अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से बीएसएफ के जवानों ने दिया फिट रहने का संदेश, सरहद पर किया योग
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले जैसलमेर बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने योग से फिट रहने का संदेश दिया है.


Published : June 18, 2025 at 4:57 PM IST
जैसलमेर: देश की पश्चिमी सरहद पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले जैसलमेर सीमा पर जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे इस बात का प्रमाण हैं कि योग अब सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का भी एक अहम हिस्सा बन गया है. प्रत्येक सुबह जब सूरज की किरणें भारत-पाक सीमा पर पड़ती हैं, तो बीएसएफ के जवान योग से दिन की शुरुआत करते हैं. यहां का मौसम बेहद कठिन है. तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है, लेकिन इन हालातों में भी जवान आसन और प्राणायाम से अपनी मानसिक और शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाए रखते हैं.
बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि अब योग को जवानों के डेली रूटीन में शामिल कर लिया गया है. ऑपरेशन सिंदूर जैसे तनावपूर्ण अभियानों के बाद जवानों की मानसिक स्थिति को संतुलित रखने के लिए योग सत्रों को विशेष महत्व दिया गया. इससे उनकी नींद, ध्यान और निर्णय क्षमता में काफी सुधार देखा गया. अब जैसलमेर की कई चौकियों पर योग अभ्यास के लिए विशेष प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं और प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की तैनाती की जा रही है. इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों और स्कूलों में भी योग शिविर आयोजित करने की योजना पर काम हो रहा है. बीएसएफ का यह प्रयास न केवल जवानों के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी प्रेरणास्पद है.
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जैसलमेर-वीरता के साथ साधना की धरती: गौरतलब है कि जैसलमेर हमेशा से वीरता, संस्कृति और आध्यात्मिकता का संगम रहा है. तनोट माता मंदिर से लेकर लोंगेवाला युद्ध की गाथाओं तक, यह जमीन देशभक्ति की मिसाल रही है. अब इसी धरती पर योग की साधना जवानों की नई परंपरा बनती जा रही है. रेत के ये धोरे अब सिर्फ युद्ध की गवाही नहीं देते, बल्कि आत्मशांति और आत्मबल के नए अध्याय भी रच रहे हैं. जैसलमेर की मिट्टी आज एक बार फिर भारत को प्रेरणा देने वाले केंद्र के रूप में उभर रही है.
स्थानीय समुदाय भी हो रहा प्रेरित: बीएसएफ जवानों की योग दिनचर्या से अब जैसलमेर का स्थानीय समुदाय भी प्रेरित हो रहा है. सीमावर्ती गांवों के स्कूलों और युवाओं में योग के प्रति रुचि बढ़ रही है. कई स्थानों पर ग्रामीण स्वयंसेवकों ने भी योग सत्र शुरू कर दिए हैं. जिला प्रशासन और बीएसएफ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि यह पहल केवल सैनिकों तक सीमित न रह जाए, बल्कि जैसलमेर के आम नागरिक भी इस बदलाव का हिस्सा बनें. यह बदलाव इस बात का संकेत है कि जैसलमेर अब सिर्फ सीमांत जिला नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक मजबूती की मिसाल बनता जा रहा है.
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योग ने मानसिक रूप से मजबूत बनाया: बीएसएफ के एक अधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा, 'रेगिस्तान में ड्यूटी करना शारीरिक रूप से जितना चुनौतीपूर्ण है, उससे कहीं ज्यादा मानसिक रूप से थकाने वाला होता है. लेकिन जब से जवानों ने नियमित योग शुरू किया है, तब से अंदर एक अलग स्थिरता महसूस होती है. अब नींद बेहतर होती है और तनाव का असर कम महसूस होता है.' बीएसएफ की महिला अधिकारी अनिता का कहना है, 'हम अक्सर परिवार से दूर रहते हैं. त्योहार, खुशी के पल सब मिस हो जाते हैं, लेकिन योग ने हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाया है. अब मुश्किल समय में भी खुद को संभाल पाते हैं.'
योग ड्यूटी का हिस्सा नहीं, अब जरूरत: सीमा पर तैनात एक अन्य जवान भैरवदत ने बताया, 'बीएसएफ हर वक्त अलर्ट रहती है. यहां आराम का कोई समय तय नहीं होता. ऐसे में योग ने हमें आत्मनियंत्रण और फोकस बढ़ाने में मदद की है. योग अब हमारी ड्यूटी का हिस्सा नहीं, जरूरत बन गया है.' बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी कमांडेंट पीएल मौर्य ने कहा,' जैसलमेर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जवानों के लिए एक मानसिक कवच है. इससे निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और टीमवर्क में भी सकारात्मक बदलाव आता है.'

