगर निगम का पूरा प्रबंधन नगर आयुक्त के पास था. उस दौरान हरिद्वार नगर निगम में तैनात वरुण चौधरी नगर आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. इस दौरान नगर निगम ने हरिद्वार के सराय स्थित 33 बीघा जमीन को खरीदा. हालांकि, 33 बीघा जमीन को किस उद्देश्य से खरीदा गया? ये अभी तक स्पष्ट नहीं है. खैर जमीन खरीदने तक तो मामला सब कुछ सही था. लेकिन जिस जगह यह जमीन थी, उस जगह या कहे उसके आसपास पहले से ही नगर निगम कूड़ा डंप करने का काम कर रहा था. ऐसे में जिस जमीन की कीमत मामूली थी, उस जमीन को नगर निगम ने सरकारी बजट से 58 करोड़ रुपए में खरीद लिया. किसी को यह मालूम नहीं था कि आखिरकार कौड़ियों के दाम बिकने वाली जमीन को क्यों इतने पैसे देकर खरीदा गया?

इसके बाद हरिद्वार नगर निगम के चुनाव हुए और नगर निगम की कुर्सी पर बीजेपी उम्मीदवार बैठ गईं. धीरे-धीरे यह मामला सार्वजनिक हुआ और बात इतनी तेजी से शहर में फैली कि विपक्ष समेत स्थानीय लोगों ने भी इस पर खुलकर चर्चा करनी शुरू कर दी. मामला इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक यह अनियमितता और अधिकारियों की कारगुजारी पहुंच गई.

अभी तक हुई इनके खिलाफ कार्रवाई: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए और आईएएस रणवीर सिंह चौहान को जांच अधिकारी नियुक्त किया. शुरुआती कुछ घंटे की जांच में यह साफ हो गया कि आखिरकार कैसे कृषि भूमि को 6 दिनों के भीतर लैंड यूज परिवर्तन करके उसे कमर्शियल कर दिया गया. इतना ही नहीं, पहले दिन की जांच में यह स्पष्ट हो गया कि जमीन की खरीद फरोख्त में नीचे से लेकर ऊपर तक लापरवाही बरती गई है. मुख्यमंत्री ने गंभीरता को देखते हुए तत्काल नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल और अधिशासी अभियंता आनंद सिंह, राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और जय दिनेश चंद्र कांडपाल को निलंबित कर दिया. जबकि वित्तीय अधिकारी निकिता बिष्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.

जांच में आया सामने: शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि आखिरकार जिस जमीन का लैंड यूज बदल गया, उसकी कृषि भूमि रहते हुए कीमत लगभग 15 करोड़ से भी कम थी. लेकिन लैंड यूज चेंज करते ही भूमि की कीमत 58 करोड़ रुपए हो गई. साल 2024 के अक्टूबर महीने में जमीन की अदला-बदली का खेल खेला गया. इतना ही नहीं, तत्काल जमीन मालिक को पेमेंट भी सरकारी खाते से कर दिया गया. जिस वक्त जमीन की अदला बदली हुई उस वक्त हरिद्वार में एसडीएम पद पर जयवीर सिंह तैनात थे. जांच में यह भी सवाल उठाए गए हैं कि आखिरकार कैसे जमीन का लैंड यूज चेंज कर दिया गया. जबकि आम आदमी का यह काम महीनों तक नहीं होता. अनियमितता इस बात की भी सामने आ रही है कि आखिरकार बिना शासन की अनुमति के कैसे इतनी अधिक महंगी जमीन को खरीदा गया?

जांच लगभग पूरी: मामले की जांच कर रहे आईएएस रणवीर सिंह चौहान ने ईटीवी भारत को बताया कि फिलहाल जांच जारी है. ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता. हां इतना जरूर है कि 29 तारीख से चल रही इस जांच में हम काफी आगे तक पहुंच गए हैं. इस पूरे मामले को लेकर हरिद्वार के जिलाधिकारी, उस वक्त के नगर आयुक्त, तहसीलदार, पटवारी समेत कुल 14 लोगों से अब तक पूछताछ करके बयान दर्ज किए गए हैं. इसके साथ ही जमीन बेचने वाले जितेंद्र, सुमन देवी से पूछताछ हो गई है. जबकि धनपाल की दो दिन पहले ही बीमारी से मौत हो गई है. जिसके बाद उनके परिवार के लोगों के बयान दर्ज होने बाकी रह गए हैं. उम्मीद है कि मंगलवार 20 मई तक जांच शासन को सौंपी जाएगी. जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान की मानें तो इस पूरी जांच के बाद साफ हो जाएगा कि आखिरकार क्या कुछ जमीन खरीद में हुआ है?

क्या बोले रावत: सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जांच शुरू होने के बाद से लगातार इस मामले का अपडेट ले रहे हैं और जल्द ही कुछ अधिकारियों को लेकर शासन कोई फैसला ले सकता है. उधर इस मामले में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी हाल ही में सोशल मीडिया पर लिखते हुए कहा था कि इस पूरे घटनाक्रम से राजनीतिक संरक्षण की भयानक बू आ रही है. लिहाजा, इस पूरे मामले की जांच एसआईटी से करवाई जाए और न्यायिक अधिकारी की देखरेख में जांच हो, ऐसी वह मांग कर रहे हैं.
सीएम बोले बख्शे नहीं जाएंगे दोषी: उधर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तरफ से इस पूरे मामले पर पहले ही बयान आ चुका है कि इस जांच में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच में जैसे-जैसे लापरवाही सामने आ रही है, उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है.
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